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हस्तमैथुन – 1


दोस्तों ये कहानी आप सेक्सवासना डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम महक गुप्ता है, मैं यौनसुख की नई पाठक हूँ। यह मेरी पहली कहानी है और यह सच्ची घटना है। आप इस कहानी को पढ़ कर मुझे मेल ज़रूर करना कि यह आपको कैसी लगी। चलो मैं अब कहानी पर आती हूँ, यह बात उस समय की

है जब मैं बारहवीं में पढ़ती थी, हमारे परिवार में मम्मी-पापा, भैया-भाभी और मैं, हम पाँच लोग हैं। पापा बैंक में खजांची हैं और भईया आर्मी में सर्विस करते हैं, उनकी ड्यूटी जम्मू कश्मीर में है। हमारा घर दो मंजिल का है,

नीचे एक कमरा, ड्राइंग रूम, रसोई और लैटरीन बाथरूम है, ऊपर दो कमरे और उनके बीच में सांझा लैटरीन-बाथरूम है। नीचे के कमरे में मम्मी-पापा रहते हैं और ऊपर का एक कमरा भैया-भाभी का है और दूसरा मेरा है। मगर मैं भाभी के कमरे

में ही रहती हूँ क्योंकि भैया आर्मी में हैं इसलिए उनको साल में तीन महीने की ही छुटी मिलती है। ज़ब भैया घर पर रहते हैं तब ही मैं अपने कमरे में रहती हूँ नहीं तो भाभी के कमरे में ही रहती हूँ। मैंने भाभी के कमरे में ही

पढ़ने के लिये एक मेज-कुर्सी लगा रखी है और पढ़ाई के बाद मैं भाभी के साथ ही बेड पर सो जाती हूँ। भाभी दस-साढ़े दस बजे तक घर का काम खत्म करके कमरे में आती तब तक मैं पढ़ाई करती थी, उसके बाद हम दोनों कुछ देर टीवी देखते और सो जाते

! मैं और भाभी सहेली की तरह रहते थे। सब कुछ सामान्य ही चल रहा था, मगर एक रात सब कुछ बदल गया, उस रात मैं और भाभी सो रहे थे और करीब दो बजे भैया घर आ गये। वैसे तो जब भी भैया घर आते तो दिन में ही आते थे मगर उस रात पता नहीं कैसे

आ गये, भैया भाभी की आवाज सुनकर मैं जग तो गई थी मगर मुझे बहुत नींद आ रही थी इसलिए मैं यह सोचकर कि ‘भैया से सुबह मिल लेंगे’ फिर से सो गई। मगर कुछ देर बाद अजीब तरह की आवाज सुनकर मेरी नींद फिर से खुल गई। मैंने चेहरे से

थोड़ा सा कम्बल उठाकर भाभी की तरफ देखा तो मेरी सांस अटक कर रह गई और मैंने दोबारा अपने चेहरे पर कम्बल डाल लिया क्योंकि सामने के नजारे के बारे में मैंने थोड़ा बहुत सिर्फ अपनी सहेलियों से ही सुना था मगर आज पहली बार

देख रही थी, वो भी अपने भैया भाभी को ! भाभी की नाईटी उनके कंधों तक उल्टी हुई थी और नीचे भी उन्होंने कुछ नहीं पहना हुआ था, भैया भी बिल्कुल नंगे होकर भाभी के ऊपर लेटे हुए थे और अपनी कमर को ऊपर नीचे हिला रहे थे। भाभी के

पैर भैया की कमर से लिपटे हुए थे और उनके मुँह से धीरे धीरे ओह्आह्ह ओह्ह्ह्ह की मादक आवाज आ रही थी जिसे मैं आसानी से सुन सकती थी। सर्दी का मौसम था, इसलिए मैंने कम्बल औढ़ रखा था मगर भैया भाभी को ऐसी हालात में देख कर मेरा

पूरा बदन पसीने से भीग गया और मेरे दिल की धड़कन रेल के इंजन की तरह चलने लगी। मैंने फिर से कम्बल को चेहरे से बस इतना सा हटाया कि मैं भैया भाभी को देख सकती थी और वो मेरे चेहरे को नहीं देख सकते थे। वैसे भी उनका ध्यान मुझ

