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माँ चुदी मामा जी से ट्रैन में मेरे सामने


दोस्तों ये कहानी आप सेक्सवासना डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

हेलो दोस्तों, मेरा नाम रौशनी है मैं आपको अपने परिवार का ही एक सच्ची कहानी बताने जा रही हु, ये चुदाई की कहानी मेरी माँ और मेरे मां जी के बारे में है, मैंने कई सारे ऐसी कहानिया सेक्सवासना डॉट कॉम पे पढ़ी है, तभी मुझे

लगा की मैं भी आज अपने घर की चुदाई की कहानी आप लोगो के साथ शेयर करूंग आशा करती हु की आपको अच्छा लगेगा, मैं अपने नानी के घर गई थी क्यों की नानी का तबियत खराब था, नानी का घर कोलकाता में है मैं मम्मी और पापा तीनो दिल्ली

में रहते है, मां जी मुझे और मम्मी को कोलकाता छोड़ आये और वापस दिल्ली आ गए हम दोनों वही रह गए और फिर पन्दरह दिन के बाद पापा का फ़ोन आने लगा, तब तक नानी जी भी अच्छी हो गई थी, फिर माँ ने सोचा की हम दोनों ही दिल्ली चल पड़ेंगे

पर नानी जी ने मना कर दिया, की नहीं अकेले नहीं जाना है जवान बेटी साथ है आज कल जवना बहुत खराब है, नविन तुम दोनों को छोड़ आएगा, नविन मेरे मामा जी है जो की चौतीस साल के है नविन मामा जी से मेरी माँ करीब चार साल बड़ी है, दोनों

बहुत ही अच्छे तरीके से रहते है मैंने देखा है की मेरी माँ नविन मामा से कुछ भी नहीं छुपाते है दोनों एक दूसरे से काफी शेयरिंग और केयरिंग करते है, मैं उन दोनों को जब इतने खुले विचार और रहन सहन देखती तो लगता था की बताओ

दोनों भाई बहन में कितना प्यार है, काश ऐसा ही रिश्ता भाई बहन के साथ होना चाहिए, मुझे बहुत अच्छा लगता था जब दोनों आपस में दिल खोल कर हँसते थे, मामा जी राजधानी एक्सप्रेस में सेकंड ए सी का टिकट ले आये थे, फिर हम दिनों

दिल्ली जाने की तैयारी करने लगे, फिर फ्राइडे को डेल्ही के रवाना हो गए, हमारे रो में चार सीट था, जिसमे एक सीट खाली ही था, मामा जी और मम्मी दोनों बात चित कर रहे थे, मैंने एक चीज नोटिस किया की मामा जी की केहुनी मम्मी के

चूच पे लग रहा था और मम्मी मामा जी को बड़ी ही कातिल निगाहों से देखती, मुझे तो लग रहा था की ऐसा गलती से हो गया था पर ऐसा करीब पांच से छह बार हुआ तो मैं समझ गई की जाऊर दाल में कुछ काला है, ऐसा तो नहीं हो सकता और जब मामा जी

मम्मी के चूचियों को अपने केहुनी से छूते तो मम्मी का एक्सप्रेशन बड़ा ही कातिल होता था, खाना खाके हम लोग सब अपने अपने बर्थ पे चले गए, मुझे नींद नहीं आ रही थी और ट्रैन सरपट दौड़ रही थी, पूरा बॉगी सो गया था तभी मैंने सूना

मामा जी मम्मी को ऊपर से कह रहे थे, दीदी मैं निचे आ जाऊं, रोशन्नी सो गई क्या, तभी मम्मी बोली धीरे बोलो पता करती हु रौशनी सोई की नहीं, तभी मम्मी बोली रौशनी रौशनी सो गई क्या तुमने मेरे पर्श देखा, मैं चुप रही, मैं समझ गई

की मम्मी सिर्फ ये पता कर रही है की मैं सोई की नहीं, मैंने कुछ भी नहीं कहा, तो मम्मी निचे से बोली हां आ जाओ रौशनी सो गई है, तभी मामा जी निचे आ गए और मम्मी और मामा जी एक दूसरे के गले लग के चिपक गए, मामा जी मम्मी को किश कर

