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सामने वाली खिड़की


दोस्तों ये कहानी आप सेक्सवासना डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

यह मेरी पहली कहानी है. ये बात आज से 1साल पहले की है. उस वक्त मे कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर चुका था. मेरी 5’9″हाईट हे. में तंदूरस्त जवान हूँ मेरा लंड 8″लंबा और बहुत मोटा है. मेरे सामने वाले घर मे एक खूबसूरत आंटी रहती थी. वो 32

साल की थी ,5’4″लंबी और थोड़ी मोटी थी. उसके बोब्स बहुत ही मस्त थे. उसकी साइज़ करीब 34″जितनी थी. उसका फिगर 34-30-36 था. वो बहुत ही सेक्सी दिखती थी. उसका नाम रेखा था उसका घरवाला 40 साल का था. उनके दो बच्चे भी थे. मे ज़्यादातर बाहर

गाँव पढ़ाई करता था इसकी वजह से मेरी उनसे ज़्यादा मुलाकात नही हो पाई थी. लेकिन अब मेरी पढ़ाई खत्म हो चुकी थी इसलिए मे घर पर रहने आया था। जब सुबह मे नहाने के बाद मे अपने रूम मे आया और कपड़े बदलने लगा मेने अपना तोलिया

निकाल दिया और चड्डी पहनने लगा एकदम मेने मेरी खिड़की मे से देखा तो सामने वाली आंटी अपने बरामदे मे खड़ी थी और झाड़ू लगा रही थी. उसकी और मेरी नज़र एक हुई. उसने मुझे अंडरवेयर पहनते हुए देखा मे एकदम शरमा गया और वहा से

दूर हो गया. फिर मैने फटाफट कपड़े पहने और बाहर चला गया. जब मे घर वापस आया तो वो आंटी मेरे घर मे मम्मी के पास बेठी थी. उसने मुझे पुछा राजू कब आया तू.. तू तो बहुत बड़ा हो गया है अब तो… ऐसा कहकर वो हंसने लगी मे फिर शरमा गया और

कुछ नही बोला। फिर दूसरे दिन मे सुबह मे नहाकर निकला और अपने रूम मे कपड़े पहने गया आज मैने पहले खिड़की मे से देखा तो आंटी नज़र नही आई. इसीलिए मे आराम से तोलिया निकाल कर आराम से कपड़े बदलते रहा अचानक सामने वाली

खिड़की मे से आवाज़ आई तो मेरी नज़र उस खिड़की पर पड़ी. मैने देखा तो वो आंटी वहा खड़ी खड़ी मुझे कपड़े बदलते देख रही थी. अब की बार मे नही शरमाया लेकिन मुझे भी मज़ा आया. दूसरे दिन जब मे नहाकर निकला तो मैने जान बूझकर

खिड़की खुली कर दी और सामने देखा तो वो आंटी बरामदे मे नीचे झुक कर झाड़ू लगा रही थी तो उसके बोब्स की दरार बहुत साफ दिख रही थी. अब उसने उपर देखा तो हमारी नज़र एक हुई तो वो मेरे सामने हंस पड़ी तो मेरी भी हिम्मत खुल गई, मैं

भी स्माइल दिया फिर वो वहा खड़ी खड़ी झाड़ू लगाती रही और मुझे देखती रही। फिर मैने भी हिम्मत जुटाकर मेरा तोलिया निकाल दिया और मेरा लंड उसके सामने बता दिया वो ये देख कर एकदम घबरा गई और अंदर भाग गई. मे मन ही मन बहुत

खुश हुआ अब मुझे भी ये सब करना अच्छा लगने लगा. फिर मे अपने मकान की छत पर गया और वहा बेठकर अपनी किताब पढ़ने लगा. एकदम मेरी नज़र सामने वाले मकान के कंपाउंड मे पड़ी . मेने देखा तो वो आंटी कपड़े धो रही थी. वो अपने साडी को

घुटने तक उपर चढ़ा रखी थी उसके पैर बहुत ही सुन्दर और सेक्सी दिख रहे थे. अब मेने पढ़ाई छोड़ कर उसको देखने लगा वो आंटी कपड़े धोते धोते पूरी भीग गयी थी और उसका हाथ जब ऊँचा नीचा होता था तो उसके बोब्स मोहक अदा मे हिल रहे

थे जिसे देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया और धीरे धीरे पूरा 8″लंबा हो गया. आंटी ने कपड़े धोने के बाद वही पर ही नहाने लगी. बाद मे उसने अपनी साडी निकाल दी और पेटीकोट और ब्लाउस पहनकर नहाने लगी नहाते नहाते उसने अपना पेटीकोट

अपनी जाँघ तक उपर कर दिया. मेरी तो आँख फटी की फटी रह गयी मे ज़िंदगी मे पहली बार ये जलवा देख रहा था। मेरा लंड मेरे काबू मे नही रहा अब मे पूरी तरह से आंटी को नंगा देखना चाहता था और ये आशा भी मेरी जल्दी ही पूरी होने

