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दोस्त की शादी शुदा बहन


दोस्तों ये कहानी आप सेक्सवासना डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

मेरे दोस्त की शादी शुदा बहन Sushma (changed) :- मेरा नाम सुसांत, यह मेरी तीसरी कहानी है sexvasna पर। लकिन फिर भी मैं अपने बारे मे बता दू मैं 22 साल का एक गोरे रंग का र्स्माट दिखने वाला लड़का हूँ। मैं मूल रूप से पटना का रहने वाला हूँ

लेकिन फिलहाल नोएडा में अकेला रह रहा हूँ। लड़कियाँ कहती हैं कि मुझमें कुछ बात है जो उन्हें मेरी तरफ आकर्षित करती है। मेरे लण्ड की लम्बाई सात इंच तथा मोटाई तीन इंच है। मेरा शरीर गठीला है क्योंकि कॉलेज के शुरूआती

दिनों से ही मुझे कसरत का शौक रहा है। यह कहानी है मेरे दोस्त मयंक की बहन Sushma (changed) और मेरी ! यह बात कुछ 6 महीने पुरानी है। मयंक मेरा दोस्त था |सो मैं उसके घर आता जाता रहता था | एक दिन मैं उसके घर गया | तो मैं ने एक लड़की को

देखा | मैं देखते ही मानो होश खो बैठा ! ऐसा फिगर मैंने आज तक नहीं देखा- 36-24-32, क्या चूचियाँ थी ! गोरे गाल बिल्कुल दूध की तरह, गुलाबी होंठ जैसे बुला रहे हों कि आओ हमें चूस लो ! काले और लम्बे बाल, जो खुले हुए थे, आह ! क्या नशीला

बदन था ! उसको देखकर मेरे होश उड़ गए उसकी पतली कमर, चिकनी मस्त गांड, भरी हुई बड़ी-बड़ी चूचियाँ देख कर मेरे मन में उसके साथ रात बिताने के ख्याल आने लगे,उसकी बड़ी बड़ी चूचियों की घुन्डी बगैर ब्रा के टीशर्ट से साफ दिख रही

थी। उसकी झील सी आँखों का तो जवाब ही नहीं था, तीखे नयन-नक्श, कुल मिला कर उसके बदन में कहीं से भी कोई भी कमी नजर नहीं आती थी। उसकी उम्र लगभग 25 साल होगी, वो इतनी सेक्सी लग रही थी कि मुझे लगा कि मैं खड़े-खड़े झड़ जाऊँगा। तवी

मेरे दोस्त ने बताया की ये उसकी बड़ी बहन है जिसकी 15 दिन पहले शादी हुई है | लेकिन उसके पति को कॉल आ गया और शादी की रात को ही चले गये |मैं ने मान मे सोचा इसने सुहागरत भी नही मनाया होगा| आब कुछ दिन यही रहे गी | मैं बोला चलो

आछी बात है |और फिर मैं बैठ गया तब वो चाए ले कर आई मुझे देने के लीए झुकी जिस से उसकी दोनो चुचि आधी मुझे दिख गयी | और मैं ध्यान से उसकी चुचि को देख रहा था मन कर रहा था की अभी मैं उसके चुची को पाकर कर मसल दू पर मैं कुछ कर

नहीं सकता था। | ये बात सयद उसे पता चल गया | सो वो जान बूझ के सोफे पर ऐसे झुक के बैठी कि उसे उसके बूब्स आसानी से दिख जायें. मैं ने भी मेरे बूब्स को देखने का लालच नहीं छोड़ा. उसने मुझे देखते हुए पकड़ लिया. वो मुस्कराई. और

मैं शरमा गया … आब मैं मयंक के घर बहुत जाता था। मयंक से मिलने और फिर Sushma (changed) को तारने और किसी बहाने से उसको छूने। एक दिन मैं उसके घर गए और हमने घर के बाहर से आवाज दी पर कोई बाहर नहीं आया। हमने दरवाज़े की घण्टी बजाई तो

अंदर से Sushma (changed) बाहर आई।और तब वो रेशमी चोली, घाघरी और ओढ़नी पहनी थी। उसने कहा- घर में कोई नहीं है ! यह सुनकर मुझे यकीन हो गया कि उसका इशारा क्या है। फिर वो मेरे पास ही सोफ़े पर बैठ गई। मैंने थोड़ी बात की और फिर उसने जोर

