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पापा मम्मी को चुदाई करते देखा


दोस्तों ये कहानी आप सेक्सवासना डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

मैं विश्वास रायबरेली का निवासी हूँ, मैं सेक्सवासना का नियमित पाठक हूँ। मैं 24 साल का युवा हूँ.. जो आजकल एसएससी और बैंक के एग्जाम की तैयारी कर रहा हूँ और नौकरी की तलाश कर रहा हूँ.. पर समय निकाल कर सेक्सवासना की

कहानियाँ जरूर पढ़ता हूँ। यह मेरी पहली कहानी है और पूरी तरह से सच्ची है। मैं जानता हूँ कि ऐसी घटना आप सभी के जीवन में कभी न कभी हुई होगी.. पर आप लोगों ने उसे कभी किसी से व्यक्त नहीं किया होगा.. पर मैं व्यक्त कर रहा

हूँ। यह कहानी मेरे मम्मी पापा के सम्भोग की सच्ची कहानी है.. जिसे मैंने खुद अपनी आँखों के सामने देखा और फिर मैं उसका आदी हो गया। करीब दस बजे मम्मी कमरे में आईं और बोलीं- अरे ये लोग तो सो गए.. मैं जानबूझ कर बिस्तर के

कोने में सोने का नाटक कर रहा था और इंतजार कर रहा था कि कब ये लोग अपना काम शुरू करेंगे। मम्मी टीवी देखने लगीं.. थोड़ी देर बाद टीवी की आवाज़ सुनकर पापा की नींद खुल गई। तब तक 11.30 बज चुके थे पापा उठे और पेशाब करने चले

गए। पापा केवल चड्डी और बनियान में थे। मम्मी ने भी टीवी बंद करके एक बार मेरी तरफ देखा.. मैंने ऐसा दिखाया कि मैं गहरी नींद में सो रहा हूँ। मैंने आँखें इस तरह से बंद की थीं कि मुझे सब कुछ साफ़-साफ़ दिख रहा था। फिर मम्मी

ने लाइट बंद कर दी.. पर एक नाईट बल्ब अब भी जल रहा था। पापा पेशाब करके आए और मम्मी भी बाथरूम गईं और वापस आकर उन्होंने अपनी साड़ी निकाली.. जहाँ पापा अब अंडरवियर में थे.. वहीं मम्मी साड़ी और ब्लाउज में थीं। मम्मी पापा के

बगल में आकर लेट गईं मम्मी शायद आज थकी हुई थीं.. तभी तो जब पापा ने उन्हें किस किया.. तो वो बोलीं- राज प्लीज आज मत करो.. मैं बहुत थक गई हूँ.. मुझे नींद आ रही है। पापा धीरे से बोले- मुझे तो नींद तब तक नहीं आएगी.. जब तक तुम मेरा

काम नहीं करोगी। मम्मी बोलीं- विश भी बड़ा हो गया है.. बगल में ही सो रहा है.. कहीं वो जग न जाए। उन्हें क्या पता था कि मैं सो नहीं.. जाग रहा हूँ। इस पर पापा बोले- यहाँ मन कर रहा है और तुम रोज़ की तरह नाटक कर रही हो। मम्मी ने

कहा- अरे यार तुम बहुत परेशान करते हो। पापा बोले- आओ न यार.. मम्मी बोलीं- अरे चादर तो ओढ़ने दो.. कहीं विश ने देख लिया.. तो क्या सोचेगा। पापा बोले- तुम भी पागल हो.. वो बेखबर सो रहा है.. तुम फालतू की बातें मत सोचो.. और इधर

आओ.. मैंने देखा कि पापा मम्मी को चुम्बन करने लगे और ये कहे जा रहे थे कि आज तुम मुझे इतने खूबसूरत लग रही थीं कि जी कर रहा था कि वहीं लिटा लूँ.. पर विश बड़ा हो गया.. इसलिए कण्ट्रोल कर लिया। इस पर मम्मी बोलीं- हमारी शादी

को 25 साल हो गए.. पर तुम्हारी भूख अभी नहीं मिटी। पापा ने कहा- तुम जवानी के रस से भरा हुआ फूल हो.. और मैं उसे पीने वाला भंवरा.. मम्मी इस बात पर हँस पड़ीं। मम्मी जो अभी तक कुछ नाराज थीं.. अब पापा का पूरा साथ दे रही

