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कोई नहीं तो काम वाली ही सही


दोस्तों ये कहानी आप सेक्सवासना डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

हैल्लो फ्रेंड्स.. में आपका दोस्त राहुल एक बार फिर से आ गया हूँ एक नई कहानी लेकर और में आज आपको बताता हूँ कि कैसे मैंने अपनी नौकरानी को चोदा। अब में अपनी स्टोरी शुरू करता हूँ.. लेकिन दोस्तों इससे पहले में आपको बता

दूँ कि मैंने एम.बीए किया हुआ है और में अभी दिल्ली में नौकरी करता हूँ। में एक अपार्टमेंट में रहता हूँ और मेरे घर पर काम करने के लिए मैंने एक बाई रखी हुई है। मेरी उम्र अभी 26 साल है और यह बात कुछ ही दिन पहले की है। मेरी

मौसी भी दिल्ली में रहती है तो मैंने उनकी बेटी को बहुत बार चोदा था.. लेकिन अब उसकी शादी हो गई है और मेरी भाभी अपने पति के साथ अमेरिका जा चुकी है। तो यह तो हुआ मेरा पुराना हिसाब किताब.. अब में आप लोगों को वो बताता हूँ जो

मैंने नया किया है। जैसा कि मैंने बताया कि में घर पर अकेला रहता हूँ तो मैंने घर में सभी काम के लिए एक बाई लगा रखी है वो घर की सफाई भी करती है और खाना भी बनाती है.. उसकी उम्र लगभग 24 साल है और वो सुंदर बहुत थी। मतलब उसको

देख ऐसा नहीं लगता था कि उसे नौकरानी होना चाहिए। उसका सावलां सा रंग था.. ठीक ठाक हाईट और सुडौल बदन, उसका फिगर रहा होगा 37-26-34 और वो शादीशुदा थी। में हर पल यही सोचता कि उसका पति कितना किस्मत वाला है और वो साला इसको बहुत

चोदता होगा। उसके बूब्स दिखने में ऐसे थे कि बस दबा ही डालो और ब्लाउज में समाते ही नहीं थे। वो कितना भी साड़ी से ढकती वो इधर उधर से ब्लाउज से उभरते और उसकी चूचियाँ दिख ही जाती थी। फिर जब झाडू लगाते हुए वो झुकती तो

ब्लाउज के ऊपर से चूचियों के बीच की दरार को छुपा ना सकती थी। फिर एक दिन जब मैंने उसकी इस दरार को तिरछी नज़र से देखा तो मुझे पता लगा कि उसने सफेद कलर की ब्रा पहनी हुई थी और जब वो ठुमकती हुई चलती तो उसके चूतड़ हिलते और

जैसे वो कह रहे हो कि मुझे पकड़ो और दबा दो। फिर वो जब अपनी पतली सी कॉटन की साड़ी जब वो संभालती हुई सामने अपनी चूत पर हाथ रखती तो मेरा मन करता कि काश उसकी चूत को में छू सकता और करारी, गरम, फूली हुई और गीली गीली चूत में

कितना मज़ा भरा हुआ था? काश में इसे चूम सकता और चूचियों को चूस सकता और इसकी चूत को चूसकर चूत का पानी खाली कर देता। वो हर रोज 2 बार मेरे घर पर आया करती थी और सुबह जब में ऑफिस जाने को तैयार रहता था.. तब वो आती और मेरे पूरे

दिल में हलचल कर जाती। फिर में उसको देखता और नहाते टाईम उसके बारे में सोचकर मुठ मारा करता था। जब तक मुझे अपनी बहन और भाभी की चूत मिल रही थी तब तक मैंने उसको इस नज़र से नहीं देखा था.. लेकिन अब मुझे 3-4 महीनों से कोई चोदने

को नहीं मिला था तो मेरी नज़र उस पर जा रही थी। वो तो मुझे देखती ही नहीं थी.. बस अपने काम से मतलब रखती और ठुमकती हुई चली जाती और मैंने भी उसे कभी ऐसा एहसास नहीं होने दिया कि मेरी नज़र उसे चोदने के लिए बैताब है और अब

चोदना तो था ही। तो मैंने अब सोच लिया कि इसे पटाना ही होगा और धीरे धीरे मेरी तरफ आकर्षित करना पड़ेगा.. वरना कहीं वो बुरा मान गई तो मेरा सारा काम बिगड़ जाएगा। तो मैंने उससे थोड़ी थोड़ी बातें करना शुरू किया.. उसका नाम

