मेरी चुदाई कि टीचर चाची 1

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Author :आकाश Update On: 2016-02-16 Views: 1688

हेलो दोस्तो, मेरा नाम आकाश है. मैं कानपूर का, रहने वाला हूँ. मेरी पर्सनालिटी अच्छी है. मेरी लम्बाई पांच फीट है और मेरा लंड, बहुत मोटा है. आज तक, हर लड़की ने तो यही कहा है. अब मैं, अपनी कहानी पे आता हूँ.. ये बात तब कि

है, जब मैं इंटर में पढ़ता था. मस्त कहानियाँ हैं, सेक्सवासना डॉट कॉम पर !!! !! मैं गर्मियों कि छुट्टियों में, अपने गाँव गया था. वहाँ, मेरे परिवार के सब लोग रहते थे. दरअसल मैं, अकेला ही कानपूर में पढ़ता था. मैं घर कई

दिन बाद गया था तो सब लोग, मेरे स्वागत में लगे हुए थे. मुझे भी मजा आ रहा था. मेरी एक चाची है, जो गाँव में हम लोगों के साथ ही रहती थी. एक तरीके से, तो वो “क़यामत” दिखती थी. मेरे चाचा वाकई में किस्मत वाले थे, जो इनको ऐसी

खुबसूरत, परी जैसी पत्नी मिली थी. मेरे चाचा प्राइवेट जॉब करते है तो ज्यादातर, वो काम के सिलसिले में घर से बाहर ही रहते थे. चाची का फिगर “34-28-36” होगा. फिर भी वो किसी “मॉडल” से कम नहीं लगती थी. अब मैं सीधे, कहानी पे आता

हूँ. जब मैं अपने गाँव गया था तो सब लोग, मेरी खातिरदारी में लगे थे. चाची, मुझ पर कुछ ज्यादा ही धयान दे रही थी पर मुझे लगा शायद, वो मेरे बहुत दिन बाद घर आने कि वजह से है. थोड़ी देर बाद, मैं बाहर घुमने और अपने पुराने

दोस्तों से मिलने चला गया. रात में, जब घर आया तो सब लोग खाना खा रहे थे. मैं भी साथ में, खाना खाने लगा. थोड़ी देर बाद, सब लोग खाना खाने के बाद सोने के लिए जाने लगे. मैंने दादी से पूछा – दादी, मैं कहा सोऊँ… ?? हमारे गाँव

में लाइट कुछ कम ही आती थी तो सब लोग, छत पर सोते थे. हम सब लोग, छत पर सो गए. दूसरी मंजिल पर चाची और चाचा जी लोग, सोया करते थे पर उस टाइम चाचा जी किसी काम के सिलसिले में बाहर ही गए हुए थे. मैंने रात में, पहली मंजिल पे ही

सोना सही समझा. मस्त कहानियाँ हैं, सेक्सवासना डॉट कॉम पर !!! !! मैं कई दिने बाद या, यु कहिये कई महीनो बाद गाँव गया था तो मुझे गर्मी कि वजह से नींद नही आ रही थी. मैं छत पर, टहलने लगा. थोड़ी देर टहलने के बाद, मुझे चाची ने

आवाज दी – आकाश, तुम जाग रहे हो… मैं एकदम से आवाज आने कि वजह से सहम गया. जिसे देख कर, चाची हँसने लगी और मुझे ऊपर आने को कहने लगी. मुझे नींद तो आ नहीं रही थी तो मैंने भी उपर जा कर, टाइम पास करना सही समझा. मैं ऊपर गया तो

वहा एक चारपाई ही थी तो मैं फिर ऊपर भी टहलने लगा तो चाची ने जोर देते हुए कहा – आओ, यहीं बैठ जाओ… कब तक यूँही खड़े रहोगे… मैं भी चाची के ज्यादा जोर देने पर वही, पैरो के साइड में बैठ गया. हम लोग, बातें करने लगे. बात करते

करते टाइम का पता ही नहीं चला और 12 बज गया. मैंने चाची से कहा – चाची जी, रात बहुत हो गई है… चलिए, आप भी सो जाइए… मैं भी जाता हूँ… तो चाची बोली – तुमको नींद आ रही है, क्या… ?? मैंने ना में सिर हिलाते हुए, कहा – मेरा तो रोज

का काम है… पढ़ने के लिए, इतना तो जागना ही पड़ता है… और हँसने लगा. चाची बोली – मुझे भी नींद नहीं आ रही… मैं दिन में सो ली थी… चलो, जब तक नींद नहीं आ रही… हम लोग, बातें ही करते है… मैंने भी यही करना, ठीक समझा. वैसे भी

नीचे जा कर लेटता तो बोर हो जाता. हम लोग, बात करने लगे. थोड़ी देर बाद, चाची बोली – आकाश, पता नहीं क्यों… आज मेरे पैरो में शाम से बहुत दर्द हो रहा है… मैंने कहा – चाची जी… शाम को बता दिया होता तो मैं कोई दवा ला के दे

देता… चाची बोली – मुझे लगा था, ठीक हो जाएगा पर ये तो बढता ही जा रहा है… आकाश, अगर तुझे कोई दिक्कत ना हो तो क्या तू मेरे पैर, हाथों से दबा सकता है… मस्त कहानियाँ हैं, सेक्सवासना डॉट कॉम पर !!! !! मैंने हाँ में सिर

हिलाते हुए कहा – अरे, इसमें दिक्कत वाली क्या बात है… लाइए, मैं आपके पैर दबा दूं… चाची साड़ी पहने हुए थी तो उन्होंने साड़ी को थोडा ऊपर उठाते हुए कहा – लो दबाओ… और, मैं उनके घुटने तक पैर दबाने लगा और हम लोग, बात करने

लगे. चाची ने, अचानक कहा – आकाश, तुमको पैर दबाना भी नहीं आता है… सही से दबाओ… मैं और ताकत लगा के, पैर दबाने लगा. थोड़ी देर बाद, चाची ने अपनी साड़ी को और ऊपर उठाते हुए और मेरा हाथ पकड़ते हुए अपनी जांघों में हाथ रखते हुए

कहा – यह दबाओ… यहाँ दर्द हो रहा है… तो दोस्तों, आपको मेरी ये आप बीती कैसी लगी. मुझे जरुर बताए.

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