खेल चूत चूत का 2


Author :Unknown Update On: 2016-01-14 10:03:45 Views: 3769

लेखिका – कशिश अनुवाद तथा संपादन – मस्त कामिनी मुझे सॉफ सॉफ पता चल गया की उसने अपने टॉप के नीचे ब्रा नहीं पहनी है। उसकी चुचियाँ आकार मे छोटी, गोल गोल थी और उसकी निप्पल्स तनी हुई सी लग रही थी। उसके टॉप के महीन

कपड़े से अंदर का नज़ारा दिख रहा था। कॉफी पीते पीते, मैंने उस से पूछा की क्या वो कॉफी के साथ कुछ खाना पसंद करेगी… तो वो बोली – नहीं… सिर्फ़. कॉफी ही बहुत है… मैंने दोपहर का खाना, ऑफीस मे ज़रा देर से खाया था… और इसी

तरह, हम इधर उधर की बातें करते रहे। जब मेरे फोन की घंटी बजी तो मैं समझ गई की ये ज़रूर मेरे पति का फोन होगा। और सचमुच, ये उनका ही फोन था। मेरे फोन उठाते ही, उन्होंने फोन पर ही मुझे चुंबन दिया और मुझ से माफी माँगी की वो

आज मेरे साथ बाहर नहीं जा सकते क्यों की उनके ऑफीस मे अचानक ही एक विदेशी क्लाइंट आ गया है और उस के साथ मीटिंग मे काफ़ी समय जाएगा। मस्त कहानियाँ हैं, सेक्सवासना डॉट कॉम पर !!! !! उन्होंने मुझे कहा की वो अगले दिन मेरे

साथ बाहर ज़रूर जाएँगे। मुझे थोड़ी सी निराशा हुई पर मैंने उनसे कहा की कोई बात नहीं और मैंने भी फोन पर उनको वापस चुंबन दिया और फोन रख दिया। मैं जब वापस सोफे पर बैठी तो मैंने देखा की छाया थोड़ी खुश नज़र आ रही

है। उसने मुझ से कहा की उसने मुझे अपने पति से बात करते सुना है और अब जब की हमारा बाहर जाने का प्रोग्राम रद्द हो गया है तो उसको लगता है की उसने मेरे घर आकर मुझे परेशान नहीं किया है। मस्त कहानियाँ हैं, सेक्सवासना

डॉट कॉम पर !!! !! मैंने उस से कहा की मेरे पति को अब ऑफीस से आने मे काफ़ी वक़्त लगेगा और वो आराम से मेरे घर मे बैठ कर, मनप्रीत का इंतज़ार कर सकती है। क्यों की मैंने अपने गाउन के नीचे ब्रा और चड्डी नहीं पहन रखी थी, इस लिए

मैं कपड़े पहन ने के लिए अलमरी की तरफ बढ़ी तो छाया ने मुझे रोक लिया। उस ने कहा की मैं ऐसे ही बहुत अच्छी लग रही हूँ और वो मुझे ऐसे ही देखना चाहती है। उसने मुझे कहा की हम दोनों ही लड़कियाँ हैं और इस तरह उसके सामने

बैठने मे मुझे कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। मैंने भी उसकी बात मान ली। उस ने मुझ से कहा की मेरे पति बहुत ही भाग्यशाली हैं, जो उनको मेरे जैसी खूबसूरत, सेक्सी और सेक्सी बदन वाली पत्नी मिली है। वाउ… … जब वो एक बार

झुकी तो मैंने उसकी हिलती हुई चूचीयों को, उसकी तीखी निप्पल्स को सॉफ सॉफ देखा। बहुत ही, शानदार नज़ारा था। उस की चूचीयों की दो गोल गोल पहाड़ियों और गहरी घाटी ने मेरा रक्त चाप बढ़ा दिया था। मेरे हाथ मे अब पूरा समय

था और मैं इस मौके का पूरा पूरा फायदा उठना चाहती थी। मैंने जैसे ही छाया के साथ लेज़्बीयन खेल खेलने का विचार बनाया, मैं तो गरम होने लगी। मैंने जान बूझ कर, अपने हाथ मे पकड़ी रुमाल छाया के सामने गिराई और उसे उठाने को

फर्श पर झुकी, तो मैंने उसकी फैली हुई सेक्सी टाँगों के बीच देखा। मेरी आँखें खुली की खुली रह गई जब मैंने सॉफ सॉफ उसकी चूत को देखा। वो ब्रा तो नहीं पहनी हुई थी ये तो पहले ही पता चल चुका था और अब पता चला की उसने चड्डी

भी नहीं पहनी है। मुझे उसके पैरों के बीच से झाँकति चूत बहुत मस्त लगी। मैं जानती थी की वो यहाँ मनप्रीत के साथ लेज़्बीयन खेल, “चूत चूत का खेल” खेलने आई है और शायद इसी लिए इसके लिए पूरी तरह, तैयार हो कर आई है। इसीलिए,

उसने ब्रा और चड्डी नहीं पहन रखी है। कुछ दिन पहले, जब मैंने मनप्रीत और छाया को आपस मे चूत चूत खेलते देखा था तो मैंने बड़ी मुश्किल से अपने आप को उनके खेल मे शामिल होने से रोका था। मेरी किस्मत कितनी अच्छी है की आज वो

खुद मेरे घर चल कर आई है मेरे पास उसके साथ चूत चूत खेलने का पूरा मौका था। मैं जानती थी की छाया को ये पता नहीं था की मैं उस का राज़, उसके मनप्रीत के साथ लेज़्बीयन संबंध होने की बात जानती हूँ। मैंने वो राज़ छाया के

सामने खोलने का निश्चय किया ताकि उसको अपनी लेज़्बीयन पार्ट्नर बनाने मे आसानी हो। मुझे भी चूत चूत का प्यार किए, काफ़ी दिन हो गये थे। मैं जब जालंधर मे थी, तब मैंने अपनी बचपन की सहेली अंजलि के साथ और मेरे पति की

पुरानी प्रेमिका गंगा के साथ लेज़्बीयन चुदाई की थी। वो सारी यादें, मेरे दिमाग़ मे ताज़ा हो गई। मैं एक बार फिर, लेज़्बीयन चुदाई का मज़ा छाया जैसी प्यारी और सेक्सी लड़की के साथ लेना चाहती थी। मैंने उसको बताया की

मैंने उसको और मनप्रीत को कुछ दिन पहले, मनप्रीत के घर मे लेज़्बीयन चुदाई करते हुए देखा है… जब मनप्रीत के घर का दरवाजा शायद ग़लती से खुला रह गया था… मैंने जैसे उसके सामने “बम” फोड़ दिया। सफर जारी है… … अपने

सुझाव और राय भेजना बंद मत कीजियेगा। धन्यवाद लव यु आल सेक्सी कशिश

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