रहे थे और ब्लाउज के ऊपर से ही मम्मी की चुचियो को मसल रहे थे, मम्मी बोल रही थी धीरे धीरे करो, पूरी रात है मजे करने को, ओह्ह्ह्ह्ह्ह इतना जोर से होठ को दांत से मत काटो, ध्यान रखना गाल पे दांत का निशान आ जायेगा,

उफ्फ्फ्फ्फ़ धीरे धीरे पर मामा जी तो मम्मी पे टूट पड़े थे, फिर क्या था मैंने देखा मम्मी लेट गई और मामा जी मम्मी के ब्लाउज का हुक खोल दिए और फिर पीछे से ब्रा का भी हुक, हलकी हल्की लाइट आती थी खिड़की के बाहर से जब कोई छोटा

मोटा स्टेशन आता, मैंने देखा मामा जी मम्मी के दोनों चूची को पकड़ के पि रहे थे और दबाये जा रहे थे, मम्मी आअह आआह आआह आआअह आआह कर रही थी, उसके बाद मम्मी का पेटीकोट ऊपर कर दिए और मम्मी का जाँघिया खोल दिया और मामा जी माँ के

बूर के पास जाके चाटने लगे, माँ सिर्फ उफ्फ्फ्फ़ उफ्फ्फ्फ्फ़ उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ आआअह कर रही थी, मेरी माँ मामा जी के बाल पकड़ कर अपने बूर में सटा रहे थे, माँ पागल सी करने लगी, कह रही थी जोर से चाटो खूब चाटो देखो तेरे लिए मैं

अपने बूर से नमकीन पानी छोड़ी हु, चाट आज खूब चाट मेरे राजा ओह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह्ह जीभ घुसा में मेरे बूर में, फिर मामा जी ने मम्मी के दोनों पैर को अपने कंधे पर रखा और अपना लंड निकाल के माँ के बूर में डाल दिया मा आआअह आआअह

करने लगी, फिर तो क्या बताऊँ सेक्सवासना के दोस्तों मेरी चूत खुद ही गीली हो गई थी मैं तो अपने चूत में ऊँगली डालने लगी, माँ की वो अदाएं देख कर मैं हैरान हो गई थी, वो गांड उठा उठा के चुदवा रही थी और मामा जी जोर जोर धक्के

पे धक्का दे रहे थे, खूब चोदा उन्होंने आखिरकार दोनों एक साथ झड़ गए, और शांत हो गए, तभी मामा जी बोले दीदी आज तुमने नहीं हराया आज मैंने तुम्हे हराया, कल तो तुम बड़े कह रही थी की तुम चोद नहीं पाते हो, तुम पहले ही झड़ जाते

हो, मुझे लगा की ये क्या ये दोनों तो बहुत पहले से चुदाई कर रहे है, मुझे तो ऐसा लगा था की पापा से ज्यादा इन्हे मामा जी ही चोदे है, फिर मुझे लगा की कही मैं मामा जी की ही बेटी तो नहीं फिर लगा नहीं नहीं मैं नहीं हो सकती इनकी

बेटी, फिर मैं अपनी छोटी छोटी चूचियों को दबाने लगे क्यों की मैं एक घंटे से चुदाई देखकर मुझे भी चुदने का मन करने लगा था, पर मैंने सोचा की दिल्ली में मामा जी से जरूर चुदुंगी, रात में करीब ३ बार मामा जी ने मम्मी को चोदा

था, आपको मेरी कहानी कैसी लगी जरूर बताएं, कल मैं आपके लिए एक नै कहानी ले के आउंगी, जो के मेरे और मेरे मामा जी के बीच का है, दूसरे दिन ही मामा जी को अपने जाल में फसाई और नहीं सी चूत में मोटा लंड खूब डलबाई, प्लीज मेरी अगली

कहानी जरूर पढ़ना.
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