Tum Babhut Annadi Ho

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Author :Unknown Update On: 2015-11-14 12-39-21 Views: 1665

दोस्तो, यह मेरी पहली कहानी है, अगर कहानी में कोई गलती हो तो अपने इस प्यारे दोस्त को माफ़ कर देना। बात उन दिनों की है जब मैंने अपने 10वीं कक्षा mein पेपर दिए थे और मेरा परिणाम आने में बोहत समय था तो मैंने सोचा कि क्यों न

खली समय में कोई नोकरी की जाए। बोहत जगह कोशिश करने के बाद मुझे एक मार्किटिंग कंपनी में जॉब मिल गई। वहाँ पर मेरी मुलाकात मेरी सीनियर अंकिता (बदला हुआ नाम) से हुई, वो एक भरी शारीर की मालकिन थी। उसका नाप शायद 32-26-32

होगा। शुरू से ही मेरी नज़र निशु पर थी, मैं अंकिता से बात करने का कोई मौका नहीं चोरता क्योंकि वो इतनी खूबसूरत थी कि सब उसको चाहते थे मैंने उसके काम में भी हेल्प करना शुरू कर दिया जिससे मुझे अंकिता से बात करने का

टाइम ज़्यादा मौका मिलने लगा और फिर hum दोस्त बन गए । अब हमारी फ़ोन पर ज्यादा बाते होने लगी। एक दिन मैंने अंकिता को परपोज़ कर दिया तो उसने मुझे मना कर दिया, उसके बाद मैं बोहत दिन ऑफिस नहीं गया। अंकिता ने कई बार फ़ोन किये

लेकिन मैंने फ़ोन नहीं उठाया । फिर एक दिन वो मेरे घर आई, मेरी मम्मी ने उसे नाशता कराया और मुझे भी बुलाया। मैं अंकिता को देखकर एकदम से चकित हो गया कि कहीं इसने मम्मी को सब बात बता दी हो। मैंने अंकिता से हाय की और

दूसरी तरफ बीएड पर बैठ गया पर मैं अंकिता से नज़रे नहीं मिला पा रहा था मेरे परपोज़ की वजह से। अंकिता ने खा आप ऑफिस नहीं आ रहे क्या बात हो गई ? मैंने बोला - बस अब दिल नहीं लगता ऑफिस में ! तो अंकिता कलऑफिस में आने का बोल कर

निकल गई। अगले दिन मैं जब ऑफिस पहुँचा तो अंकिता ने मुझे अपने केबिन में आने को मिलने को बुलाया। लेकिन मैं गया ही नहीं केबिन में। उसने फिर दुबारा बुलाया, फिर मैंने काम का बहाना बना कर मना कर दिया। ऑफिस की छुट्टी

होने के बाद अंकिता मेरे पास आई और गरम होकर गुस्से से बोली- तुम मेरे साथ चलो अभी। हम दोनों अंकिता ki स्कूटी पर उसके रूम पर पहुँचे और जाते ही अंकिता ने मेरे गाल पर एक हल्का सा तमाचा रसीद कर दिया और मुझसे खा - तुम बड़े

अनाड़ी हो, तुम्हें ये तो पता होना चाहिए लड़कीया इतनी जल्दी हाँ नहीं करती। मैं शर्म से मुँह निचे जुका क खड़ा था। फिर मैंने अंकिता को सॉरी बोला और वहाँ से जाने लगा। अंकिता ने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया मुझे

अपनी बाहों में भर लिया, अपने होंठ मेरे होंठों से चिपका दिए, एक गहरा लमबा चुम्बन करके बोली- यह रहा तुम्हारा जवाब है मेरी जान ! मेरी तो निकल पड़ी, आखिर अंकिता ने हाँ कर ही दी। मैंने उससे खा - तुमने थप्पड़ क्यों

मारा? अंकिता ने खा - यह तुम्हारी सजा थी मुझे सताने और इग्नोर करने की! मैंने अंकिता को अपनी बाहओ में बंद कर लिया और उसके गुलाबी होंठों पर अपने प्यार की मोहर चिपका दी। लगभग 25 मिनट तक लम्बे चुम्बन से हम दोनों बोहत गरम

हो चुके थे, और पसीने भी आने लगे थे मैं टॉप के ऊपर से ही उसके चूचे दबाने लगा। मैंने उसका टॉप उतार दिया जल्दी से, काली ब्रा में कैद उसके दूध मुझे पागल कर रहे थे, ब्रा के ऊपर ही उसके एक दूध को पीने लगा और दूसरे को दबाने

लगा। गरम होने की वजह से कब हमारे कपड़े हमारे शरीर से अलग हो गए पता नहीं लगा। गोरी जांघों के बीच उसकी क्लीनशेव चूत क्या कमाल थी। उसकी चूत से अजीब सा रस बह रहा था और उसकी चूत की मदहोश कर देने वाली खुशबू गजब की

थी। मैंने उसकी चूत को करीब 10 मिनट तक चाटा । इतने में ही वो दो बार झड़ चुकी थी। अब हमसे बर्दाश्त कर पाना मुश्किल था, मैंने जल्दी से अपना लण्ड उसकी चूत में डाल दिया। 30 मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों शांत हो गये। फिर

हमें जब भी मौका मिलता हम यही खेल खेलते। दोस्तो, यह थी मेरी एकदम सच्ची कहानी। आपको कैसी लगी, अपने प्यारे कमेंट मुझे ईमेल करें। as45825@gmail.com

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