गंदा है पर धंधा है ये 9

('')


Author :अंजली Update On: 2016-02-03 Views: 2063

दोस्तो, किसी भी कहानी या बात को समझने और जानने के लिए, ज़रूरी है की वो हम शुरू से आख़िर से जाने. मेरी कहानी को पूरा समझने के लिए, आपको जानना होगा की किस तरह मेरी बहन हमारी किरायेदार आंटी से मिली और उसके रंडी के

करियर की शुरूवात हुई. किस तरह, वो पहली बार पैसे के लिए चुदि. मस्त कहानियाँ हैं, सेक्सवासना डॉट कॉम पर !!! !! पहली बार उससे कितने पैसे मिले और उसके बाद, वो कैसे कैसे कितनों से चुदि. ये सब जाने बिना, अगर आप आगे की कहानी

पढ़ेगें तो ना तो कोई फायदा है, ना ही आपको कुछ समझ आएगा इसलिए मेरी आपसे विनती है की आगे बढ़ने से पहले, आप पूरी कहानी जान लें जो “गंदा है पर धंधा है” के नाम से सेक्सवासना पर आठ भागों में प्रकाशित हो चुकी है. मेरी दीदी,

अब “प्रोफेशनल रंडी” बन चुकी थी. अब तो खैर उसकी शादी हो गई है पर शादी के बाद भी उसने कुछ समय, ये सब नहीं छोड़ा. अपनी इस कहानी में आपको, ये सब बताउंगी… पिछली कहानी में, आपने पढ़ा – उनकी पहली चुदाई, इसी घर में छत पर

हुई थी और अब तक वो बिना चुदवाए जिंदा नहीं रह सकती. पहली चुदाई, उन्होंने इंग्लिश कोचिंग के एक लड़के के साथ, घर की छत पर की थी. कॉलेज में पढ़ने पर भी उसके 4 बॉय फ्रेंड बने थे और चारों ने कई बार दीदी को हॉस्टल में, पी जी

में और उनके रूम पर लेजा कर खूब चोदा. एक बार तो वो दो लड़कों के साथ, एक साथ चुदीं. मैं सोच में पड़ गई की उस टाइम, मुझे और मम्मी को कुछ पता नहीं चला. दीदी का कॉलेज, दूसरे शहर में था. खैर, दीदी को 15 दिन लगे रिकवर होने

में. अब आगे – उसके बाद भी उनकी चाल में लड़खड़ाहट थी पर वो काफ़ी हद तक ठीक थी. वो 15 दिन, मेरे काफ़ी सुकून से गुज़रे. मस्त कहानियाँ हैं, सेक्सवासना डॉट कॉम पर !!! !! आंटी और मैं, रोज दीदी की 3 टाइम तेल से मालिश करते. दीदी

को भी अब मालिश करवाना, काफ़ी पसंद आ रहा था. प्रॉपर मेडिकेशन और हेल्त सप्प्लिमेंट से, वो जल्दी ही ठीक हो गई. इसी बीच कॉलोनी वाले हमारे घर की और देख कर, जाने कैसी कैसी बातें बनाने लगे थे. मुझे देख कर, कॉलोनी के मनचले

लड़के ‘अश्लील इशारे’करने लगे थे. दीदी तो बाहर निकलती ही नहीं थी. मम्मी के अभी घर आने में, हफ़्ता भर बाकी रह गया था. दीदी इस टाइम का और कमाई के लिए, उपयोग करना चाह रही थी. शायद आपको याद हो, आंटी को उनकी मम्मी ने ही

धंधे में उतारा था और आंटी, ना ही मैं ये चाहते थे की दीदी ये सब करे. आंटी मजबूर थीं पर दीदी, ये मज़े के लिए कर रही थीं. ख़ास बात, जो आप लोगों का जानना ज़रूरी है वो ये है की दीदी ने शादी के बाद भी यहाँ घर आने पर ये सब

