लण्ड बेदर्द, चूत में दर्द 2


Author :रश्मि Update On: 2016-01-18 Views: 2385

कहानी जारी रहेगी… … मेरे पूरे शरीर ने काम करना बंद कर दिया, लगा की मैं बेहोश हो जाउंगी.. शायद ज़िंदगी मे पहली बार किसी ने इतनी बुरी तरह से मेरे बदन और मेरी चूत को चाटा था। मेरी आँखें बंद होने लगी। मुझे कब होश

आया, पता नहीं.. मस्त कहानियाँ हैं, सेक्सवासना डॉट कॉम पर !!! !! लेकिन, जब होश आया तो मैंने देखा की मेरे दोनों हाथ और पैर कस के बँधे हुए थे और मेरे पति फिर से अमूल बटर लगा कर मेरी चूत चाट रहे थे। ना जाने मुझे क्या हुआ,

मैं यह देखकर रोने लगी और उनसे कहा – मेरी चूत को और मत चाटो, प्लीज़.. अब मुझे छोड़ दो, नहीं तो मैं मर जाउंगी.. अब मुझसे यह “चूत की आग” सहन नहीं हो रही है.. .. मैं उनसे चुदाई की जैसे भीख ही माँगने लगी, लेकिन वो बोले – मुझे आज

दिन और रात तुम्हारी चूत का रस पीना है.. .. और फिर से “चूत चुसाई” का बटर लगाकर, वही दौर चला और मैं फिर से बहुत बुरी तरह से झड़ गई.. मुझे ऐसा लग रहा था, जैसे मेरे बदन में जान ही ना बची हो.. बहुत ज़्यादा कमज़ोरी महसूस हो रही

थी.. .. यह देखकर, उन्होंने मुझे खोल दिया.. मैं तुरंत टाय्लेट गई और अपने आप को थोड़ा ठीक किया और वापस आकर उन पर टूट पड़ी.. मैं उनके ऊपर चड गई और एक ही झटके में पूरा लण्ड अपनी चूत में घुसा लिया और पागलों की तरह उन्हें

चोदने लगी.. मेरे बदन में जैसे “आग” लग गई थी.. मैं अपने होश खो चुकी थी.. मैंने अपने सारे नाख़ून कस के उनकी छाती और पीठ में घुसा दिए और अपने दाँत उनके कंधों पर गड़ा दिए.. वो दर्द से बिलबिला उठे, उनकी छाती, पीठ और कंधे से

खून निकलने लगा.. तब मुझे अपनी ग़लती का एहसास हुआ और उसी वक़्त उनके लण्ड ने मेरी चूत में पिचकारी छोड़ दी.. मुझे ऐसा लगा, जैसे मेरी “जन्मों की प्यास” मिट गई हो। मैं उनसे अलग हुई और उनसे माफी माँगने लगी, तो वो बोले –

जान, मैं तुम्हें कितनी बार बोल चुका हूँ की मुझे सेक्स के दौरान दर्द सहने और दर्द देने में ही मज़ा आता है.. फिर वो बोले – आज, जब तुमने नाख़ून गड़ाए और दांतो से कटा तो मुझे इतना मज़ा आया की तुम कल्पना भी नहीं कर

सकती.. खैर, देल्ही पहुँचने तक हमने ट्रैन में दो बार और चुदाई की, वो भी अलग अलग स्टाइल में और काफ़ी मस्ती की और पूरे नंगे ही रहे। मैं आप लोगों को एक और बात बताना चाहती हूँ की सेक्स के दौरान ज़्यादातर औरत पीठ के बल

लेट जाती हैं और उनके पति भी इसी स्टाइल में उन्हें चोद्ते हैं.. “घरेलू औरत” ज़्यादातर इसी स्टाइल में चुदवाना पसंद करती हैं, लेकिन मर्द को यह स्टाइल पसंद नहीं होती है.. बेचारे कुछ बोल नहीं पाते हैं, जबकि सच पूछो तो

यह चुदवाने की सबसे “गंदी स्टाइल” है.. मुझे और मेरे पति को तो इस स्टाइल से नफ़रत है क्यूंकि इसमे सिर्फ़ औरत को मज़ा आता है, मर्द को कभी नहीं.. अगर आप भी सेक्स का पूरा मज़ा लेना चाहती हैं तो इस स्टाइल मे चुदवाना बंद

कर दीजिए और हर बार एक नई स्टाइल सोचिए, बनाइए और उसी में चुद्वाइये.. कोई पति कहे या ना कहे, एक जैसी स्टाइल से चुद्ने पर वो आप से बोर हो जाते हैं… सोचिए, अगर हर बार सिर्फ़ आपके पति को ही मज़ा आए और आपको नहीं तो आपको

कैसा लगेगा.. ?? ठीक वैसा ही, आपके पति को महसूस होता है.. आपका जिस्म आपके पति के लिए है, अपने जिस्म को अपने पति को भरपूर तरीके से दिखाइए.. .. आप लोगों ने पहले भी सुना होगा पर मैं फिर भी बता दूँ, ऐसा माना जाता है की जो औरत

अपने पति को जिस्म का सुख नहीं दे पाती, वो अगले जनम में “किन्नर के रूप में” जनम लेती है.. .. खैर, ये सब सुनी सुनाई बातें हैं पर ये तो सच है की औरत होने का क्या फायदा, अगर जिसके लिए आपका जिस्म बना है, वही उसे ना भोग

पाए.. मेरी बात पर गौर कीजिए और आप एक बार ऐसा करके देखिए, आपको ज़्यादा मज़ा आएगा.. नई नई स्टाइल की जानकारी के लिए “ब्लू फिल्म” देखिए.. बड़ी आसानी से, इंटरनेट पर मिल जाती हैं.. वैसे भी ब्लू फिल्म में चुदाई कौन देखता

है.. वो तो सिर्फ़ नई नई पोज़ और स्टाइल की जानकारी लेने के लिए होती है.. .. चलिए वापस आते हैं कहानी पर… फिर हमने कपड़े पहने और स्टेशन से बाहर आ गये.. शाम को 6 बजे हमारी ए सी बस (वोल्वो) में एक स्लीपर बुक था। मेरे पति,

काफ़ी समझदार हैं!!! उन्होंने इस ट्रिप को यादगार बनाने के लिए सारा इंतेजाम काफ़ी बढ़िया किया था। हम बस में चढ़कर अपने स्लीपर केबिन में चले गये.. केबिन बहुत छोटा था। हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर ही इसमे सो सकते

थे.. खैर, सोना किसे था.. .. कहानी जारी रहेगी… … उम्मीद करती हूँ आपको सेक्सवासना पर सेक्स स्टोरी पसंद आ रही होगी। अपने फीड बैक, आप कामिनी जी को भेज सकते हैं!! आपकी सहेली – रश्मि

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