थीं। दोनों लगातार एक-दूसरे को किस कर रहे थे.. जिससे कमरे में ‘पुच.. पुच..’ की आवाजें गूँज रही थीं। शरीर के टकराव से उन दोनों की वासना पूरी तरह जग चुकी थी.. वो दोनों पूरे मूड में आ गए थे और इस बात से अंजान थे कि उनका

किशोरवय का लड़का उन्हें सब करते हुए देख रहा था। अब मैंने देखा कि पापा ने अपने किस का दायरा बढ़ा दिया और अब वो मम्मी के होंठों के साथ साथ कंधे.. गर्दन.. छाती को भी चूम रहे थे। वो ब्लाउज के ऊपर से ही मम्मी की चूचियों को

दबा रहे थे। वहीं मम्मी के हाथ पापा की पीठ और बालों में चल रहे थे। फिर पापा ने मम्मी के ब्लाउज का बटन खोलकर उसे उतार दिया और फिर जल्दी से उठकर अपनी चड्डी और बनियान भी उतार दी। अब वे जा कर बिस्तर पर लेट गए। पापा ने

मम्मी को करवट करके लिटाया.. वो अपनी जीभ से मम्मी की चूचियों को ब्रा के ऊपर से ही चूस रहे थे। मैं अपने पापा-मम्मी के बारे में बताता हूँ। मेरे पापा राज 48 साल के हैं और एक शॉप चलाते हैं.. जबकि मम्मी रजनी 46 साल की हाउसवाईफ

हैं और थोड़ी मोटी हैं। पापा भी आकर्षक चेहरे के स्वामी हैं दोनों ही देखने में सुन्दर हैं। यह कहानी उस समय की है.. जब मैं किशोर अवस्था में था और जवान हो रहा था। जैसे कि इस उम्र के सभी लोगों के मध्य सेक्स को जानने की

उत्सुकता होती है.. मुझमे. भी थी.. पर शर्म और सभ्यता के कारण किसी से पूछने या बात करने की हिम्मत नहीं होती थी। जबकि मेरे दोस्त खूब मज़े लेकर बातें करते थे। एक दिन स्कूल में मेरे दोस्त आपस में बातें कर रहे थे। मैं बगल

में बैठा था.. वो लोग खूब गन्दी-गन्दी बातें कर रहे थे। हालांकि मज़ा मुझे भी आ रहा था.. पर मैंने उन्हें मना किया.. जिस पर उनमें से एक राजू ने कहा- ये तो सभी करते हैं और तेरी शादी होने पर तू भी करेगा.. और फिर उसने मजाक में

कहा- रात में जब तू सो जाता होगा तो 12 बजे के आस-पास तेरे पापा भी तेरी मम्मी के ऊपर चढ़ते होंगे और उन्हें मज़ा देते होंगे। मैं सन्न हो कर उसकी बात झेल रहा था। उसने कहा- ये वो मज़ा है जो एक बार किसी को मिल गया.. तो वो उससे छोड़

नहीं सकता। इतना कह कर वो हँसने लगा और मैंने गुस्से में आकर उससे एक चांटा मार दिया। राजू ने गुस्से में कहा- अबे न यकीन हो तो देख लेना आज रात.. मैं वहाँ से गुस्से में चला गया.. पर उसकी बातें मेरे कानों में गूंज रही

थीं। स्कूल से लौटने के बाद मैं रोज़ की तरह टयूशन गया और रात में सात बजे लौटा। मेरे दिमाग में राजू की बातें घूम रही थीं। मैंने करीब 8.30 बजे खाना खाया और कमरे में टीवी देखने लगा। मैं बचपन से ही अपने मम्मी-पापा के साथ ही

एक कमरे में सोता था.. पर आज तक मैंने उन्हें सेक्स करते नहीं देखा था। पर आज न जाने क्यों राजू की बातें सुनकर उन्हें सेक्स करते देखने को मन कर रहा था। करीब 9.30 बजे तक पापा-मम्मी ने भी खाना ख़त्म किया.. पापा कमरे में आ गए

और मम्मी काम ख़त्म करने लगी। पापा मेरे साथ टीवी देख रहे थे.. मैं आज उन्हें सेक्स करते हुए देखना चाहता था.. इसलिए मैंने उनसे कहा- मेरा सर दर्द कर रहा है.. टीवी बंद कर दीजिए.. मुझे नींद आ रही है। पापा ने टीवी बंद किया और