वाली थी. अब आंटी ने धीरे से अपना ब्लाउस भी निकाल दिया और उसे भी धोने लगी. तब मैने उसके बड़े बड़े बोब्स को देखा तो मेरी आँखे बड़ी हो गयी और मुहँ से पानी टपकने लगा वो आंटी बहुत ही सेक्सी दिख रही थी. अब उसने अपने शरीर पर

साबुन लगाना शुरू किया लेकिन ब्रा की वजह से वो आराम से अपने शरीर को साबुन नही लगा पाती थी इसलिए उसने अब ब्रा को भी अपने शरीर पर से उतार फेका. अब मर जाने वाली बारी मेरी थी उसके बोब्स देखकर मेरा तो जी मेरे गले मे अटक

गया. आह.. क्या नज़ारा था आज तक मैने मेरी ज़िंदगी मे इससे अच्छा नज़ारा कभी नही देखा था. अब मेरा लंड मेरे काबू मे नही था वो मेरा पेंट की चैन तोड़कर बाहर आने के लिए उछल रहा था. मैने भी जल्दी ही लंड की इच्छा पूरी की और लंड

को पेंट की चैन खोलकर बाहर खुली हवा मे छोड़ दिया और आंटी को देखकर मुठ मारना चालू कर दिया. अब आंटी नहा चुकी थी वो खड़ी हो गयी और अपना शरीर टावल से पोछने लगी. फिर अंत मे उसने अपना पेटीकोट भी उतार दिया और तुरंत टावल लपेट

दिया लेकिन उसके बीच मे आंटी की चूत की एक ज़लक पा चुका था और मेरी मुठ मारने की स्पीड डबल हो गयी और अंत मे मैने अपना पूरा माल बाहर निकाल दिया। अब मेरे दिमाग़ मे आंटी को चोदने के ही विचार आने लगे. अब मे कोई भी तरीके से

आंटी को चोदने की तैयारी करने लगा. दूसरे ही दिन मैने अपनी पूरी खिड़की खोल दी और आंटी को बरामदे मे आने की राह देखने लगा. जब आंटी बरामदे मे झाड़ू लगाने के लिए आई तो मैने उसे स्माइल दिया और धीरे से मेरा तोलिया निकाल

दिया और मेरे लंड को हवा मे खुला छोड़ दिया. मेरे 8″ लंबे और मोटे लंड को हवा मे लहराता देखकर आंटी का तो होश ही उड़ गया वो मेरे लंड को देखती ही रह गयी. फिर मैने आंटी के सामने लंड को पकड़ कर मुठ मारने का स्टाइल करने लगा.

आंटी शरमा गयी और झट से अपने रूम मे चली गयी और खिड़की मे से मेरा नज़ारा देखने लगी. अब मैने मेरे दो गोली को पीछे खिचकर लंड की पूरी लंबाई आंटी को बताई वो बिना पलक झपकाए मेरे लंबे और तगड़े लंड को आराम से देख रही थी. अब

मैने आंटी को फ्लाइंग किस किया वो कुछ नही बोली. फिर मैने आंटी को अपने बोब्स दिखाने के लिए कहा वो मना कर रही थी. लेकिन मैने बार बार उसे इशारा किया आख़िर उसने अपने ब्लाउस के बटन खोलकर अपने बड़े बड़े बोब्स बाहर निकाले

और मेरे सामने दिखाने लगी. मेरा तो खून बहुत तेज़ी से दोड़ने लगा. फिर मेने उसे अपना पेटीकोट उठाने के लिए कहा पहले तो वो ना.. ना.. कर रही थी लेकिन आख़िर कर मेरी ज़िद के सामने उसने हार मान ली और अपना चनिया उपर उठा लिया. वाह

मेरे तो भाग्य ही खुल गया। मेरे सामने एक मदमस्त चूत मेरे लंड का इंतजार कर रही थी. उस वक्त मेरे घर मे कोई नही था सिर्फ़ मे अकेला ही था तो मैने आंटी को अपने घर मे आने के लिए इशारा किया तो आंटी ने मना कर दिया. फिर मेने

बताया के मेरे घर मे मेरे सिवा और कोई नही हे तब वो बोली मे थोडी देर मे आती हूँ.. अब मेरा लंड बेठने का नाम नही ले रहा था और बेठे भी क्यू ? अब तो उसे चोदने के लिए मदमस्त चूत मिलने वाली थी. फिर थोडी देर मे बेल बजी मे तुरंत

दरवाजा खोला तो सामने वाली आंटी खड़ी थी. वो बड़ा ही मोहक स्माइल कर रही थी और बड़ी सेक्सी अदा मे खड़ी थी वो सुंदर रंग की साडी पहन कर आई थी और हल्का सा मेकउप भी किया हुआ था. मैने तुरंत उसे अंदर बुला लिया और डोर बंद कर

