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मजेदार सजा


दोस्तों ये कहानी आप सेक्सवासना डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

मैं सौरभ पटना का रहने वाला हूँ, आप सभी सेक्सवासना डॉट कॉम के पाठकों को लण्डवत प्रणाम करता हूँ। मैं आज आपको जो कहानी पेश करने जा रहा हूँ यह कहानी एकदम सच्ची कहानी है। यह बात उन दिनों की है जब मैं पढ़ता था। मेरा घर

तीन मंजिला है और आसपास के घरों में सबसे ऊँचा है। मैं हर दिन पढ़ने का बहाना करके छत पर चला जाता था और वहाँ जाकर छत से नीचे इधर-उधर देखता था। मेरे घर के आसपास बहुत सारी लड़कियाँ रहती हैं। एक घर में दो बहनें रहती हैं

जिनका नाम सुमन और राजुल है उन दोनों की उम्र करीब क्रमशः 22 और 24 है। दोनों बहनें कसम से क्या मस्त लौंडियाँ हैं, दोनों की शादी नहीं हुई है। मेरा तो उन दोनों को देख कर चोदने का मन करता था लेकिन मुझे राजुल ज्यादा पसंद थी

क्योंकि वो बहुत गालियाँ देती है। उन लोगों का बाथरूम जहाँ वो नहाती हैं, एकदम मेरे घर के पिछवाड़े में नीचे है, मैं हर दिन आराम से उन दोनों के नहाने का इंतज़ार करता था और सबसे ज्यादा राजुल को नहाते देखता था। कसम से !

क्या खूबसूरत बदन है उसका ! फिगर 36-30-36 है। जब वो नहाती है तब उसका गोरा, गदराया बदन देख कर मेरा तो 7 इंच का लण्ड भड़कने लगता है। मैं हर रोज उसे नहाते देख कर मुठ मारता था और गर्म-गर्म वीर्य कागज पर लेकर उस पर नीचे उसके नहाते

समय ऊपर से गिरा देता था। क्या मजा आता था ! मैं जब-जब उसकी गोल-गोल चूचियाँ देखता था, मेरा मन उन चूचियों दबा कर पीने को आतुर हो जाता था। माल ही ऐसा है ! मेरी यह शरारत बहुत दिन तक चली। एक दिन राजुल को लगा कि मैं ऊपर से

देख रहा हूँ तो उसने तुरंत साया अपने सरीर पर अच्छी तरह से लपेट कर पास के किसी कमरे में चली गई। मैं तो डर गया, मेरी तो गाण्ड फटने लगी कि अगर उसने मेरे घर में कह दिया तो मेरे पापा मुझे बहुत मारेंगे। मैं 2-3 दिन के लिए यह

काम छोड़ दिया। फिर भी कहाँ मेरे मन उस गदराये बदन को देखे बिना मान रहा था। मैंने फिर से देखना शुरु कर दिया, फिर से मेरी मस्ती शुरु हो गई। एक दिन मेरा वीर्य निकलने में देर हो गई और उसका नहाना खत्म हो गया और वो कपड़े पहन

रही थी, तभी मेरा निकल गया और मैं उसके ऊपर डालने लगा। फिर क्या ! उसे किसी गर्म पदार्थ का अनभव हुआ और वो ऊपर की तरफ देखने लगी तो उसने मुझे देख लिया, फिर मुझे गालियाँ देने लगी… मादरचोद… जा जाकर अपनी माँ का देख

! बहनचोद…जा जाकर अपनी बहन का बदन देख ! हरामी…! साला..! मेरी तो उस दिन गाण्ड सूख गई, मैं तो पछता रहा था, अगर घर में पता चल गया तो मेरी खैर नहीं है। मैं फिर सच में बहुत दिनों तक छत पर नहीं गया, मुझे बहुत डर हो गया था। एक

दिन मैं अपने घर के पास के बाग में गया जहाँ हमारे कुछ फलों के वृक्ष हैं। वहाँ पास में ही राजुल के परिवार की भी जमीन है लेकिन वहाँ कुछ भी नहीं था सिर्फ पुराने बाथरूम के जो तब कोई प्रयोग नहीं करता था। मैं अपने अमरूद

के पेड़ से अमरूद तोड़ने गया था लेकिन ज्यादा अमरूद नहीं मिले बस दो ही मिले। मैं लेकर जाने वाला था कि तभी पीछे से किसी ने आवाज़ दी- ऐ कितने अमरूद मिले? मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो वहाँ राजुल मुस्कुराती हुई बोली- सौरभ,

मुझे नहीं खिलाओगे? मेरी तो फट गई, मैं घबराते हुए बोला- नहीं, बस दो मिले हैं ! इस पर वो बोली- इधर आ, देखूँ तो ! मैं धीरे धीरे डरते हुए उसके पास गया, उसको दोनों अमरूद दे दिए। वो दोनों ही खा गई। उसके पास खड़े होने से ही

