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देसी चूत


दोस्तों ये कहानी आप सेक्सवासना डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

हैलो मेरा नाम समीर है लोग मुझे प्यार से राज कहते है, जोधपुर में रहता हूँ और एक बहुत बड़ी कंपनी में मार्केटिंग मैंनेजर हूँ। इसी वजह से मैं कई देशों की यात्रा भी कर चुका हूँ.. या सच कहूँ तो कई देशों की जवानी का मज़ा

लूट चुका हूँ। अमेरिकन.. रूसी.. जर्मन और जापानी लड़कियों का तो मैं दीवाना हूँ.. बिल्कुल गुड़िया जैसे लगती हैं। ख़ासकर वहाँ के SOAP Land का.. जापान में बहुत सारे SOAP Land हैं। जहाँ पर एक साथ कई लड़कियों के साथ आप सेक्स कर सकते

हैं। एक लड़की आपका लंड चूसती है.. तो दूसरी को आप चूम रहे होते हैं.. तीसरी की चूत में ऊँगली और चौथी की गाण्ड में.. और फिर दो लड़कियों के मम्मों के बीच में लण्ड रगड़ना.. आहा क्या कहें.. जैसे जन्नत का मजा.. सबसे ज़्यादा

मज़ा तो वहाँ वाइन-पूल में आता है.. जब आपके साथ एक साथ 9 लड़कियाँ नहा रही हों तो कैसा लगता है.. आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं। वैसे तो मैंने कुछ देसी लड़कियों का भी रसपान किया है.. पर आज तक किसी देसी अनछुई चूत का मज़ा नहीं

लिया.. बस जीवन में यही एक कमी रह गई थी। पर कहते हैं ना.. जिंदगी एक सपने को पूरा करने का एक मौका ज़रूर देती है। कुछ ऐसा ही मेरे साथ भी हुआ। दोस्तो, मैं आपको बता दूँ कि मैं पढ़ाई में बहुत होशियार हूँ और मैं एमबीए

गोल्ड-मेडलिस्ट भी हूँ। मैंने पढ़ाई में बहुत मेहनत की थी.. उसका फल शायद अब मिलने वाला था, पर वो फल इतना मीठा होगा मैंने सोचा भी नहीं था। बात कुछ दो महीने पहले की है.. मेरे घर के ऊपर वाले हिस्से में हमेशा कोई ना कोई

किरायेदार रहता है.. और मेरी मम्मी को मेरी हरकतों के बारे में शक हो गया था.. इसी लिए मम्मी हमेशा किरायेदार ऐसा ही रखती थीं कि मुझे कोई मौका ना मिले। पर जब खुदा मेहरबान तो गधा पहलवान होता है.. अब की बार जो अंकल हमारे

यहाँ रहने आए थे.. उनके भाई की गाँव में मौत हो गई और अपनी भतीजी को यहाँ ले कर आ गए। उसका नाम राधा था.. क्या बताऊँ दोस्तो.. क्या माल थी.. बड़े-बड़े मम्मे.. आँखें तो जैसे मोती.. पाँव में खनकती पायलें.. घुटनों से थोड़ा नीचे तक

घाघरा और सबसे बड़ा तो तंग चोली पर एक पतला सा दुपट्टा और उसमें से उछलते हुए मम्मे.. होंठ तो इतने लाल.. जैसे अभी-अभी लिपस्टिक लगाई हो.. एकदम रसीले.. उसको देख कर मेरा मन तो कर रहा था.. कि अभी चोद दो.. पर मम्मी की वजह से अपने

ऊपर काबू बनाए रखा वरना पहली बार किसी लड़की का रेप भी कर देता। पता नहीं उसके गाँव वालों ने कैसे खुद को रोका होगा। कुछ दिन तो निकल गए.. कोई मौका नहीं मिला। फिर अचानक मुझे काम से सिंगापुर जाना पड़ा.. वहाँ दस दिन रहा

और एक लड़की के साथ मज़े किए.. पर मन बेचैन था.. हमेशा दिमाग़ में राधा का ही चेहरा घूमता था। राधा.. राधा.. राधा.. बस एक ही धुन थी। इसी वजह से सिंगापुर से जल्दी घर जाना चाहता था। खैर जैसे-तैसे दिन निकले और मैं जोधपुर

वापस आया.. अगले ही दिन मेरी माँ को मेरे मामा के पास जाना पड़ा.. यही वो पल था जिसका मुझे इंतज़ार था। शाम को मैंने अंकल ने और राधा ने साथ ही खाना खाया। टेबल पर खाते वक्त मैंने देखा वो भी बार-बार मुझे ही देख रही है.. कुछ