देकर कहा- घर में कोई नहीं है ! और अपनी ओढ़नी को हटा दी |और मेरी ओर झुक कर बैठ गयी और मुझे उसके चुची आराम से दिखने लगी |फिर मैं उसके बिल्कुल बाजू में बैठ गया और उसकी जांघों से मेरी जांघें टकराने लगी। वो कुछ नहीं बोली,

मेरा विश्वास बढ़ गया। मेरा बदन भी अब गर्म हो गया। मैंने अब अपना हाथ उसकी जांघ पर रखा और धीरे-धीरे हाथ फ़िराने लगा। वो पत्थर सी हो गई। मैं अपनी कोहनी उसके चूचों पर टकराने लगा। धीरे धीरे और नजदीक आ गया मैं उसके बदन

के ! चोली छोटी होने से उसकी गोरी गोरी कमर और सपाट पेट का काफ़ी हिस्सा खुला था। मैने उसे कमर से थाम लिया। उसने अपनी बाहें मेरे गले में डाल दी। मैने उसे पास खींच लिया। मेरा सिर उसके सीने से दब गया। सिर हिला कर मैने

उसके स्तन टटोला। खुले हुए गोरे पेट पर मैने किस कर दिया। गुदगुदी से वो छटपटाई। उसे पकड़ कर मैं किस करता रहा। आख़िर मेरे बाल पकड़ कर उसने मेरा सिर हटा दिया। बोली: मुझे बहुत गुदगुदी होती है मैं: ये तो तेरा पेट है

यहाँ (चूत पर हाथ रखते हुए) किस करूँगा तब क्या होगा? उसने तुरंत मेरा हाथ हटा दिया। एक उंगली मेरे होठों पर रख कर बोली: धत्त, ऐसा नहीं बोलते। मैने होंठ खोल उंगली मुँह में ली और चूसने लगा। मेरा दूसरा हाथ कमर पर से उतार

कर उसके भरे भरे चूतर पर जा पहुँचा। मैने कूल्हे सहलाए और दबाए। उसने मेरे मुँह से उंगली निकाल ली और सिर झुकाकर अपने होंठ मेरे होंठ से लगा दिए जांघें चौड़ी कर मैने उसे मेरी बाई जाँघ पर बिठा दिया। हमारे होंठ किस में

जुटे हुए थे। बंद होंठ से ही मैने उसके कोमल होंठ रगड़े। मुँह खोल मैने उसके होंठ मेरे होंठ भींच लिए और जीभ से चाटे। फूल की पंखुड़ी जैसे कोमल उसके होंठ मुझे इतने मीठे लगे कि मेरा लंड अकड़ने लगा। जीभ से मैने होंठ टटोले

तब वो फिर छटपटा गयी मैने कहा : मुँह खोल तो ज़रा। थोड़ी हिचकिचाहट के बाद उसने मुँह खोला। मेरी जीभ अंदर जाकर चारों ओर घूम चुकी और उसकी जीभ से खेलने लगी। मैने जीभ लंड जैसी कड़ी बनाई। कड़ी जीभ अंदर बाहर करके मैने Sushma

(changed) का मुँह चोदा। जब मैने मेरी जीभ वापस ले ली तब उसने अपनी जीभ से वो सब किया जो मैने किया था। हम दोनो एक्साइट होने लगे। किस चालू ही थी कि मेरा हाथ Sushma (changed) के पेट पर चला गया।और मैने पेट को सहलाया। उसकी बाहें मेरे गले

में थी इसलिए दोनो स्तन खुले थे। पेट पर से मेरा हाथ चोली में क़ैद Sushma (changed) के स्तन पर गया। पहले मैने हलके स्पर्श से स्तन सहलाया, बाद में दबाया। चोली पतले कपड़े की थी और लो कट भी थी। मेरी उंगलियों ने कड़ी निप्पल ढूँढ

निकाली। दो उंगलियों से टटोलने के बाद मैने निप्पल चिपटी में ली। Sushma (changed) ने मेरी कलाई पकड़ ली और हाथ हटाने का प्रयत्न किया। मुट्ठी में स्तन भर के मैने हटाने दिया नहीं। उधर किस की मस्ती में वो अपना स्तन भूल गयी चिपटी

में पकड़ी हुई निप्पल मैने मसली और खींची। उसकी बाहों की पकड़ ज़्यादा ज़ोरदार हो गयी निप्पल छोड़ मेरी उंगलियों स्तन के खुले हिस्से पर घूमने लगी मैने चोली के अंदर उगली डालने का प्रयत्न किया लेकिन डाल न सका