शांति था। एक दिन सुबह उससे बात करते करते मैंने उससे उसके घरवालो के बारे में पूछा तो उसने बताया कि उसके पति नौकरी पर है और वो गुडगाँव में रहते है.. उसके एक 2 साल की लड़की है और फिर वो चली गई। फिर कुछ दिन तक में ऐसे ही

उससे बात करता रहा और हम दोनों की दूरियां कम कर रहा था और अब करीब करीब रोज़ में चाय बनवाता और उसकी बड़ाई करता। फिर मैंने एक दिन ऑफिस जाने के पहले अपनी शर्ट प्रेस करवाई और उसको बोला कि शांति तुम प्रेस अच्छी तरह कर

लेती हो। तो उसने कहा कि साहब मुझे दो दिन की छुट्टी चाहिए मेरे वो आ रहे है। फिर मैंने उसी बात पर उससे कहा कि मतलब अब तो सिर्फ़ तुम और वो और दरवाजा बंद करके रखना.. तो वो बोली कि क्या साहब आप भी? फिर मैंने उसको 500 रुपये दिए

और कहा कि जाओ.. लेकिन दो दिन से ज्यादा मत लगाना.. तो वो बहुत खुश हो गई और चली गई। फिर जब वो दो दिन के बाद काम पर आई तो वो बहुत खुश लग रही थी और में जब शाम को घर आया तो मैंने उससे पूछा कि क्यों मिल आई क्या अपने पति से.. कैसे

है वो? कितने कमा कर लाया था और क्या क्या किया तुम लोगों ने। तो वो कहने लगी कि साहब मेरे वो तो बहुत अच्छे है वो बहुत सारे पैसे लाए थे और हमने बहुत मज़े भी किये और बात करते करते में हमेशा उसके बूब्स देखता और उसकी गांड

देखता.. वो मुझे कई बार देख लेती और फिर वहाँ से जाने लगती और ऐसे ही बातों का सिलसिला चलता रहा। फिर एक दिन मैंने उससे ऐसे ही कहा कि तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो और अगर तुम्हारी शादी नहीं हुई होती तो में तुमसे शादी कर

लेता। तो वो कुछ नहीं बोली.. मैंने धीरे से अपना हाथ उसके हाथ पर रख दिया और उससे कहा कि मेरे पास आकर बैठो.. लेकिन उसने मना कर दिया और बोली कि साहब में अभी चलती हूँ। तो मैंने उससे कहा कि तुम जा रही हो तो चली जाओ.. लेकिन

ज़रा सोचकर बताना। फिर शाम को जब वो आई तो उसने घर का काम किया और चली गई.. मुझे ऐसा लगा कि वो शायद नाराज़ हो गई है तो उसके लिए एक सिंपल सी साड़ी लेकर आया और जब वो दूसरे दिन आई तो मैंने उससे चाय लेते समय उसको वो साड़ी दे दी

और मैंने उससे कहा कि तुम मुझे ग़लत मत समझो शांती.. तुम मुझे सच में बहुत अच्छी लगती हो और में तुम्हे बहुत पसंद करता हूँ। तो वो शरमाते हुए चली गई और किचन में जाकर खाना बनाने लग गई। फिर मैंने 3 दिन बाद ऑफिस से 2 दिन की

छुट्टी लेने का फ़ैसला किया और मैंने सोच लिया कि इसको इन्ही 3 दिन में सेट करना पड़ेगा.. लेकिन 2 दिन चोदना है और जब वो दूसरे दिन आई.. तो मैंने उससे कहा कि सुनो शांती तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो और में तुमको बहुत सारा

प्यार देना चाहता हूँ.. मैंने तुमको जब से देखा है में पागल सा हो गया हूँ और मेरा दिल चाहता है कि में तुमको दिन रात प्यार करता रहूँ। तभी वो यह बात सुनकर नाराज़ सी हो गई और वो कहने लगी कि साहब मैंने यह कभी नहीं सोचा था कि

आप मेरे बारे में ऐसा सोचते होंगे.. में जा रही हूँ और अब कभी नहीं आउंगी और आप सब मर्द एक जैसे होते है। फिर मैंने उससे कहा कि शांति तुम ग़लत समझ रही हो में तुमको बहुत खुश रखूँगा और तुम मेरा साथ दो तो में तुमको इतने पैसे