इधर-उधर की बातों के बाद अंकल ने मुझसे पूछा- क्या तुम राधा की पढ़ने में मदद कर दोगे? ‘अँधा क्या माँगे दो आँखें..’ मैंने फ़ौरन ‘हाँ’ कर दी और कहा- मैं कुछ दिन छुट्टी पर हूँ.. इसलिए दोपहर को ही पढ़ा सकता हूँ। उस वक्त जब

अंकल नहीं होते थे। मैंने बॉस से झूठ बोल कर छुट्टी ले ली। अगले दिन का मुझे बेसब्री से इंतज़ार था.. मैंने राधा के बारे में सोच कर रात को मुठ भी मारी। अगले दिन दोपहर को मैंने राधा को पढ़ाना चालू किया.. पढ़ाई से

ज़्यादा तो मैं उसे मम्मों का नज़ारा देखने में मस्त था.. मेरी पैन्ट में तो काला नाग जाग रहा था। शायद राधा मेरी हरकतें समझ गई थी। कुछ देर बाद मैंने उससे पूछा- शहर कैसा लगा? ‘एकदम बेकार.. यहाँ लड़कियाँ कितने छोटे

कपड़े पहनती हैं।’ ‘अरे वो तो फैशन है यहाँ का.. लड़कों को जलवा दिखाने के लिए..’ ‘रहने दो.. लड़कों को पटाने के लिए छोटे कपड़े की क्या ज़रूरत है.. मैं तो कभी नहीं पहनूंगी..’ मैंने कहा- तुम्हें ज़रूरत नहीं है.. तुम बस किसी

की तरफ देख भर लो.. तो वो वैसे ही पागल हो जाए.. तुम्हारी आँखें तो बहुत नशीली हैं और तुम्हारे…!! ‘मेरे क्या…???’ बात काटते हुए बोली। मैं घबरा गया.. बात घुमाते हुए बोला- तुम..तुम्हारी आवा..ज़.. तुम्हारी आवाज़ कितनी मीठी

है। ‘क्यूँ झूठ बोल रहे हो.. तुम मेरे बोबों के बारे में बात कर रहे थे… मुझे मालूम है.. जब से मैं इस घर में आई हूँ.. तुम्हारी नज़र बस मेरे बोबों पर है।’ और वो उठ कर चली गई। मैं सकपका गया.. अचानक ये क्या हो गया उसको.. मुझे

लगा सब ख़तम.. अब वो मक्खी भी नहीं बैठने देगी। पर पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त… अगले दिन फुल गले का सलवार कमीज़ पहन कर आई और बोली- आज पढ़ाओगे? बिना मन के मैंने उसे ‘हाँ’ कर दिया और पढ़ाने लगा। आज तो कोई नज़ारा भी

नहीं दिख रहा था.. पर तभी अचानक मुझे पैरों पर कुछ महसूस हुआ.. वो राधा थी जो मुझे पाँव से छू रही थी। दोस्तों लोहा गरम हो चुका था। ‘आज इन कपड़ों में बहुत सुंदर लग रही हो राधा।’ ‘वो तो मैं हूँ.. पर लगता है तुम बहुत बेचैन

हो..आज कुछ दिख नहीं रहा इसलिए…’ मैंने हामी भरी। ‘देखना ही है.. तो पूरे नज़ारे का मज़ा लो.. अधूरा क्यूँ..!’ राधा के ये शब्द सुन कर तो जैसे पूरा आसमान मिल गया.. मैंने राधा के मम्मों के ऊपर हाथ रखा.. आह्ह.. कितने नरम और

कोमल.. निप्पल भी एकदम कड़क हो रहे थे। ‘और ज़ोर से दबाओ राज.. ना जाने कब से प्यासी थी.. आज मेरी प्यास बुझा दो।’ बस फिर तो कयामत आ गई.. हम दोनों एक-दूसरे के बदन से चिपक गए.. एक-दूसरे को चूम रहे थे। मैंने उसके रसीले होंठों

को जी भर के चूमा.. मैंने पूछा- आज से पहले कभी किया है? राधा बोली- नहीं.. आज तक किसी लड़के ने नहीं किया.. आज तक मैं प्यासी थी.. राज.. आज मेरी प्यास बुझा दो.. मैंने गाँव में सहेली से साथ ‘वो’ वाली फिल्म भी देखी है। ‘ठीक है..