क्योंकि चोली छोटी और टाइट थी। तो मैने एक एक कर चोली के हुक खोलने लगा तभी वो बोली कोई आ जाए गा |तब तक मैं उसके 2 हुक खोल चुका था |सो मैने अपने हाथ को उसके चोली के अंदर डाल दीया और ज़ोर ज़ोर से उसके चुची को दबाने लगा

| फिर मेरा हाथ फिसलती हुई उसकी चूतर पर काला गया और मैने उसकी गॅंड को दबा दीया | और उसकी घाघरी को थोरा उपर खिसका कर उनकी चूत पर उपर से हाथ फरने लगा। फिर मैने उसे सोफे पर लिटा दीया और मैंने बिना वक्त गंवाए उसकी चूत पर

मुँह लगा दिया और पैंटी के ऊपर से ही उसको चूसने लगा। वो मेरे सर को जोर जोर से दबाने लगी और मैं भी जोश में आकर उसकी चूत को चूसने लगा। अब मैं अपने आपे से बाहर हो रहा था। मैंने अब मौका गंवाए बिना उसकी पैंटी भी उतार

फेंकी। फिर मैं अपना मुँह उसकी चूत के पास लेकर गया और उस पर चूम लिया। उसने अपनी टाँगें चौड़ी कर दी। मैं अब उसकी चूत को अच्छी तरह देख सकता था। मस्त, गुलबी, बिना बालों की एकदम फूली हुई चूत थी उसकी जिसमें से अजीब सी

खुशबू आ रही थी। उसकी चूत को देख कर साफ़ पता लग रहा था कि उसने अपने बाल आज ही साफ़ किये थे मतलब आज वो इसके लिए तैयार थी। मैंने अपनी जीभ उसकी चूत में डाल दी और उसको चाटने और चूमने लगा। उसकी चूत पानी छोड़ने लगी थी और मैं

उसका रस पी रहा था। की तभी दरवाज़े की घण्टी बजाई किसी ने हम दोनो अलग हुए और अपने अपने कापरे ठीक कर लीया और फिर Sushma (changed) ने दरबाजा खोला तो सामने मयंक था |तो Sushma (changed) बोली मयंक सुसांत बहुत देर से तुम्हारा इंतजार कर रहा है

| फिर मैने मयंक से कुछ बात की और चला गया और मन ही मन मयंक को गली दे रहा था की सला कुछ देर बाद नही आ सकता था कुछ देर बाद आता तो मैं Sushma (changed) को चोद चुका होता | फिर मैं तब से मौके की तलास मे था की एक दिन हमारे एक दोस्त राजीव के

घर पर पार्टी थी और वो मयंक का फेमली फ्रेंड था| तो Sushma (changed) और मयंक भी पार्टी में आये थे। उस दिन Sushma (changed) ने गुलाबी रंग की साड़ी पहनी हुई थी और स्लीवलेस ब्लाऊज़ और पीछे पीठ का भाग पूरा खुला ही था सिर्फ एक डोरी बंधी हुई

थी, उसे देख कर मैं पागल होने लगा था और मान मे सोचा की आज कुछ भी करके इसे चोदु गा | तभी Sushma (changed) ने मुझे देखा और हम लोग बात करने लगे फिर हम दोनो नीचे हाल में आ गए। थोड़ी देर वहां कुछ खाया पिया और बातें करते रहे। तभी मेरी

नज़र डांस फ़्लोर पर गयी जॅहा कुछ जोड़े डांस कर रहे थे। मैं बोला- चलो Sushma (changed) ! डांस करते हैं… हां … चलो… ना… हम दोनो डांस फ़्लोर पर आ गए। मैंने उसकी कमर में हाथ डाला तो वो सिहर गयी | उसने मेरी कमर में हाथ डाल दिया और हम

थिरकने लगे। वो जान बूझ कर अपने बूब्स मेरे सामने उछाल रही थी। मेरी नज़रें Sushma (changed) के बूब्स से हट नहीं रही थी। फिर मैंने उससे टकराना शुरू कर दिया।फिर वो कभी बूब्स टकरा देती तो कभी उससे चिपक जाती और मेरा लंड खरा हो गया

| और वो मेरा लंड उसके चूत पर उसको महसूस होने लगा और मैं अपना हाथ उसकी नंगी पीठ पर फिरने लगा और हाथ फेरते फेरते मेरा हाथ उसके चूतर पर चला गया और मेने उसकी चूतर को दबा दीया | तो वो बोली अभी नही बाद मे सब देख रहे है | फिर