दूँगा कि तुमको कहीं और काम भी करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी.. लेकिन वो बिल्कुल भी मानने को तैयार ही नहीं थी। फिर मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसको अपनी और खींचने लगा और वो मुझसे दूर जाने की नाकाम कोशिश करती रही। फिर मैंने

उसको ज़ोर से पकड़कर अपनी गोद में बैठा लिया और मैंने उससे कहा कि तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो शांति.. प्लीज़ समझो मेरी बात को। मेरा कोई ग़लत इरादा नहीं है प्लीज़.. शांती और उसको ज़बरदस्ती पकड़कर दबाने लगा। फिर मैंने

उसके बूब्स को दबाना शुरू कर दिया और उसकी साड़ी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा। तभी इतने में ही शांती बोली कि साहब में आपसे एक ही शर्त पर सब कुछ करने को तैयार हो जाउंगी। तो मैंने पूछा कि कौन सी शर्त? तो वो बोली कि

आप मुझ पर कभी कोई भी ज़बरदस्ती नहीं करेंगे और कभी किसी से कहेंगे नहीं तो.. फिर मैंने कहा कि में पागल हूँ क्या.. जो किसी से कहूँगा कि मैंने तुम्हारे साथ कुछ किया है? तो वो बोली कि फिर ठीक है और फिर वो धीरे से बोली कि

साहब प्यासी तो में भी बहुत समय से हूँ और मेरी भी आपके ऊपर पिछले 3-4 महीने से नज़र है.. लेकिन मेरी हिम्मत नहीं होती थी कि में आपसे कैसे कहूँ? और आज आपने ही कह दिया है तो मेरी भी परेशानी खत्म हो गई है। शांति आज का काम पूरा

कर चुकी थी और मेरा भी ऑफिस जाने का टाईम हो चुका था तो में भी तैयार हो गया और मैंने उससे कहा कि आज शाम को मिलना। तो वो बोली कि ठीक है साहब और वहाँ से चली गई। फिर में भी तैयार हो गया और जब शाम को वो आई.. तो मैंने उसे अपने

साथ बैठाकर दोनों दिन की बात की मैंने उससे कहा कि तुम दो दिन के लिए मेरे ही घर पर रुक जाओ ताकि हम अच्छे से काम कर सके। तो उसने बहुत देर नाटक करने के बाद बोली कि ठीक है साहब और फिर मैंने अपना हाथ उसके बूब्स पर रख दिया और

उसके बूब्स को दबाने लग गया और वो मेरा हाथ छुड़ाने लगी.. लेकिन में करीब 2-3 मिनट तक उसके बूब्स दबाता रहा। फिर मैंने उससे कहा कि में आज तुमको कपड़े दिलवाने चलता हूँ तो वो बहुत खुश हो गई। मैंने उससे कहा कि तुम अच्छे से

मेरे घर पर नहा लो और तब तक मैंने उसके लिए एक हरी साड़ी निकाल ली जो मैंने भाभी को दिलाई थी उनको चोदने के लिए और फिर जब वो बाहर आई.. तब मैंने उसको वो साड़ी पहनने को दी और वो वहां पर सिर्फ़ ब्रा पेंटी में बाहर आई थी और जैसे

ही वो बाहर आई.. तो मैंने उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके बूब्स दबा दिए और उसकी पेंटी के ऊपर से उसकी चूत को दबाने लग गया। फिर मैंने उसकी ब्रा को खोल दिया और उसके बूब्स को चूसने लगा वो भी एकदम मदहोश हो गई और फिर बोली कि साहब

अभी रहने दो मुझे आज घर भी जाना है और पता नहीं आप खरीदारी में कितनी देर लगाओगे है? तो मैंने कहा कि ठीक है। फिर हम लोग मेरे घर से साथ में निकले और मैंने एक ऑटो किया और हम दोनों लेडीस मार्केट में गए.. मैंने वहां पर उसको

न्यू ब्रा पेंटी, मेक्सी और साड़ी के दो दो सेट दिला दिए और फिर वहीं पर बाहर से मैंने उसको शेम्पू और टूथब्रश और पेस्ट भी दिला दिया और फिर मैंने उससे कहा कि चलो अब तुम अपने घर पर चली जाओ और में भी वो सब सामान लेकर अपने घर