मेरी हालत ख़राब हो रही थी, मैं पूरा ही घबराया हुआ था और ऊपर से उस हॉट राजुल को देख कर मेरा लंड अंगड़ाइयाँ ले रहा था। दोनों अमरूद खाने के बाद वो बोली- बस दो ही मिले? मैं बोला- हाँ ! वो हुक्म सा सुनाती हुई बोली- चल आ

यहाँ मेरे पास ! मेरा लण्ड तो और गर्म हो गया। तब मेरे पास आकर बोली- चल जेब दिखा? मैं बोला- देख लीजिये खुद ही ! कुछ नहीं है ! मेरे इतना बोलने के तुरंत बाद ही उसने मेरी जेब में हाथ डाल दिया। फिर क्या ! राजुल मेरी जेब

में हाथ घुमाने लगी, मेरी जेब अंदर से फटी हुई थी, उसके कोमल हाथ का स्पर्श पाकर मेरा लण्ड अनियंत्रित हो गया। मैंने चड्डी नहीं पहनी थी इसलिए मेरा लण्ड सीधे उसके हाथ में आ गया। अब तो राजुल हंसने लगी, बोली- यह क्या है

सौरभ? मैं धीरे से घबराते हुए बोला- अब और नहीं होगा ! मुझे माफ़ कर दीजिये ! राजुल बोली- तुझसे तो बहुत पुराना हिसाब चुकाना है, तू अंदर आ ! वो बन्द पड़े पुराने बाथरूम में आने को कह रही थी। मैं विनती करते हुए बोला- प्लीज़

मुझे छोड़ दीजिये, मैं दोबारा गलती नहीं करूंगा। राजुल इस बार जोर से बोली- तेरे बाप को बोल दूँ क्या? मैं बोला- नहीं, ऐसा मत कीजये ! नहीं तो पापा मुझे घर से निकाल देंगे। आप जो कहेंगी, मैं करूँगा, लेकिन पापा को मत

बोलियेगा ! राजुल बोली- सब करेगा? तू अंदर आ ! आज दिखाती हूँ तुझे किसी लड़की को नहाते हुए देखने का मजा ! उसने मुझे अंदर बुलाकर नंगा होने को कहा। मैं बोला- प्लीज़ छोड़ दो ! तो वो बोली- ठीक है ! तुम्हारे पापा को बोलती हूँ

! मैं बोला- मत बोलो ! फिर वो बोली- तो जो मैं कहूँ, वो कर ! मैं धीरे-धीरे अपने कपड़े उतारने लगा और नंगा हो गया। मुझे नंगा देख कर वो हंसने लगी। वो मेरे पास आई और मेरे लण्ड पर एक झापड़ मारा। झापड़ इतना जोर से मारा कि मेरा

लण्ड फिर से उतना ही जोर से खड़ा होकर हिनहिनाता हुआ उसके हाथ को छू गया। अब क्या ! राजुल बोली- वाह क्या लण्ड है ! मुझे चोदेगा क्या? राजुल बोली- सब करेगा? तू अंदर आ ! आज दिखाती हूँ तुझे किसी लड़की को नहाते हुए देखने का मजा

! उसने मुझे अंदर बुलाकर नंगा होने को कहा। मैं बोला- प्लीज़ छोड़ दो ! तो वो बोली- ठीक है ! तुम्हारे पापा को बोलती हूँ ! मैं बोला- मत बोलो ! फिर वो बोली- तो जो मैं कहूँ, वो कर ! मैं धीरे-धीरे अपने कपड़े उतारने लगा और नंगा

हो गया। मुझे नंगा देख कर वो हंसने लगी। वो मेरे पास आई और मेरे लण्ड पर एक झापड़ मारा। झापड़ इतना जोर से मारा कि मेरा लण्ड फिर से उतना ही जोर से खड़ा होकर हिनहिनाता हुआ उसके हाथ को छू गया। अब क्या ! राजुल बोली- वाह क्या

लण्ड है ! मुझे चोदेगा क्या? मैं तो अंदर से खुश हो गया पर बोला- नहीं, मुझे छोड़ दो ! इस बार उसने मेरा लण्ड जोर से पकड़ लिया और बोली- नहीं चोदेगा? आज चल, तुझे तेरे बाप के पास इसी हालत में लेकर चलती हूँ ! मैं घबरा गया, बोला-

ठीक है ! ठीक है ! आप जैसा बोलोगी मैं वैसा ही करूँगा। इसके बाद उसने मुझे कहा- चल बहनचोद, मुझे प्यार कर ! मैंने पहले डरते हुए राजुल को बाँहों में भर लिया फिर उससे उठाकर लिटा दिया। जब मैं उसे बाँहों में भर रहा था तो