लेट गए। मैं भी सोने का नाटक करने लगा.. पर आज मेरी आँखों में नींद कहाँ थी.. वो तो आज कोसों दूर थी। उनका एक हाथ मम्मी की ब्रा पर और एक हाथ पेटीकोट के ऊपर से ही मम्मी की चूत के ऊपर चल रहा था। मम्मी की आँखें बंद थीं और

साँसें तेज़ फूल रही थीं। इसी के साथ वे अपने मुँह से कुछ आवाजें ‘आह.. आह..’ निकाल रही थीं। तभी पापा ने मम्मी की ब्रा का हुक खोलने की कोशिश की.. पर मम्मी बोलीं- नहीं जी.. तुम तो बेशर्मों की तरह नंगे हो गए हो.. और मुझे भी

करना चाह रहे हो। इतना बड़ा लड़का बगल में सो रहा है.. ऐ जी.. कान खोल कर सुन लो.. अब अगर ये सब करना है.. तो आज के बाद दूसरे कमरे में करना.. तुम समझते नहीं हो बच्चा बड़ा हो गया है और तुम हो कि मानते नहीं। इस पर पापा बोले- अब आगे

नहीं करेंगे.. पर आज तो करने दो। मम्मी बोलीं- चलो ब्रा का हुक खोल लो.. पर पेटीकोट नहीं। इस पर पापा बोले- अच्छा बाबा ठीक है। अब पापा ने मम्मी की ब्रा का हुक खोल दिया। ब्रा का हुक खुलते ही मम्मी की चूचियां ब्रा की कैद से

आजाद हो गईं। उनकी चूचियों की भूरी घुन्डियां चमक रही थीं.. क्योंकि पापा उसे काफी देर से दबा रहे थे.. इसलिए वो अब काफी कड़े हो चुके थे.. जो ये संकेत था कि मम्मी चुदने के लिए तैयार हैं। पापा मम्मी की चूचियों को दबाते हुए

बोले- तुम्हारी चूचियां आज भी उतनी ही हसीन हैं.. जैसी 25 साल पहले थीं.. मम्मी के हाथ अब पापा के लण्ड पर चल रहे थे। अचानक मेरी नज़र नीचे की ओर गई तो मैंने देखा कि पापा मम्मी का पेटीकोट उठाकर उनकी पैन्टी के अन्दर उनकी

चूत में उंगली डाल रहे थे.. जिससे उनकी चूत पूरी गीली हो जाए और चुदाई करने में आसानी हो। अब मम्मी पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थीं.. उनके मुँह से अजीब सी सिस्कारियां निकल रही थीं। ये सब देख कर मेरा भी बुरा हाल था.. मेरे

शरीर में भी जैसे करंट दौड़ चुका था। पापा ने मम्मी का पेटीकोट ऊपर उठा दिया। पापा अब मम्मी की जाँघों पर हाथ फेरते हुए उनके चूतड़ों को मसलने की ओर बढ़े.. जिस पर मम्मी बोलीं- अब इन पर हाथ फेरने के अलावा कुछ भी कर लो.. ‘यार

करने भी दो..’ और इतना कह कर वो चूतड़ों को मसलने लगे, वो हल्के से बोले- तुम गीली हुईं? ‘क्या यार.. तुम भी कमाल करते हो इतनी जल्दी कैसे हो जाएगा?’ पापा बोले- फिर मैं करता हूँ.. पापा मम्मी की टाँगों के बीच बैठ गए। मम्मी

बोलीं- अब ये पैन्टी क्यों उतार रहे हो.. इस साइड में करके कर चाट लो न.. पापा बोले- यार अच्छी तरह गीली नहीं होगी.. उन्होंने पैन्टी खींच दी और अब शायद वो उनकी चूत को चाट रहे थे। ‘ऐ जी.. धीरे-धीरे करो.. विश जग जाएगा..’ मम्मी

के मुँह से बस ‘आह.. अम्म..’ की आवाजें निकाल रही थीं, वो बोलीं- थोड़ा दाना भी रगड़ दो न.. तब मुझे दाने के बारे में नहीं मालूम था.. अब मम्मी पूरे जोश में आ गईं और पापा के सर को अपनी जाँघों से दबा लिया। मम्मी के मुँह से ‘आह..

