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मेरी गाण्ड का उद्घाटन


दोस्तों ये कहानी आप सेक्सवासना डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

अन्तर्वासना पर मैंने कई कहानियाँ पढ़ी हैं। इसमें बहुत सारी कहानियाँ मुझे काफ़ी पसंद भी आई हैं। आज मैं पहली बार अपने जीवन में समलैंगिक अथवा ‘गे’ बनने के बारे में लिख रहा हूँ, उम्मीद करता हूँ कि आप सबको पसंद

आएगी। गोपनीयता बनाए रखने के लिए कुछ स्थान और व्यक्तियों के नाम बदल दिए गए हैं। मेरी हर कहानी मेरे जीवन में घटी सत्य घटनाओं पर आधारित रहती है। तो पहले मैं आपको अपने बारे में कुछ बता दूँ। मेरा नाम अरमान है.. मैं

अभी 18 साल का ही हूँ.. 12 वीं कक्षा में पढ़ता हूँ। मुझे अपने बचपन में शुरुआत से ही हॉस्टल भेज दिया गया था। तो अब मेरे पहले अनुभव पर आते हैं.. एक दिन रात का समय था। मैं अपने बिस्तर पर सोने की तैयारी कर रहा था। उन दिनों हम

एक कमरे में 16 लड़के हुआ करते थे। मेरे बिस्तर के बगल वाला लड़का रजत मेरा अच्छा दोस्त था। चूंकि हमारा ब्वॉय्ज हॉस्टल था.. तो हम लोग आपस में अपने बिस्तर वगैरह शेयर कर लिया करते थे। रजत का एक दोस्त था अजय वो अक्सर मेरे

बेड पर आकर लेट जाया करता था और रजत से बात करता था। अजय हमसे 3-4 साल बड़ा था। वो बास्केटबॉल खेलता था.. इसलिए जिस्मानी रूप से काफी लंबा-चौड़ा भी हो गया था। उस दिन वो दोनों बात करते रहे.. मेरी नींद जल्दी ही लग गई। अनायास

मेरी नींद रात के करीब 2 बजे खुली.. तो मैंने पाया कि अजय मेरा लण्ड और छाती को सहला रहा है.. और मुझे अच्छा भी लग रहा था.. इसलिए मैंने सोए हुए रहने का नाटक किया। कंबल के अन्दर अजय का काम चालू था, वो मेरे शरीर को मस्ती से

सहला रहा था, धीरे-धीरे वो मेरी छाती को भी सहला और दबा रहा था। सच कहता हूँ दोस्तों मुझे तो मज़े ही आ गए। फ़िर उसने मेरे चूचे चूसना चालू किए.. बहुत मज़े आ रहे थे.. फिर शायद उसे अहसास हो गया कि मैं जाग रहा हूँ, उसने मुझे

धीरे-धीरे अपने लंड की तरफ धकेला, वो अपना लंड मेरे मुँह में देना चाहता था.. पर मैं उसका लण्ड अपने मुँह में लेने को तैयार नहीं था। फिर उसने मुझे उठाया और कहा- बाथरूम में चल। हम दोनों चले गए.. वहाँ उसने मुझसे कहा- जो कुछ

मैं कर रहा हूँ.. करने दे वरना बहुत पिटेगा। मैंने कहा- भैया मैं मुँह में नहीं लूँगा प्लीज़.. यह गंदा होगा.. उसने कहा- चाट इसे.. अब तू जब तक इस हॉस्टल में है.. तुझे इस लंड को खुश रखना पड़ेगा.. वरना सबको बता दूँगा कि तू

गान्डू है.. साले.. यह सब सुनकर मैं डर गया, मैंने कहा- ठीक है.. कर लो भैया.. उसने मुझसे कहा- घुटनों के बल बैठ जा। मैं बैठ गया.. उसने अपना लंड निकाल कर मेरे सामने रख दिया। मैं डर गया.. क्योंकि उसका लवड़ा काफ़ी बड़ा था। मेरा

