लण्ड बेदर्द, चूत में दर्द 1


Author :रश्मि Update On: 2016-01-17 Views: 2267

दोस्तो, पहली दो कहानियों के इतने अच्छे रिस्पांस के लिए धन्यवाद.. .. आज मैं आप लोगों को एक अंतिम कहानी सुनने जा रही हूँ क्यूंकि मेरे पति ने हमारी “प्राइवेट लाइफ” के बारे में सबको बताने से मना कर दिया है और मैं

उन्हें नाराज़ नहीं कर सकती.. खैर, मैंने उनसे यह लास्ट स्टोरी लिखने की पर्मिशन ले ली है, लेकिन मैं माफी चाहती हूँ क्यूंकि इसके बाद मैं और स्टोरी नहीं लिख सकूँगी। बस, आप सभी औरतों (पत्नियों) से मेरी एक ही विनती है की

प्लीज़ अपनी ज़िंदगी मे सेक्स को अहमियत दीजिए और मेरी लिखी हुई बातों पर गौर करके कृपया अपने पति को खुश रखिए और उनकी आत्मा में बसने की कोशिश कीजिए, क्यूंकि अगर आप अपने इस शरीर का पूरा सुख अपने पति को नहीं दे सकती है

तो क्या फ्यदा ऐसे शरीर का। खैर, मर्ज़ी आपकी है, अब मैं अपनी स्टोरी पर आती हूँ… … मेरे पति का जन्मदिन इतना शानदार मानने के बाद, मैं और मेरे पति बहुत खुश रहने लगे थे और रोजाना ही चुदाई किया करते थे.. वो भी कम से कम दो

बार, यहाँ तक की मेरे महीने के दिनों में भी, मैं उनके लण्ड का रस ज़रूर पीती थी.. .. वैसे भी, मैं उन औरतो में से नहीं हूँ, जो महीने के दिनों में एकदम बीमार सी बेड पर पड़ी रहती हैं। मैं तो महीने के दिनों में भी अपने आप को

ठीक से रखती हूँ, ताकि मेरा बेकार सा और उदास चेहरा देखकर, वो मायूस ना हो। खैर, 3 नवंबर आने वाला था, जो की हमारी “पहली सालगिरह” का दिन था और हाँ मेरा “जन्मदिन” भी, 3 नवंबर को ही है.. इसे बस एक संजोग ही समझ लीजिए। मेरे

पति और मैं अपनी शादी की पहली सालगिरह के लिए काफ़ी उत्साहित थे… हमने इस बार सालगिरह पर शिमला जाने का प्रोग्राम बनाया, क्यूंकि शिमला हमारे घर से काफ़ी दूर है। मेरे पति ने फ्लाइट से जाने को कहा, लेकिन मैं ट्रैन से

जाना चाहती थी, तो हमने ट्रैन मे एसी फर्स्ट क्लास का टिकेट बुक किया और तैयारी शुरू कर दी.. हमारी 30 अक्टूबर की ट्रैन की टिकेट थी। हम ठीक समय पर ट्रैन में बैठ गये। आपको मैं एक बात बता दूँ की ट्रैन के एसी फर्स्ट क्लास

का डब्बा एक केबिन की तरह होता है, जिसमे सिर्फ़ दो ही सीट होती हैं और शीशा इस तरह का होता है की हम बाहर का सब कुछ देख सकते हैं, लेकिन कोई हमें नहीं देख सकता। अपनी सीट पर आकर, हमने अपने केबिन को बंद कर लिया और हम दोनों

पूरे “नंगे” होकर, आराम से बैठ गये.. .. अब शुरू होने वाली थी, हमारी चलती ट्रैन में बाहर का सारा नज़ारा देखते हुए “जबरदस्त चुदाई” वो भी पूरे 36 घंटे तक। मेरे पति ने मेरे पूरे “सेक्सी बदन” को चूमना शुरू कर दिया.. आने से

पहले, मैंने पूरे जिस्म की वैक्स कराई थी। वो मेरे सिर से लेकर पैर तक बेतहाशा चूमते और अपनी जीभ से पूरे बदन को चाटते जा रहे थे। मेरा पूरा “चिकना बदन” उन्होंने जीभ से चाट चाट कर एकदम गीला कर दिया। अब मेरे पूरे बदन

में एक करेंट सा दौड़ने लगा और मैं जैसे “सेक्स की आग” में पागल सी होने लगी और चिल्लाने लगी – जान, मुझे जल्दी से चोदो, नहीं तो मैं मर जाउंगी। तभी उन्होंने डेरी मिल्क का एक बड़ा पैकेट खोल लिया और मेरी चूत और जाँघो में

पूरा भर दिया और पागलों की तरह चूसने और चाटने लगे.. मुझे ऐसा लगने लगा की अगर अब मुझे तुरंत ही चोदा ना गया तो मैं मर जाउंगी। मैं बुरी तरह से छटपटा रही थी और वो मज़ा ले रहे थे। तभी जैसे मेरा बदन पूरा अकड़ने लगा और

मेरे अंदर से एक ज्वालामुखी सा फट पड़ा.. मेरी चूत से जैसे मेरे कामरस का तूफान फट पड़ा और चूत रस की नदी बहने लगी, जिसे वो पीते जा रहे थे, और मैं तो एकदम निढाल सी हो गई.. मेरे पूरे शरीर ने काम करना बंद कर दिया, लगा की मैं

बेहोश हो जाउंगी.. शायद ज़िंदगी मे पहली बार किसी ने इतनी बुरी तरह से मेरे बदन और मेरी चूत को चाटा था। मेरी आँखें बंद होने लगी। मुझे कब होश आया, पता नहीं.. लेकिन, जब होश आया तो मैंने देखा की मेरे दोनों हाथ और पैर कस

के बँधे हुए थे और मेरे पति.. .. .. कहानी जारी रहेगी… … उम्मीद करती हूँ आपको सेक्सवासना पर स्टोरी पसंद आ रही होगी। अपने फीड बैक, आप कामिनी जी को भेज सकते हैं!! आपकी सहेली – रश्मि

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