पर आ गया और मैंने रास्ते में एक मेडिकल पर रुककर केप्सूल और कन्डोम ले लिया। फिर दो दिन बाद जब वो आई.. तो मैंने उससे पूछा कि क्यों घर पर बताकर आई हो ना? तो उसने कहा कि हाँ में बताकर आई हूँ और फिर मैंने उसको घर के अंदर

बुला लिया और घर का दरवाज़ा बंद कर दिया.. वो मेरे घर पर 2 दिन और 3 रातों के लिए आई थी। मेरा मतलब है वो शाम को जब मेरे घर पर आई तो तब से ही वो मेरे घर पर अगले 2 दिन के लिए रुकने वाली थी। तो वो जैसे ही अंदर आई.. मैंने उससे कहा कि

शांति में नहाने जा रहा हूँ.. तुम जब तक टी.वी देखो और फिर में नहाने चला गया। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है। फिर जब में वापस आया तो मैंने उससे कहा कि अब तुम भी नहा लो और तुम्हारे जो नए कपड़े है उनको

पहन लो और तैयार हो जाओ। तो वो बोली कि ठीक है साहब और मैंने उससे कहा कि तुम अपनी चूत के बाल भी साफ कर लेना और मैंने रेज़र वहीं पर रखा है। फिर वो बोली कि ठीक है साहब और नहाने चली गई और में वहीं पर बैठा उसका इंतजार कर रहा

था। फिर करीब 20 मिनट के बाद वो नहाकर बाहर आई और जब वो बाहर आई तो उसके बाल खुले थे और उसको देखकर कोई भी यह नहीं कह सकता था कि वो एक काम वाली बाई है और मैंने उससे कहा कि तुम तो बहुत सुंदर लग रही हो और में जब उसके पास गया तो

उसके पास से बहुत अच्छी खुशबू आ रही थी और बाई वाली बदबू उससे बहुत दूर जा चुकी थी और मैंने उसको अपनी गोद में उठा लिया और किस करने लगा। फिर जब मैंने उसको छोड़ा तो वो बोली कि साहब मुझे खाना भी तो बनाना है? तो मैंने उससे

कहा कि ठीक है तुम तब तक खाना बनाओ और जब तक में आईसक्रीम लेकर आता हूँ और फिर में वहां से हम दोनों के लिए आईसक्रीम लेने निकल गया और वो भी खाना बनाने किचन में चली गई। फिर में करीब 20 मिनट के बाद आया तो उस टाईम तक उसका काम

भी बस खत्म ही हो रहा था और में सीधे किचन में गया और उसको जाकर पीछे से पकड़ लिया और वो रोटी बना रही थी और वो एकदम से डर गई। फिर हम लोगों ने साथ में खाना खाया और फिर जब हमारा खाना पीना खत्म हो गया तो मैंने उससे कहा कि

चलो टी.वी देखते देखते आईसक्रीम खायेगें। तो वो बोली कि साहब आप चलो में बस 5 मिनट में आती हूँ और फिर मैंने कहा कि ठीक है और में बाहर कमरे में जाकर बैठ गया। तो करीब 5 मिनट के बाद वो आई और आईसक्रीम भी साथ में लेकर आई और

उसने कहा कि साहब अब क्या करना है? तो मैंने उसको अपने पास बैठा लिया और फिर मैंने उसको एक किस किया और बोला कि अब हम एक साथ आईसक्रीम खायेगें और फिर उसने एक प्लेट में आईसक्रीम निकाली और फिर मैंने उसके हाथ में से

आईसक्रीम ले ली और में उसको किस करने लगा और फिर थोड़ी देर तक उसको किस करता रहा और में उसके बूब्स को धीरे धीरे से मसलने दबाने लगा.. तो उसने अपनी दोनों आँखें बंद कर ली। फिर मैंने उससे कहा कि जब तक में ना कहूँ तुम आँखें

बंद ही रखना.. समझी? वरना तुम शर्त हार जाओगी। तो वो बोली कि ठीक है साहब और वो शरमाते हुए आँखें बंद करके खड़ी थी। तभी मैंने देखा कि उसके गाल धीरे धीरे लाल हो रहे थे और होंठ काँप रहे थे और उसने दोनों हाथों को सामने अपनी

