मेरी चुदाई कि टीचर चाची


Author :आकाश Update On: 2016-02-16 Views: 2053

थोड़ी देर बाद, चाची बोली – आकाश, पता नहीं क्यों… आज मेरे पैरो में शाम से बहुत दर्द हो रहा है… मैंने कहा – चाची जी… शाम को बता दिया होता तो मैं कोई दवा ला के दे देता… चाची बोली – मुझे लगा था, ठीक हो जाएगा पर ये तो बढता

ही जा रहा है… आकाश, अगर तुझे कोई दिक्कत ना हो तो क्या तू मेरे पैर, हाथों से दबा सकता है… मस्त कहानियाँ हैं, सेक्सवासना डॉट कॉम पर !!! !! मैंने हाँ में सिर हिलाते हुए कहा – अरे, इसमें दिक्कत वाली क्या बात है… लाइए, मैं

आपके पैर दबा दूं… चाची साड़ी पहने हुए थी तो उन्होंने साड़ी को थोडा ऊपर उठाते हुए कहा – लो दबाओ… और, मैं उनके घुटने तक पैर दबाने लगा और हम लोग, बात करने लगे. चाची ने, अचानक कहा – आकाश, तुमको पैर दबाना भी नहीं आता है…

सही से दबाओ… मैं और ताकत लगा के, पैर दबाने लगा. थोड़ी देर बाद, चाची ने अपनी साड़ी को और ऊपर उठाते हुए और मेरा हाथ पकड़ते हुए अपनी जांघों में हाथ रखते हुए कहा – यह दबाओ… यहाँ दर्द हो रहा है… जांघों को हाथ लगाते ही, मानो

मेरे शरीर में सुरसुरी सी मच गई थी. मैंने आज तक बस “बी एफ” ही देखी थी. आज तक, किसी लड़की के जांघों को हाथ नहीं लगाया था. मैं शायद ही, इस सोच से उभर पाया था कि चाची ने कहा – क्या हुआ, नहीं दबाना तो बोल दो… मैंने कहा –

नहीं चाची… मैं दबाता हूँ… मेरा लंड, मेरा लोअर फाड़ के बाहर आने के लिए तैयार था. शायद, ये बात चाची को भी अच्छी तरह पता थी. अब मैं चाची कि जांघों को दबा रहा था. पता नहीं, थोड़ी देर दबाते दबाते क्या हुआ, मैं बस अंजाने ही

उनकी जांघों को सहलाने लगा. सहलाते सहलाते, कुछ ही देर में उनकी बुर को रगड़ने लगा. गाँव वाली औरतें, अंदर चड्डी नहीं पहनती. अब चाची ने बड़ी ही कामुक आवाज में कहा – ये क्या कर रहे हो… ?? मैंने कहा – जो आप चाहती थीं, इतनी

रात में मुझे उपर बुला कर, वही कर रहे हूँ… चाची ने कुछ नहीं कहा और हल्की सी मुस्कुराई. अब चाची भी मदहोश हो गई थी और अचानक, बैठ कर मुझे बहुत तेज या यु कहिये जानवरों कि तरह चूमने लगी. जैसे कोई पहली बार, किसी लड़के या

लड़की से मिल के चूम रहा हो. मानो चाची, जन्मों कि प्यासी हो. मैं भी चाची का साथ दे रहा था. भले ये मेरा पहली बार था पर मैंने बहुत सी फिल्में देखीं थी, जिसमे सिर्फ और सिर्फ यही सिखने को मिलता है. अब हम लोग, एक दुसरे को

बेतहाशा चूम रहे थे. चुम्म्मन क्रिया, ख़त्म होते होते चाची ने मेरे शरीर से पुरे कपडे अलग कर दिए थे. अब मैं “नंगा” चाची के सामने था. चाची फिर मुझे छोड कर लेट गई और मुझसे कहा – क्या अपने कपडे भी मुझे ही उतरने

पड़ेंगे… इतना सुनते ही, मैंने चाची के कपडे उतारने शुरू कर दिए पर शायद ये जल्दबाजी थी तो चाची बोली – क्या मेरे कपडे यूँ ही सूखे सूखे उतारोगे… मैंने तो तम्हारे बड़े मजे से उतारे थे… मैंने चाची का इशारा समझते हुए,

उनको चूमना शुरू किया. चुमते हुए, मैंने उनके पुरे कपडे उतार दिए. फिर मैं, चाची के निप्पल चूसने लगा. मुझे निप्पल चुसना बहुत ज़्यादा पसंद है और मैं वही कर रहा था. इधर, चाची पागल हुई जा रही थी. मस्त कहानियाँ हैं,

सेक्सवासना डॉट कॉम पर !!! !! उन्होंने मेरे लंड को हाथ में पकड़ते हुए कहा – ये भी कुछ कमाल दिखाएगा या बस तुम यूँ ही टाइम पास करते रहोगे… मैंने देर ना करते हुए, अपना लंड चाची की चूत में डाल दिया और चाची कि दोनों टाँगे

उठा कर “मदमस्त चुदाई” करने लगा. करीब 8-9 मिनट की चुदाई के बाद, चाची झड चुकी थी और मैं भी अपने चरम पे था. मैंने चाची से पूछा – कहाँ निकालूँ… ?? चाची के बोलने पर, मैंने अन्दर ही गिरा दिया. उसके बाद, चाची ने कपडे पहने और

मेरे लिए किचन से मिठाई लाई. मैंने मिठाई खाई और चाची के बगल में लेट गया. मस्त कहानियाँ हैं, सेक्सवासना डॉट कॉम पर !!! !! उस रात, मैंने “9 बार” चाची की जमकर चुदाई की. तो दोस्तों, आपको मेरी ये आप बीती कैसी लगी. मुझे

जरुर बताए. मैंने इसके बाद कई लडकियों को चोदा, वो मैं आपको जल्द ही अपनी अलग स्टोरी में बताऊंगा.

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