पर बिल्कुल नहीं था, वो समझ रहे थे की मैं गहरी नीन्द सो रही हूँ और उसी तरह लगे रहे। कुछ देर बाद भैया ने गति पकड़ ली वो कमर को जोर जोर से हिलने लगे और साथ ही भाभी के उरोज भी दबा रहे थे और भाभी भी कमर उठा-उठा कर भैया का साथ

दे रही थी। यह सब देख कर मेरी हालत खराब हो रही थी। कुछ देर बाद भाभी की ऊह्ह, आह्ह्ह, आह्ह की आवाज सिसकारियों में बदल गई और भाभी ने अपने हाथों और पैरों से भैया की कमर को कस कर पकड़ लिया और वो शान्त हो गई कुछ देर बाद भैया

भी निढाल हो गए और भाभी की बगल में लेट गए। कुछ देर दोनों ऐसे ही पड़े रहे, फिर भाभी उठी और अपनी ब्रा और पैंटी पहनने लगी। मैंने भाभी को ब्रा और पैंटी में कई बार देखा था मगर भाभी के बड़े बड़े उरोज और योनि को आज पहली बार

देख रही थी। इसके बाद भैया भी उठकर अपने कपड़े पहनने लगे तभी मेरी नजर भैया के लिंग पर गई जो कि अब शान्त हो गया था। मगर अब भी उसका आकार काफी बड़ा था। मैंने पहली बार किसी का लिंग देखा था जो मेरे लिये एक आश्चर्य के जैसा

था। इसके बाद भैया-भाभी सो गए मगर यह सब देखने के बाद मेरी नींद कोसों दूर भाग गई थी, मेरा पूरा बदन भट्टी की तरह तपने लगा, ऐेसा लग रहा था जैसे मुझे बहुत तेज बुखार हो गया हो और मेरी योनि तो अंगारों की तरह सुलगती महसूस हो

रही थी। अपने आप ही मेरा एक हाथ सलवार के ऊपर से ही योनि पर चला गया मुझे पैंटी में कुछ गीला गीला सा महसूस हुआ तो मैंने एक हाथ सलवार के अंदर डाल दिया, योनि से चिपचिपा पानी सा निकल रहा था, मैंने उसे सूंघा तो उसमें से अजीब

सी खुशबू आ रही थी। कम्बल को एक बार फिर चेहरे से हटाकर मैंने भैया भाभी को देखा वो सो चुके थे, मैंने फिर से अपना हाथ सलवार में डाल दिया और योनि की दरार में उंगली घुमाने लगी, उंगली घुमाने से मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था और

पूरे बदन में एक करेंट सा दौड़ने लगा, योनि से पानी निकलने के करण वो पूरी तरह से गीली हो गई थी इसलिए अपने आप ही मेरी एक उंगली योनि के अन्दर चली गई जिसे मैं अंदर-बाहर करने लगी तो मुझे बड़ा आनन्द आने लगा और एक अजीब सा नशा

छाने लगा। इसलिए मैंने उंगली की हरकत को तेज कर दिया, मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरा सारा खून मेरी जांघों के बीच इकट्ठा हो गया है और सारे शरीर में आग भड़क रही है। मैंने उंगली की हरकत को और तेज कर दिया…. मेरा मुँह सूख गया

और साँसें उखड़ने लगी और कुछ देर बाद ही मेरी दोनों जाँघें एक दूसरे से चिपक गई, व मेरा पूरा शरीर अकड़ सा गया और मेरी योनि ढेर सारा पानी उगलने लगी जिससे मेरी जाँघें और पूरा हाथ तक गीला हो गया, आँखें अपने आप मस्ती में बंद

हो गई और पूरे बदन में आनन्द की लहर सी दौड़ गई। अब मैं काफी हल्का महसूस कर रही थी और मेर दिल को एक अजीब सुकून सा मिल गया था। मैंने उँगली से आज पहली बार ये सब किया था, अभी तक मैं इस सुख से अनजान थी। इसके बाद मैं अपनी