जवान चूत के पास समेट रखा था.. मैंने हल्के से पहले उसके माथे पर एक छोटा सा चुंबन किया.. लेकिन अभी मैंने उसे छुआ भी नहीं था.. उसकी दोनों आँखें बंद थी। फिर मैंने उसकी दोनों पलकों पर बारी बारी से चुंबन किया फिर मैंने उसके

गालों पर आहिस्ता से बारी बारी से चूमा.. उसकी आँखें बंद थी.. लेकिन इधर मेरा लंड तनकर लोहे की तरह खड़ा और सख़्त हो गया था। फिर मैंने उसकी गर्दन पर चुंबन लिया और अब उसने आँखें खोली और सिर्फ़ पूछते हुए कहा कि साहब? तभी

मैंने कहा कि शांति शर्त हार जाओगी आँखें बंद रखो। तो उसने झट से आँखें बंद कर ली और में समझ गया कि लड़की तैयार है बस अब मज़ा लेना है और चुदाई करनी है और मैंने अबकी बार उसके थिरकते हुए होठों पर हल्का सा चुंबन किया.. अभी

तक मैंने उसे छुआ नहीं था। तो उसने फिर से आँखें खोली और मैंने हाथ के इशारे से उसकी पलकों को फिर ढक दिया और अब में आगे बढ़ा उसके दोनों हाथों को सामने से हटाकर अपनी कमर के चारों तरफ घुमाया और उसे अपनी बाहों में समेटा

और उसके काँपते होठों पर अपने होंठ रख दिए और चूमता रहा और कसकर चूमा। अब की बार क्या नरम होंठ थे मानो शराब के प्याले हों। मैंने होठों को चूसना शुरू किया और उसने भी जवाब देना शुरू किया। उसके दोनों हाथ मेरी पीठ पर घूम

रहे थे और में उसके गुलाबी होठों को बहुत ज़ोर ज़ोर से चूस चूसकर मज़ा ले रहा था। तभी मुझे महसूस हुआ कि उसकी चूचियाँ जो कि तन गयी थी.. मेरे सीने पर दब रही हैं और बाएँ हाथ से में उसकी पीठ को अपनी तरफ दबा रहा था.. जीभ से उसकी

जीभ और होठों को चूस रहा था और दाएँ हाथ से मैंने उसकी साड़ी के पल्लू को नीचे गिरा दिया। फिर मेरा हाथ अपने आप उसकी दाईं चूची पर चला गया और उसे मैंने ज़ोर से दबाया। वाह क्या बूब्स थे? मलाई थे बस मलाई और अब मेरा लंड

फूँकारे मार रहा था। तो बाएँ हाथ से मैंने उसके चूतड़ को अपनी तरफ दबाया और उसे अपने लंड को महसूस करवाया.. दोस्तों शादीशुदा लड़की को चोदना बहुत आसान होता है क्योंकि उन्हे सब कुछ आता है और बिल्कुल भी घबराती नहीं हैं।

फिर ब्रा तो उसने पहनी ही नहीं थी और ब्लाउज के बटन पीछे थे। मैंने अपने हाथों से उन्हे खोल दिया और ब्लाउज को उतार फेंका दोनों बूब्स जैसे क़ैद थे एकदम उछलकर हाथों में आ गए.. एकदम सख्त.. लेकिन मलाई की तरह प्यारे भी। तो

मैंने साड़ी को खोला और उतार फेंका बस अब बचा भी क्या था? वो खड़ी नहीं हो पा रही थी और में उसे हल्के हल्के खीचते हुए अपने बेडरूम में ले आया और लेटा दिया और अब मैंने कहा कि शांति रानी अब तुम आँखें खोल सकती हो। तो वो

शरमाते हुए बोली कि आप बहुत पाजी है साहब और उसने आँखें खोली और फिर बंद कर ली.. तो मैंने झट से अपने कपड़े उतारे और नंगा हो गया और मेरा लंड पहले से ही तनकर उछल रहा था.. मैंने उसका पेटीकोट जल्दी से खोला और खींचकर उतार

दिया। तभी मैंने देखा कि उसने कोई पेंटी नहीं पहनी हुई थी और मैंने उसे बात करने के लिए कहा कि यह क्या तुम्हारी चूत तो नंगी है? क्या तुम पेंटी नहीं पहनती? तो उसने शरमाते हुए कहा कि नहीं साहब.. सिर्फ़ एम.सी में
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