मेरी छाती से उसकी नुकीली चूचियाँ टकरा रही थी जो मेरे लण्ड को और भड़का रही थी। अब तो मैं अपने को जन्नत के समीप पा रहा था। मैंने देखा कि राजुल ने अपनी आँखें बंद कर ली हैं तो मैंने पहले उसके माथे को चूम लिया, उसके बाद

उसके गालों को चूमने लगा। फिर क्या, राजुल अपने आपे में ना रही और मेरे होठों पर चुम्बनों की झड़ी लगा दी। मेरा जोश तो दुगना हो गया और मैं उसके होंठों को संतरे की फ़ांकों की तरह चूस-चूस कर पीने लगा। मेरा जोश इतना बढ़ गया

कि मैंने उसके कमीज की जिप खोल दी और कमीज को उसके सरीर से आज़ाद कर दिया। अब उसकी काली ब्रा उसकी चूचियों को आधा ढकती नज़र आ रही थी। मैंने उसके पेट पर चुम्बन करते हुए उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया। उसके बाद का दृश्य तो

बेहद मनोरम था। मैं तो इतनी मस्त लौंडिया को अपने सामने नंगी पाकर फ़ूला न समाया। उसने काले रंग की चुन्नट वाली कच्छी पहन रखी थी जो उसकी बुर की सुन्दरता पर बादल की तरह मंडरा रही थी। मैंने उसकी बुर पर चूमना शुरु कर

दिया तो मुझे बुर से पानी निकलता हुआ सा महसूस हुआ। राजुल बोली- मेरे सौरभराजा, आज मेरी बुर को फाड़ कर रख दे ! बहुत सताती है यह बहन की लौड़ी ! मैं यह सुनते ही बोला- राजुल डार्लिंग, आज मैं अपने कुंवांरे लण्ड को तेरी बुर के

लिए कुर्बान कर दूँगा। उसके बाद मैं उसकी गोरी-गोरी बाँहों को चूमने लगा और उसके पीठ पर किस करते हुए उसकी ब्रा का हुक खोल दिया। और उसकी उठती-गिरती चूचियों को गौर से देखने लगा। राजुल की सांसें एकदम गर्म हो चुकी थी, वो

अब चुदने को बेकारार थी। मैं उसकी चूचियों को दबाने लगा, वो जोर से आ आ आ आह्ह हह हहह….. करने लगी। मैं रुका नहीं, एक चूची को दबाने लगा तथा दूसरी को चूसने लगा। वो अब धीरे धीरे आ आह हह हह ह…! उ उ उ ह ह ह .. सी सी ….! करने लगी। सच

बोलूं तो उसके चूची से लग रहा था जैसे कुछ अमृत निकल कर मेरे मुख में आ रहा था और आकर मेरे लण्ड को और भी खड़ा होने के लिए उकसा रहा था। मैंने 10-12 मिनट चूचियाँ को चूसने के बाद पेट को चूमना शुरु कर दिया और फिर धीरे से कब और

नीचे चला गया, पता नहीं चला। मैंने राजुल को उसकी कच्छी से आज़ाद कर दिया। वाह ! मैं राजुल की बुर को इतनी पास से देख कर पागल हो गया ! कसम से पूरी बुर क़यामत ही लग रही थी और बुर के गुलाबी छेद के साथ भूरे रंग का गाण्ड का छेद

तो क्या कयामत था ! मैंने उसकी गाण्ड मारने का भी सोच लिया। मैं उसकी बुर को सहलाने लगा। राजुल पूरी तरह से सिहर उठी और उसके मुख से अचानक ही निकल पड़ा- और चूस ले मेरे सौरभराजा आज इसे, मुझे तृप्ति दे दे ! मैं बुर के पास

उगे हुए बालों को हटाते हुए छेद में उंगली डालने लगा। वो उई … माँ आ अ आ …..! आह य या हह हह हह…… करने लगी। मैं उसकी चूत में उंगली घुसा कर बुर के दाने को चूसने लगा। सच बोलूं तो उसके दाने से अजब सा स्वाद आ रहा था जो मुझे बहुत

अच्छा लगा। जीवन में पहली बार ऐसा स्वाद मैंने लिया था। उसकी चूत से हल्का-हल्का पानी रिसने लगा जो गाढ़ा और चिपचिपा था। फिर मेरी तृष्णा और बढ़ने लगी और मैं राजुल की चूत को चूसने लगा और राजुल जोर से सिहर-सिहर कर