पेंटी से ही हाथ को साफ करके, पेंटी व सलवार को ठीक से पहन लिया और फिर पता नहीं कब मेरी आँख लग गई। सुबह मैं देर सोती रही और कॉलेज भी नहीं गई। जब भाभी ने मुझे जगाया तो जागते ही मैंने उनसे भैया के बारे में पूछा ! भाभी ने

बताया कि वो छुट्टी नहीं आये थे, वो तो आगरा किसी काम से आये हुए थे इसलिए एक रात के लिये घर पर भी आ गये और सुबह 4 बजे ही चले गये। मैंने पूछा- फिर कब आयेंगे? तो भाभी ने कहा- तेरे एग्जाम खत्म होने के बाद। इसके बाद भाभी अपना

काम करने लगी और मैं बाथरूम चली गई। जब नहाने लिये मैंने अपने कपड़े उतारे तो मेरा ध्यान अपनी पेंटी पर चला गया जिस पर सफ़ेद दाग लगा हुआ था और वो सूख कर सख्त भी हो गया था। तभी मुझे रात की घटना याद आ गई और शर्म से मेरे गाल

लाल हो गये। मैं बाथरूम में लगे शीशे के सामने जाकर नँगी ही खड़ी हो गई और खुद को देखने लगी। लम्बा कद, दूधिया गोरा रंग, काले घने लम्बे बाल, बड़ी बड़ी काली आँखें, पतले और सुर्ख गुलाबी होंठ, उभरे हुए स्तन जो कि नीम्बू के

आकार से बस थोड़े ही बड़े थे और उन पर गुलाबी निप्पल ऐसे लग रहे थे जैसे सफेद आईसक्रीम पर लाल चेरी रखी हुई हो, पतली कमर, केले के तने सी चिकनी और मखमल सी मुलायभ गोरी जांघें और जाँघों के बीच फ़ूली हुई गुलाबी रंगत लिए मेरी

छोटी सी योनि जिस पर हल्के हल्के रोयें ही आए थे और योनि के बीच हल्का सा दिखाई देता गुलाबी दाना (क्लिटोरियस) ऐसा लगता था मानो पाव (डबल रोटी) को चाकू से बीच में से काटकर उसमें अनार दाना छुपा रखा हो, मांसल भरे हुए

नितम्ब। मैंने पहले भी कई बार खुद को शीशे में नंगा देखा है मगर आज़ पता नहीं क्यो खुद को देख कर रोमाँचित हो रही थी और बदन में एक अजीब गुदगुदी सी होने लगी। मैं भाभी से अपने शरीर की तुलना कर रही थी मगर भाभी के मुकाबले

में मेरा शरीर कुछ भी नहीं था क्योंकि भाभी तो पूरी तरह खिला हुआ फ़ूल थी और मैं अभी ताजा ताजा खिली हुई कली के समान थी जिसको फ़ूल बनने में अभी काफी समय लगना था। थोड़ा गौर से देखने पर मुझे योनि पर भी सफेद दाग दिखाई दिया

मैंने हाथ में पानी लिया और योनि को साफ करने लगी, जैसे ही ठण्डे पानी का स्पर्श योनि से हुआ तो मेरे पूरे बदन में सिहरन सी दौड़ गई और मैं उत्तेजना से भर उठी, एक बार फिर मैंने अपनी उंगली से हस्तमैथुन किया, इस बार मुझे रात

से भी ज्यादा मज़ा आया। इसके जब भी मुझे मौका लगता, मैं उंगली से अपना काम कर लेती थी और मुझमें काफी परिर्वतन भी आ गया था। अब मैं बनने-सँवरने पर काफी ध्यान देने लगी, घन्टों तक बाथरुम में नँगी होकर खुद के शरीर को देखती

रहती और भाभी से अपनी तुलना करती। जब भी लड़कों की नजर मुझे घूरती तो मैं सहम सी जाती क्योंकि अब मुझे मालूम हो गया था कि लड़कों की नजरें मुझमें क्या ढूंढती हैं। और यह सारा बदलाव मुझमें उस रात की घटना के बाद आया।
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