मैं राजीव को बोल कर जाने लगी तो मयंक बोला सुशांत तुम दीदी को भी घर छोर दोगे मुझे यहा कुछ काम है मैं कल जाउ गा |मैं बोला कोई बात नही मैं छोर दूँगा | और बाहर नीकल कर बोला हम तो यही चाहते ही थे |और हम दोनो मेरे कार मे आ कर

बैठ गये | और मैं उसको अपने घर ले आया और आते ही हम एक दूसरे से लिपट गए। अब उसकी मीठी आवाज निकली- चलो, बेडरूम में चलते हैं। आहा ! बेडरूम में जाते ही वो मुझसे लिपट गई जैसे वृक्ष से लता लिपटजाती है। उसका बदन मेरे बदन से

रगड़ने लगा, और उनको चूमने लगा। वो भी बड़ी बेसबरी से मुझे चूम रही थी। चूमते हुए मैं एक हाथ उनके मम्मों पर ले गया और ऊपर से ही दबाने लगा। क्या बताऊँ दोस्तो ! मैं तो जन्नत की सैर करने लगा था जैसे ! कितना मज़ा आ रहा था, मैं

बयान नहीं कर सकता ! यह तो महसूस ही किया जा सकता है बस। फिर मैं अपने हाथ से धीरे धीरे उसके स्तनों को ब्लाउज के उपर से ही दबाने लगा था | उसकी हल्की हल्की सिसकारियाँ निकलने लगी थी | मैंने Sushma (changed) को बिस्तर पर लिटा दिया।

साड़ी अलग कर दी और चूमते हुए ब्लाउज खोलने लगा। ब्लाउज हटते ही उसके नंगे स्तन मेरी हथेलियों में क़ैद हो गये। उसके प्यारे प्यारे स्तन मैं अच्छी तरह देख सका। क्या स्तन पाए थे उस लड़की ने? इतने ख़ूबसूरत स्तन की मुझे

उम्मीद नहीं थी। गोरे गोरे गोल गोल छोटे श्रीफ़ल की साइज़ के उसके स्तन कड़े थे। चिकनी मुलायम चमड़ी के नीचे ख़ून की नीली नसे दिखाई दे रही थी। स्तन की चोटी पर बादामी कलर की दो इंच की एरोला थी। एरोला के मध्य में कि के

दाने जैसी कोमल छोटी सी नीपल थी। उस वक़्त एक्साइटमेंट से एरोला उभर आई थी और निप्पल कड़े हो गये थे। मैने पहले हलके स्पर्श से सारा स्तन सहलाया, बाद में मुट्ठी में लिया। निप्पल को चिपटी में लेकर मसला। और करीब पाँच

मिनट तक उसके मम्मों के साथ खेलने के बाद उसने मेरी पैंट उतार कर मेरा लौड़ा निकाल लिया और अपने मुट्ठी में भर कर वो मेरा लौड़ा हिलाने लगी। मेरा लौड़ा एकदम लोहे की छड़ की तरह हो गया था। उसने मेरे लौड़े को मुँह में लेकर

चूसना शुरू कर दिया। . देर फिर Sushma (changed) को बाहों में भरकर मैं पलंग पर ले गया। उसे चित लेटा कर मैं बगल में लेट गया। मैने उसके सीने पर जगह जगह पर चुंबन किए। ऐसे करते करते मैने दोनो स्तनों भी चूम लिए। अंत में मैने निप्पल

मुँह में ले लिये। मैने जीभ से निप्पल टटोले, बाद में चूसा। मुँह खोल कर मैने एरोला साथ थोड़ा सा स्तन मुँह में लिया और चूसने लगा। Sushma (changed) के नितंब हिलने लगे। मेरा हाथ पेट पर फिसल रहा था, उसका हाथ मेरे बालों में रेंग रहा

था। निप्पल चूसते चूसते मैने मेरा हाथ चूत की ओर बढ़ाया। मैने घाघरे के नाड़े को छुआ तो Sushma (changed) ने मेरी कलाई पकड़ ली। मैने ज़ोर लगाया लेकिन वो मानी नहीं। उसने टाँगें सीधी रखी थी। एक ओर मैं स्तन छोड़कर उसके पेट पर किस

करने लगा और दूसरी ओर घाघरे के आरपार चूत सहलाने लगा। चूत ने भरपूर काम रस बहाया था। जिस तरह पेटीकोट गीला हुआ था इससे मालूम होता था कि Sushma (changed) ने पेंटी पहनी नहीं थी। मैं पेट पर किस करते करते चूत की ओर चला। मैने जब उसकी

