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दीदी चूस लो कोई नहीं देख रहा


दोस्तों ये कहानी आप सेक्सवासना डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

हेलो दोस्तों में रणवीर आज फिर आया हूँ अपनी दीदी कुसुम के साथ के मेरे सेक्स एंकाउन्टर की एक सेक्सी चूस कहानी. चूस कहानी इसलिए क्यूंकि इस कहानी में केवल लंड चूस की बात हैं और हमें सेक्स करने का मौका नहीं मिला था

इसलिए दीदी ने केवल मेरे लंड को चूस दिया था. दरअसल मैं और मेरी दीदी जो मुझ से 2 साल बड़ी हैं; यानी की 21 साल की हैं; उसके बिच 6 महीने से सेक्स सबंध हैं. दीदी को रात को मैं उसके कमरे में जा के चोदता भी हूँ और अपना लंड उसकी

गांड में भी दे आता हूँ. लेकिन पिछले महीने हम मामा के वहाँ गए थे, मामा के बेटे आरुष की शादी थी इसलिए दो हफ्ते के लिए मम्मी और हम दोनों भाई बहन यहाँ आये थे. मामा की डेथ दो साल पहले हुई थी इसलिए मामी को कंपनी और काम में

हाथ बंटाने के लिए हम लोग लम्बे समय के लिए यहाँ आये थे. डेड अपने मुर्गी फ़ार्म के बिजनेश के वजह से लेट आने वाले थे. पहले कुछ दिन तो अच्छे बीते और मैं और कुसुम दीदी स्टोर रूम में जा के लंड चूस और चूत मारी कर आते थे.

दीदी ने घर से निकलने के पहले ही एक दर्जन कंडोम मंगवा लिए थे इसके लिए ख़ास. लेकिन जैसे जैसे महमान आते गए हमारी मुश्किलें बढती गयी; क्यूंकि अब स्टोर रुम में चुदाई करना खतरे से खाली नहीं था. दीदी और मुझे दोनो को ही

चोदना था लेकिन सेट नहीं हो पा रहा था. दीदी तो दो दिन से मुझे इशारे कर रही थी के चलो चोदते हैं. पर साला बहुत कुछ देखना पड़ता हैं; और ऊपर से हम दोनों ठहरे भाई बहन. मैं जुगाड़ में था की कोई जगह मिले जहाँ में दीदी की चूत

लूँ. आखिर थक के मैंने एक जगह की आइडिया लगाई. वो जगह थी मामा के घर के बाजू में नए बन रहे मकान की. वो मकान में मजदुर दिनभर लगे रहते थे काम में और दोपहर को वो लोग खाने का एक घंटे का ब्रेक लेते थे. मैंने कुसुम दीदी को कहा की

इस ब्रेक में चोदने का प्रबंध हो सकता हैं. दीद बोली, ठीक हैं वही चोदना तू मुझे. मैंने दुसरे दिन 12 बजे से ही वोच रखनी चालू कर दी थी. जैसे 13:15 पे मजदुर और मेशन लोग खाने के लिए उस मकान से बाहर आये मैंने कुसुम दीदी को मिस कॉल

दी. वो चुपके से मकान के अंदर पीछे के रास्ते से घुसी. मैंने इधर उधर देखा और मैं आगे से अंदर चला गया. चोद नहीं सकते केवल चूस सकते हैं यहाँ दीदी अंदर आके घबरा सी गई थी. वो बोली अरे रणवीर क्या जगह ढूंढ ली हैं तूने. ना

दरवाजे हैं ना खिड़की. यहाँ सेक्स किया तो कल की राजस्थान पत्रिका में छपेगा फोटो के साथ. बात तो सही थी उसकी बाहर से अंदर देखने के लिए बहुत सारे रस्ते थे. दीदी बोली, एक काम कर मैं तेरा लंड चूस देती हूँ. अब आई हूँ तो कुछ

तो करुँगी ना. मुझे आज भी बाथरूम में बेगन ले के जाना पड़ेगा. देख तू यहाँ लंड निकाल के बैठ जा. और नजर रखना इधर उधर कोई देख ना ले. सच पुछू तो मुझे लगा था की इस मकान में सेक्स हो सकता हैं; लेकिन साला अंदर जाके देखा तो

खुलेआम लग रहा था. चलो कोई नहीं दीदी चूसने के लिए रेडी थी थी; इसलिए ज्यादा दिक्कत नहीं थी. मैं वहाँ बैठ गया और पेंट को घुटनों तक खिंच ली. दीदी मेरी टांगो के बिच में बैठ गई और उसका एक हाथ अपनी चूत में लगा हुआ था. उसने

मेरे लंड के सुपाड़े के उपर किस की और बोली, बहुत दिन के बाद तेरा तोता देखा हैं रणवीर; साला इस से अच्छा तो हम अपने घर में ही होते. वहाँ चोदने के लिए कोई दिक्कत नहीं आती हैं. इतना कहते ही दीदी ने अपने मुहं को खोला और लंड

को तल तक मुहं में भर लिया. उसने जैसे प्यारा चूस दिया; मेरे तनबदन में जैसे की करंट दौड़ गया. मी दीदी के माथे को पकड़ लिया. दीदी ने अपने दोनों हाथ अब मेरी गांड के उपर रख दिए और वो जोर जोर से अपने मुहं को मेरे लंड के उपर

चलाने लगी. वो इतना मस्त चूस रही थी जिसका कोई मुकाबला ही नहीं हो सकता था. मैंने दीदी के चुंचे पकडे और उन्हें दबाने लगा. दीदी अब अपनी जबान को लंड के सुपाड़े के उपर चला रही थी. मुझे जो मजा आ रहा था उसका बयान मैं कोई

शब्दों में तो नहीं कर सकता. दीदी के मुहं में लंड को एक अलग ही मजा आ रहा था. वैसे दीदी पहली बार मेरा लंड नहीं चूस रही थी; लेकिन शायद बहुत दिन के बाद यह अवसर हाथ आया था इसलिए मुझे कुछ एक्स्ट्रा मजा आ रहा था. तभी दीदी ने

लंड को मुहं से बहार निकाला और वो इधर उधर देखने लगी, उसे लगा की कोई आ गया हैं. मैंने उसके मुहं को अपने लंड के उपर खींचते हुए कहा, दीदी चुसो मेरा लंड आराम से कोई नहीं देख रहा हैं. दीदी वापस लंड को सुख देने लग गई. अब की बार

उसकी गति बढ़ गई. वो अब अपने हाथ से लंड के निचे के गोटो को मसल भी रही थी. मुझ से यह अतिशय सुख बिलकुल भी बर्दास्त नहीं हो रहा था. दो मिनिट के बाद मेरे लंड के अंदर से मलाई निकलने लगी. दीदी जैसे की चोकोलेट शेक पी रही हो वैसे

लंड के मुठ को गले में उतार गई. मैंने घुटनों से पेंट उठा के पहन ली. दीदी और मेरे चूस सेक्स का अंत हुआ और हम बारी बारी उस मकान से निकल गए; जैसे की हम अंदर आये थे. उसके बाद भी हम लोग दो बार उस मकान में गए थे और एक बार तो

मैंने हिम्मत कर के दीदी को चोद भी दिया था वही पें. अब हम घर जाने की राह देख रहे थे बस, ताकि एक दुसरे की बाहों में रात भरलेटे रहे….!!!
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