आज तो तेरी ऐसी चुदाई करूँगा.. कि जिंदगी भर याद रखेगी।’ कुछ देर चूमा-चाटी के बाद मैंने उसे गोद में उठाया और शयनकक्ष में ले गया.. वो तो जैसे मेरे बदन से चिपक ही गई और मेरे कपड़े नोंचने लगी। मैंने भी उसेके कपड़े

निकाले और कुछ ही देर में हम दोनों अंतवस्त्रों में थे। अब धीरे-धीरे मैंने उसकी ब्रा और पैन्टी भी निकाल दी और पूरे बदन को चूमने लगा.. ऊपर होंठ से शुरू करते हुई उसके मम्मों.. फिर पेट.. को चूमता हुआ.. उसके योनि द्वार तक

पहुँच गया और एक मादक महक में खो गया.. आह्ह.. एकदम कुँवारी चूत.. ऊपर थोड़े से बाल थे.. लगता था कुछ ही दिन पहले झांटें साफ़ की हैं। मैं जीभ से उसे चोदने लगा.. जैसे ही मैंने उसे योनि पर चूमा.. वो सिहर उठी.. वो बिन पानी की मछली

की तरह तड़प रही थी और मैं उसे और तड़पा रहा था। दोस्तों लड़की तो जितना तड़पाओगे.. उतना ही मज़ा चोदने में आएगा। आप तो जानते ही है मैं चूत का कितना बड़ा पारखी हूँ। मैंने देख लिया था कि राधा अभी तक कुँवारी है.. कोई

लण्ड तो क्या.. अभी तक शायद किसी ने ऊँगली भी ठीक से नहीं डाली थी। कुछ ही देर में वो झड़ गई और पूरा चूत का रस मेरे मुँह पर निकाल दिया, अब राधा की बारी थी। वो मेरा लंड चूसने लगी.. मेरा दस इंच का लण्ड उसके गले में दस्तक

दे रहा था। राधा को देख कर लग नहीं रहा था कि वो पहली बार चूस रही है.. पर सच तो यही है। जोश में आकर मैंने राधा के बाल पकड़ कर अपना लण्ड ज़बरदस्ती उसके मुँह में डाल-निकाल रहा था। कुछ देर चूसने के बाद राधा उठी और बोली-

मेरे राजा.. अब और ना तड़पा.. मेरी चूत की खुजली मिटा दे.. मैंने राधा को उठा कर बिस्तर पर लिटाया और कमर के नीचे तकिया रख दिया.. ताकि लण्ड.. चूत में आराम से जा सके। कुछ देर तक लण्ड का सुपारा चूत पर फिराने के बाद अन्दर डाला..

अभी आधा ही गया होगा कि राधा दर्द से तड़पने लगी और मुझे भी दर्द हो रहा था.. क्यूँकि उसकी चूत बहुत टाइट थी। कुछ देर आधा लण्ड ही अन्दर-बाहर करता रहा और राधा को चुम्बन करता रहा। तभी मैंने एक ज़ोर से झटका मारा और मेरा

लण्ड चूत की सील तोड़ता हुआ चूत की गहराइयों में समा गया.. लाख कोशिश के बाद भी राधा की चीख दबा नहीं पाया और पूरा कमरा राधा की सिसकारियों से गूँज उठा। मुझे डर था किसी ने सुन ना लिया हो… पर अब वो बाद में देखा

जाएगा। थोड़ी देर बाद दर्द कम हुआ तो राधा भी मेरा साथ देने लगी.. पूरा कमरा ‘फच्च-फच्च’ की आवाज़ से गूँज उठा। लगभग 15 मिनट तक चोदने के बाद मैंने अपना सारा माल राधा की चूत की गहराइयों में उतार दिया। कुछ वीर्य बहकर

चूत के बाहर आ गया.. साथ में खून भी था। मैंने तो मानो गढ़ जीत लिया हो.. राधा की चूत से निकलने वाला वीर्य जैसे मेरी छाप हो.. कि आज से ये चूत मेरी हुई…। खैर जब लण्ड बाहर निकाला तो वो पूरा खून से भरा हुआ था। राधा थोड़ी

घबराई हुई थी.. पूरी चादर खून से रंगी हुई थी। मेरी इच्छा तो राधा की गाण्ड मारने की भी थी.. पर राधा की हालत देख कर मैंने अपने आप को रोका.. क्यूँकि राधा तो अब घर की मुर्गी थी.. जब चाहे मार लूँगा.. वैसे भी अंकल आने वाले

हैं। हम दोनों ने एक-दूसरे को किस किया और चादर आदि साफ़ करने में लग गए। अगली कहानी में मैं आपको बताउँगा कि कैसे मैंने राधा की गाण्ड मारी। वैसे आपको क्या लगता है.. सील तोड़ते वक़्त राधा की चीख किसी ने सुन ली

थी?? बाकी अगली कहानी में…
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