सिसकारियाँ भरने लगी- आह आ आ हह हह हह ह…! ऊ ऊ ओह ह ह ह ह हह ह ह ! माँ आ ई इ इय ई ई य ई य इ ई इ ….! मार दिया आ अ अ अ अ….! खा जाओ….! और चूस ! चूस चूर कर इसका रस निकाल दे….! मैं गाण्ड पर कुछ ज्यादा मर मिटा था…..! मैं राजुल की गाण्ड को भी

चाटने लगा और जीभ को गाण्ड के भूरे छेद में घुसेड़ने का प्रयत्न करने लगा। वो गाण्ड उचका-उचका कर चिल्लाने लगी- अब और देर मत कर ! चोद दे, मैं पागल हो जाऊँगी ! लेकिन मैंने अपना खड़ा लण्ड जो लगातार लार बहा रहा था, उसके मुख

में डाल दिया। वो झट से उसे चूस-चूस कर पीने लगी। मेरा लण्ड उसके मुख को चोदने लगा। फ़िर 5 मिनट चूसने के बाद बोली- मैंने तुझे बुर चोदने के लिए बोला था, मुंह नहीं ! हरामी कहीं के ! चोद मेरी चूत को ! यह सुनते ही मैंने अपना

लण्ड उसकी बुर के मुख पर रखा और रगड़ने लगा। वो अपनी बुर उचकाने लगी। मैंने मौके की नजाकत को देखते हुए एक बहुत ही जोरदार धक्का लगाया और आधा लण्ड उसकी बुर में उतार दिया। वो बिलबिलाने लगी- ….मैया री मैया…. !मार दे रे आज

…..! बड़ी फ़ड़ाफ़ड़ा रही थी….! और जोर से मार…..! मेरा जोश दुगना हो गया और मैंने पूरे जोर से धक्का मारा और पूरा लण्ड उसकी बुर में था। अब वो सिसकार कर बोल रही थी- बड़ा दर्द हो रहा है ! पर तू रुकना मत ! जोर जोर से चोद ! चिथड़े-चिथड़े कर

दे मेरी बुर के…..! ओह्ह हह ह हह……! मैं भी अपने सुपारे में थोड़ी जलन महसूस कर रहा था लेकिन मजा बहुत आ रहा था। मेरा काला 7 इंच लम्बा और 2.5 इंच मोटा लण्ड आज गोरी चूत को चोद रहा था। मैंने धक्के लगाने चालू रखे, राजुल भी मेरा

साथ देने लगी। राजुल की प्यासी चूत को मैं तृप्त कर रहा था, राजुल उचक-उचक कर मेरा साथ दे रही थी और मनमाफिक लण्ड अपनी चूत में पिलवा रही थी। राजुल बोल रही थी- मेरे सौरभराजा आज बजा दे मेरी बुर का बाजा ! लण्ड से मेरी बुर को

खोद दे ! हह हह ह….! ओऊ ओऊ ओ …..ई ई य य या अ अ ….! मैं भी कम नहीं था- यह लो मेरे लौड़े का वार ! आज चोद चोद के तुझे रानी बना दूंगा …! ये ले …..संभाल इसे …राजुल डार्लिंग ….! चोद-चोद के तुझे आज ही माँ बना दूंगा ! राजुल भी और जोर से धका

देने लगी- चोद मेरे राजा चोद ……..फाड़ दे आज मेरी बुर को ! तेरे लण्ड को नहीं छोड़ूंगी…… आज या तो तेरा लण्ड रहेगा या मेरी बुर ………! मैंने इस बार दांत को पीसते हुए बहुत ही घातक प्रहार किया, राजुल बिलबिला गई- माय…! चोद मेरे

रजा ….. मेरा लण्ड उसकी बच्चेदानी को टक्कर मार रहा था, उसे और भी मजा आने लगा और वो बुर को और भी ऊपर उठा कर पूरा लण्ड को हड़पने लगी। 10-15 मिनट बाद वो जोर से बोलने लगी- जोर से चोद मेरे राजा ! मैं झरने वाली हूँ … मैं भी अपने

चरमसीमा पर पहुँच चुका था, मैंने भी जोर से धक्के लगाने शुरु कर दिए और बोला- ये लो मेरी राजुल रानी, आज अपना अमृत, पुरुष शक्ति तेरी बुर देवी को समर्पित करता हूँ ….! राजुल बकती रही- ओह्ह ह्ह्ह ह्ह्ह …..! और जोर से…. और जोर

से मेरे राजा ! फाड़ दे ! फाड़ दे ……आ आ अ आ हह ह हह ….! मैं झड़ी….ओह्ह ह्ह्ह हह ह… आह्ह हह हह ह !!!! वो झर चुकी थी, मैंने भी कुछ धक्कों के बाद अपना लण्ड रस उसकी चूत में उड़ेल दिया।
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