तो उस समय तक बहुत छोटा सा था। फिर उसने कहा- चूस इसे.. मैंने धीरे से उसके लंड को मुँह में लिया.. पहले तो उल्टी जैसी इच्छा हुई.. पर थोड़ी देर बाद मज़े आने लगे। फिर वो बोला- चल बे रंडवे.. अपनी गाण्ड तो दिखा.. मैंने लोवर

उतारा और नंगा हो गया। उसने मुझे कुत्ते जैसा झुकाया और मेरी गाण्ड में थूक लगाकर उंगली डालने लगा। मुझे बहुत दर्द हुआ.. मेरी हल्की सी चीख भी निकल गई। उसी समय रजत भी बाथरूम में आ गया था, शायद उसने मेरी चीख सुन ली

थी। उसने मेरा नाम पुकारा और अजय को भी आवाज दी। शायद वो जानता था कि अजय को गाण्ड मारना पसंद है। अजय ने कहा- हाँ रजत.. 3 नंबर बाथरूम में आ जा.. वो आ गया.. मुझे वहाँ देखकर रजत ने कहा- क्या अजय भाई.. अकेले ही मज़े लूट रहे

हो.. तो अजय बोला- अच्छा हुआ तुम आ गए.. ये रंडी तो चीख रही थी। अब अपना लंड इसके मुँह में डाल दो.. ताकि मैं इसकी गाण्ड मार लूँ। वो बोला- ठीक है भाई.. मेरे पास उनसे चुदने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। रजत ने अपना लंड निकाला

और मेरे मुँह में दे दिया, उसका मेरे लंड से थोड़ा ही बड़ा था.. क्योंकि वो मुझसे एक साल ही बड़ा था पर हम दोनों एक ही क्लास में थे। अब मैं उसका लंड चूस रहा था और पीछे से अजय मेरी गाण्ड खोल रहा था। यह कहानी आप अन्तर्वासना

डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं ! थोड़ी देर चाटने और उंगली करने के बाद उसने मेरी गाण्ड में अपना लंड डाला। मुझे बहुत दर्द हुआ.. मैं छटपटाने लगा.. पर उन दोनों ने मुझे छोड़ा नहीं। फिर अजय मेरी गाण्ड मचकाने लगा। थोड़ी देर बाद उसने

अपना लंड मेरी गाण्ड से निकाला और मुझसे कहा- अब इसे चूस भोसड़ी के.. इसमें से अमृत निकलेगा। मुझे कुछ समझ नहीं आया… क्योंकि मैं उनकी रंडी थी.. मुझे चूसना पड़ा.. थोड़ी देर बाद एक गाढ़ा नमकीन वीर्य मेरे मुँह में आने

लगा.. हालांकि मुझे बड़ा ही गंदा लगा… पर अजय ने कहा- इसे पूरा पीना पड़ेगा और सिर्फ़ आज ही नहीं.. अब जब भी मैं कहूँगा.. तो मेरा लण्ड चूस कर मेरा पानी पीना पड़ेगा। मैं बेचारा मजबूरी में पूरा पी गया.. पर मुझे ये बहुत

मजेदार भी लगा। वो तो अच्छा हुआ रजत का उस समय निकलता नहीं था.. वरना उसका भी पीना पड़ता। उन दोनों ने फिर अपने लंड धोए.. मुझे मुँह धोने के लिए कहा.. मेरी गाण्ड पोंछी और कहा- चल आ जा.. अब सोते हैं.. उस दिन मुझे समझ नहीं आया

मेरे साथ क्या हो गया.. पर मुझे नींद नहीं आई! थोड़ी देर बाद मैंने महसूस किया कि मुझे अच्छा लगा था, अजय मेरे साथ ही सो रहा था, मैंने उसके होंठों पर किस किया.. तो वो मुस्कुराया। मैंने उसके लंड पर हाथ रखा और आराम से सो

गया। दोस्तो, बताईएगा ज़रूर कि मेरी यह कहानी आपको कैसी लगी। raarmaan27@gmail.com
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