Girlfriend ki friend ne bhujai pyas


Author :Unknown Update On: 2015-11-28 08:55:07 Views: 1731

नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम जय यादव है और मुझे दोस्त लोग प्यार से चुत का सौदागर भी कहता है क्यूंकि लोगों के पास दोस्त इतने नहीं आते की जितनी मेरे पास लड़कियों की चुत आ जाती है | आज मैं आपको अपनी प्रेमिका की सहली की

कहानी सुनाऊंगा की किस तरह मैंने उसकी चुत की खुजली मिटा दी और उसके कारण मैं आज चुत का सौदागर बन गया | मेरी प्रेमिका का नाम वर्षा था और उसकी सहेली का नाम ज्योति था | मेरे और वर्षा के रिश्ते को चल रहे लगभग ३ साल हो चुके

थे पर कुतिया ने आज तक अपने गंदे से होठों के चुम्मे के अलावा कभी आगे ना बढ़ने दिया | मेरे पास लड़कियों की कमी ना होती पर मैं शायद वर्षा से सच्चा प्यार कर बैठा था |उसने मुझे कभी शारीरिक संतुष्टि ना दी पर वो पगली ये बात

नहीं जानती थी तभी आदमी अपने घर से बहार किसी चीज़ को लेने जाता जब उसे वो चीज़ घर में नहीं मिलती | इसी वाक्य के अनुसार अब मेरे साथ भी होने वाला था | कितनी बार तो ना जाने समय के पाबन्दी के साथ वर्षा मुझसे मिलने ना आती पर

ज्योति मेरे पास पहुँच जाती | मैंने कभी ज्योति के बार में गलत नहीं सोचा पर अब शायद सोचने का वक्त आ गया था | मुझे धीरे – धीरे वर्षा से नफरत होने लगी और मैं ज्योति से कुछ ज्यादा ही घुल मिलने लगा | अब जब भी हम एक साथ बैठते

तो वो अपने पॉंव से मेरे पॉंव पर गुदगुदाने लगती और कभी – कभी मेरे हाथ पर अपना हाथ रख लेती |उसी रात अब मैंने अपने लंड को ज्योति के नाम करने का सोच लिया और निति के अनुसार ज्योति अपने साथ शाम को एक पार्क में ले गया जो

हमारे शहर का मशहूर पार्क था और हर समय वहाँ शान्ति रहती है क्यूंकि वो अपने परिमल में काफी बड़ा भी है | मैं और ज्योति एक कोने में बैठकर बात कर रहे थे और मैंने भी रोमांटिक बातों का खुल्ला विषय छेढते हुए अपनी नियत का

पर्दा फाश कर दिया | अब ज्योति मेरे हाथों पर अपन हाथ फेरती हुई मेरे कंधे पर सर रख के बैठी हुई थी और मेरे हाथ उसकी पैंट को उप्पर उसकी जांघ पर घूम – फिर रहे थे | कुछ ही देर बाद अब ज्योति ने अपना चेहरा उप्पर को उठाया और हम

एक दूसरे के होठों के रस चूसने में खो गए |हम लगभग १० मिनट तक एक – दूसरे के होठों को ही चूस रहे थे जोकि हमारी अधूरी प्यास को जाहिर करने के लिए काफी थे | अब मैं वहीँ बड़ी सी झाडी के पीछे ज्योति को ले गया और अँधेरे होने के

कारण अब हमें कोई चाहकर भी नहीं देखा सकता था | मैंने फिर से ज्योति के होठों को चूसते हुए उसके चुचों को दबाने लगा जिससे उसने मुझे कसकर अपनी बाहों में जकड लिया | मैंने अब धीरे – धीरे ज्योति के टॉप को उसके ब्रा के सहित

उतार दिया | उसके वो देसी आम की तरह चुचे मेरे सामने थे जिन्हें मैंने अपनी हाथों की अपरम्पार सेवा से बिलकुल फूला दिया और फिर अपने मुंह में भरते हुए पीने लगा | मैंने चुमते हुए उसकी नाभि तब पहुँच चूका था की अचानक मुझे

उसकी चुत की याद आयो और मैंने उसकी पैंट के बटन खोल दिए |ज्योति काफी शर्मा रही थी पर मैंने उसे अपनी गज़ब की मुस्कान से पता लिया और उसे बिलकुल नंगी कर दिया | उसकी प्यार सी गुलाबी चुत मेरे सामने थी | मैंने अब ज्योति को

वहीँ लिटा दिया और उसकी चुत में उँगलियाँ करने लगा | मेरे काम से काम अपनी ३ उंगलियों को उसकी चुत में बड़ी रफ़्तार से आगे – पीछे कर रहा था की तभी मेरे लंड ने अपनी हाजरी लगा दी | अब मैं उसकी चुत को खोला और उस पर थूक मलते

हुए अपने लंड को टिकाकर ज्योति के के उप्पर चढ गया और बस अपने मस्ते वाले धक्के देने लगा | ज्योति को काफी दर्द तो हो रहा था पर उसे चुदने की चाह उससे ज्यादा थी इसीलिए उसने अपने सारे दर्द को मुझे छुपाते हुए बस मेरे लंड को

अपनी कमर को एक लय में हिलाती हुई लेती चली गयी | कुछ देर बाद अब उसकी दर्द भी छुमंतर हो चूका था मेरी रफ़्तार भी देखने लायक थी |मैं अब ज्योति के उप्पर चढकर पागलों की तरह अपने लंड को घुसाते हुए उसके उप्पर कूद रहा था और वो

जोश में अपने सर को इधर – उधर पटक रही थी | अचानक से मैंने एक झटके अपने लंड को निकाला और पूरी पिचकारी ज्योति के बदन पर छोड़ दी | उस दिन के बाद से अब ज्योति की और इतना आकर्षित हुआ की मैंने उसके लिए वर्षा को छोड़ दिया पर जब

अब चुत का शौक लग ही गया था और उसकी दोस्तों से लेकर दोस्तों की दोस्तों तक हर लड़की को दबाकर चोदा और पड़ गया मेरा नाम चुत का सौदागर |

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