आह..’ की आवाजें निकल रही थीं, वो अचानक बोलीं- आह.. निकल गया रे.. फिर पापा ने अपने लण्ड को मम्मी की चूत पर सटा लिया और माँ ने अपने दोनों पैरों को पापा की कमर में फंसा लिया और धीरे से बोलीं- चलो.. और पापा धीरे से धक्का

मारने लगे। धीरे-धीरे धक्का मारने से उन्हें मज़ा भी आ रहा था और ये भी लग रहा था कि मैं जागूंगा भी नहीं.. पर उन्हें क्या पता था कि मैं सो नहीं जाग ही रहा था। फिर मम्मी बोलीं- गया क्या पूरा? ‘हाँ..’ ‘आह्ह.. आज कुछ ज्यादा

बड़ा लग रहा है..’ ‘अब मैं थोड़ा तेज़ करूँगा..’ मम्मी बोलीं- नहीं.. तेज़ नहीं.. विश बगल में ही है। पापा बोले- अरे कुछ नहीं.. बहुत चिकनी हो गई है.. तुरंत ही हो जाएगा। पापा ने अब धक्के तेज़ कर दिए.. जिससे मम्मी का शरीर पूरी तरह

हिल रहा था उनकी चूचियां इधर-उधर लुढ़क रही थीं.. उनकी आँखें बंद थीं.. उनके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थीं। पापा बोले- क्यों मज़ा नहीं आ रहा क्या.. लाओ मुझे इन चूचियों का रस पीने दो.. ‘आह्ह.. लो पी लो..’ अब पापा उनकी

चूचियों को पीने लगे। मम्मी बोलीं- आह्ह.. राज.. मैं फिर होने वाली हूँ.. अब कर ही रहे हो तो 5-6 झटके तेज़ तेज से मारो या बाथरूम चलते हैं। पापा बोले- नहीं.. यहीं रुको.. मेरा भी बस होने वाला है। मम्मी- आह्ह.. क्यों जी.. यहाँ कहाँ

निकालोगे.. सब भर जाएगा.. तुमने कंडोम भी नहीं लगाया है.. अब अगर तुम कंडोम नहीं लगाओगे.. तो ये सब करने को नहीं मिलेगा.. मैं पिछले महीने इसी तरह प्रेग्नेंट हो गई थी और मुझे एबॉर्शन करवाना पड़ा था। पापा बोले- ठीक है यार.. अब

कंडोम के बिना नहीं करूँगा। मम्मी बोलीं- नीचे बिस्तर की तरफ छोटी तौलिया है.. ले लो। पापा तौलिया ले आए और बोले- लाओ तुम्हारी चूची ही पी लूं..। फिर वो मम्मी की चूची एक बार फिर पीने लगे। मुझे ‘पुच..पुच..’ की आवाज़ साफ़

सुनाई पड़ रही थी। मम्मी बोलीं- अब बस भी करो.. तौलिया के चक्कर में सारा मजा ख़राब कर दिया..। पापा बोले- बस 20 झटके में अपना और तुम्हारा दोनों का निकलवा दूँगा। पापा ने शायद मम्मी की चूची मुँह में ली और उन्हें हचक कर

चोदने लगे। मम्मी ‘आह.. ओह..’ की आवाज निकाल रही थीं। करीब 20 धक्कों के बाद पापा बोले- तुम्हें कितनी देर लगेगी..? ‘बस दो-तीन झटके और.. आह आह.. आह.. मैं तो गई..’ पापा- मेरी जान आह.. लो.. मेरा भी आ गया..। मम्मी बोलीं- बाहर निकालो..

तौलिया किस लिए दिया है.. उसमें निकालो..। पापा बोले- केवल आज अन्दर निकालने दो अपनी चूत में.. बार-बार निकालने से मजा ख़राब होता है। मम्मी बोलीं- अगर कुछ गड़बड़ हुई तो मैं बताऊँगी। पापा ने सारा माल मम्मी की चूत में निकाल

दिया और कुछ देर मम्मी से चिपक कर लेटे रहे। फिर वो दोनों बाथरूम चले गए और फिर आकर सो गए। मैं भी अपने को भाग्यशाली मान रहा था कि मैंने अपने मम्मी-पापा की चुदाई देखी। मैंने भी उनकी चुदाई को याद करके चुपके से मुठ्ठ

मारी और सो गया। आपको मेरी कहानी कैसी लगी.. जरूर बताना। मेरे पापा-मम्मी की अगली कहानी का इंतजार करें..
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