किया. ये तो हर कोई जानता है की रंडी के साथ, कोई घर नहीं बसाता क्यूंकी रंडी का अंत हमेशा बहुत दर्दनाक होता है और उससे जुड़े इंसान का भी. मुझे ये तब समझ आया, जब जीजू को “एड्स” हो गया. वो कहानी आगे… उन्हीं दिनों, जब

मम्मी के आने में वक़्त था एक रात मैं दीदी के साथ लेटी हुई टीवी देख रही थी तो मैंने दीदी से कहा – दीदी, ये सब छोड़ दो… दीदी ने, मेरे से बोला – तू जब बड़ी हो जाना और जब तेरी चूत में खुजली हो और तुझे ऐसा मोका मिले तो छोड़

के दिखा देना तो मैं मान लूँगी… कितना सच कहा था, दीदी ने. 15 दिन बाद, दीदी चलने फिरने लायक हो गई थी. दीदी छत पर, शाम में टहल रही थी. कॉलोनी के लड़कों, अंकल और आंटी दीदी को देख कर आपस में कनाफूसी कर रहे थे. मैंने दीदी से

बोला – प्लीज़, नीचे चलो… दीदी ने झटके से, मेरा हाथ छुड़ा कर मेरे से बोला – मुझे मज़ा आ रहा है… हो सकता है, कोई ग्राहक मिल जाए… तुम नीचे जाओ, अंजली… मुझे थोड़ा इन सबको टीज़ करने दो… पता लगने दो की मेरी जैसी ब्यूटिफुल

गर्ल कहीं नहीं है… मादर चोद, हरामी साले. मैं नीचे चली आई. दीदी भी थोड़ी देर बाद, नीचे आ गई. उसने आंटी से बोला – अंजली को लेकर, आज अपने घर चले जाना… मैंने कुछ मामला सेट किया है… आंटी ने पूछा – किससे… ?? दीदी ने बताया

– बगल वाले, रॉय अंकल से… 15000/- में… आंटी ने दीदी के गाल चूमते हुए कहा – तू पूरी रंडी निकली… डिनर के बाद, रश्मि आंटी मुझे लेकर अपने घर चली आई. मस्त कहानियाँ हैं, सेक्सवासना डॉट कॉम पर !!! !! उधर दीदी ने मेरे जाने के बाद,

हमारे पड़ोसी रॉय अंकल को बुलाया. उनसे पैसे लिए और उनके साथ सेक्स किया. रॉय अंकल, काफ़ी खुश थे पर दीदी शायद उतनी नहीं पर पैसे तो मिले ही थे. अगले दिनों भी दीदी ने ऐसा ही किया. दिन में भी किसी ना किसी कॉलोनी वाले को

बुला लेती… 10,000 – 15000/- में मामला सेट करतीं. उसके साथ दिन में सेक्स करतीं और रात में किसी और को बुला कर उससे भी इतने ही पैसे चार्ज करती और उसके साथ सेक्स एंजाय करती. वो उन दिनों काफ़ी कम सोती थी. उसका पूरा ध्यान

“सेक्स और पैसों” पर ही था. केवल 1 महीने में ही, दीदी ने अपनी चूत के दम पर 12 लाख बना लिए और उसको अपने बैंक के अकाउंट में जमा किया. मुझे याद है, बैंक में डेपॉज़िट करने के अगले दिन ही मम्मी घर वापस आ गई. उनके आने के कुछ

दिनों बाद तक घर पर सब कुछ ‘शांत’रहा. दीदी ने भी अपना माइंड कुछ दिनों के लिए सेक्स पर से हटा लिया था शायद या वो काफ़ी थकान महसूस कर रही थी या दीदी के दिमाग़ मे कुछ और ही चल रहा था… … कहानी जारी रहेगी.. अगर आपको मेरी

कहानी पसंद आई तो अपना फीड बैक अवश्य भेजें..

Give Ur Reviews Here