नाभि पर होंठ लगाए तब गुदगुदी से वो तड़प उठी। मैने उसे छोड़ा नहीं। मैने जीभ से उसकी नाभि टटोली। Sushma (changed) खिल खिल कर हँस पड़ी और उसकी जांघें ऊपर उठ गयी फिर क्या कहना था? पेटीकोट सरक कर कमर तक चढ़ गया मेरे कुछ किए बिना Sushma

(changed) की चूत खुली हो गयी उसने टांगे लंबी करने का प्रयत्न किया लेकिन मेरा हाथ जाँघ के पीछे लगा हुआ था, मैने जांघें उठी हुई पकड़ रखी थी। पूर्वी जांघें सिकोड़ दे इससे पहले मैने अपने हाथ से चूत ढक दी। मैं अब बैठ गया।

होले से उसकी जांघें चौड़ी कर दी। Sushma (changed) ने आँखें बंद कर दी। दोनो हाथ से मैने जांघें सहलाई और चौड़ी पकड़ रखी। फिर मैं ने उसका पेटीकोट भी उतार दीया |वो एक दम नंगी हो गई थी। मैंने तो पहली बार किसी को नंगा देखा था। मैं

तो बस पागल हो रहा था और उसको चूमने लगा। फिर हम दोनों 69 की अवस्था में आ गये। कोई 15 -20 मिनट तक चाटने के बाद वो बोली- अब मुझे शांत कर दो ! मैंने पूछा- कैसे? तो बोली- अपना लंड मेरी चूत में डाल दो ! उसने मुझे अपने ऊपर लिटा

लिया और मैं अपना लंड उसकी चूत में डालने लगा तो लंड ढंग से नहीं जा पा रहा था। उसने हाथ से लण्ड को पकड़ा और अपनी चूत पर रखकर बोली- अब करो ! मैंने जैसे ही झटका मारा तो थोड़ा सा ही लंड अंदर गया क्योंकि उसकी चूत बहुत तंग थी।

फिर मैं धीरे धीरे डालने लगा और जब लंड पूरा घुस गया तो मैं झटके मारने लगा। मेरे झटके और बस के झटकों से हम दोनों को अलग ही मजा आ रहा था। 40-45 झटकों के बाद वो झड़ने लगी तो उसने मुझे बहुत जोर से पकड़ लिया और अपने अंदर समेटने

की कोशिश करने लगी। पर मेरा अभी झड़ा नहीं था तो मैंने उसकी चूत से लंड नही निकाला और तेज-तेज करने लगा। फिर 10-12 झटकों के बाद मैं भी झड़ गया और उसके ऊपर ही लेटा रहा और उसको चूमता रहा। हम लोगों को इस काम में बहुत मज़ा आया था।

हम दोनों अब एक दूसरे से चिपक कर लेटे थे। उसके शरीर क़ी गर्मी से थोड़ी ही देर में मेरा लंड फिर खड़ा होने लगा। अब मेरा लंड उसके चूतड़ों क़ी दरार के बीच था। उसने फिर मेरा लंड मुँह में लेकर चूस-चूस कर खड़ा कर दिया। अब

मैंने उसको घोड़ी की अवस्था में आने को कहा तो वो अपने घुटनों पर बैठ कर घोड़ी बन गई। मैंने उसकी गांड के छेद पर क्रीम लगाई और अपना लंड उस पर रख कर जोर लगाने लगा। थोड़ी देर क़ी मेहनत के बाद मेरा लंड उसकी गांड में था। मैंने

फिर उसकी गांड क़ी चुदाई शुरु कर दी और अपने हाथ उसके वक्ष पर रख के उनको दबाने लगा। हम लोग बिलकुल कुत्तों की तरह एक दूसरे को चोद रहे थे। थोड़ी देर क़ी चुदाई के बाद हम लोग दुबारा झड़ गए। फिर कुछ देर वैसे ही लेट कर सो गए।

थोड़ी देर बाद मैं उठा और कपड़े पहन कर तैयार हो गया। वो अभी भी बिना कपड़ों के लेटे मुझको देख रही थी। उसने मेरा हाथ पकड़ के कहा- मन अभी भरा नहीं ! अभी मत जाओ ! तो मैंने उसके होंठों को चूम कर कहा- जान, चिंता मत करो, अब तो मैं

तुमको रोज खुश किया करूँगा। फिर मैंने उसके चुचूक मुँह में लेकर उनको बहुत देर तक चूसा और उसको उसके घर पर छोड़ आया | उस दिन के बाद हम दोनों को जब भी मौका मिलता था हम चुदाई करते थे। दोस्तो, मेरी कहानी कैसी लगी, मुझे

ज़रूर लिखें।
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