दिया. वो बोली राजू क्या काम है मुझे क्यू यहा बुलाया है? वो जानबुझ कर भोली बन रही थी. मैने भी उसे इसी अदा मे जवाब दिया के आंटी तेरे आम का रस चूसने का बहुत मन हो रहा था इसीलिए तुजे यहा बुलाया है.. ये सुनकर वो मुझे मारने

के लिए मेरे पीछे पड़ी और मे अंदर बेडरूम की और भाग गया तो वो मेरे पीछे आ गयी और मुझे पीछे से पकड़ लिया और बोली क्या बोला मेरे आम के रस चूसना है तो चल जल्दी फटाफट चूसना शुरू कर… ये सुनकर मैने उसे कसकर पकड़ लिया और उसके

रसीले होंठो को चूसना शुरू कर दिया वो भी पीछे हटने वाली नही थी. उसने भी मेरे होंठो को जोरो से चूसने लगी और मेरे मुँह के अंदर अपनी जीभ फिराने लगी इससे मेरे अंदर सेक्स का लवरस बहने लगा. मैने भी उसे कस कर पकड़ लिया और

उसके मदमस्त बोब्स को सहलाने लगा. मैने आंटी को धीरे से बेड पर लिटा दिया और उसके उपर आ गया अब मे उसके होंठो को चूसता रहा और ज़ोर ज़ोर से उसके बोब्स को दबाने भी लगा वो भी ज़बरदस्त मूड मे आ गयी थी और पुरा सहयोग देने लगी

थी. अब मेने धीरे से उसकी साडी निकाल दी. फिर उसका ब्लाउस भी उतार दिया उसने लाल कलर की ब्रा पहनी थी. उसमे से उनके वाइट बोब्स उछल उछल कर बाहर आने के लिए मचल रहे थे. अब मैने भी अपना शर्ट और पेंट उतार फेंका उनका पेटीकोट

उसने खुद ही निकाल दिया और मुझे अपने उपर खींच लिया। अब मे पागलो की तरह उसे चूमने लगा वो भी मुझे एकदम ही चिपक गयी थी मैने उसके होठों को छोड़कर धीरे से उसके कंधे पर से पीठ पर किस करने लगा और पीछे से ब्रा का हुक खोल

दिया तो ब्रा फटाक से उछल कर निकल गयी और उसके मदमस्त बोब्स हवा मे लहराने लगे. मैने एक पल भी गवाए बिना तुरंत अपने मुँह मे बोब्स को लेकर आम की तरह चूसने लगा. अब वो अपने मुहँ से बुरी तरह सिसकारियाँ भर रही थी वो अब बहुत ही

उत्तेजित थी मे बारी बारी दोनो बोब्स को लगातार चूसने लगा वो भी अब अह..आ.आह. राजा ज़ोर ज़ोर से चूसो ये आम तुम्हारे लिए ही हे इस आम को आज तक किसी ने भी तुम्हारी तरह नही चूसे है.. मुझे आज जन्नत का सुख मिल रहा है अहह.. अहह.. और

ज़ोर ज़ोर से चूसो.. मैने भी कहा अरे मेरी प्यारी आंटी अभी जन्नत का सुख तो बाकी है ये तो सिर्फ़ शुरुआत है अभी देखती जाओ आगे आगे होता है क्या… और फिर मैने ज़ोर से उसके पेंटी को फड़कर निकाल दिया और उसकी चूत को अच्छी तरह

से सहलाने लगा. अब तो वो और ज़ोर से मचल पड़ी अहह आआआहहा क्या मज़ा आ रहा है… अरे राजा और जन्नत का सुख दो मुझे बहुत अच्छा लग रहा है.. और ये बोलते बोलते उसने मेरा लंड बाहर निकाल दिया और अपने हाथ मे मसलने लगी. फिर वो लंड को

मुँह मे लेकर चूसने लगी. तो मुझे भी बड़ा मज़ा आने लगा। मे बोला ओ मादरचोद आंटी बहुत मज़ा दे रही हे अब तो में हमेशा तुझे ही चोदुंगा और मज़ा करूंगा… फिर मैने भी उसकी चूत चाटना शुरू कर दिया. अब तो वो मदहोश हो जा रही थी

वो बोली अरे राजा जल्दी अपना लंड मेरी चूत मे डालो अब तो रहा नही जाता चूत का हाल बुरा होता जा रहा है.. में भी पूरे जोश मैं आ गया था. मैने अपना 8″ लंबा और तगड़ा लंड आंटी की चूत पर रख कर पूरे जोश से धक्का मारा तो आंटी दर्द के

मारे चिल्ला उठी अरे मेरे नन्हे शेर ज़रा धीरे से चोदो ये चूत तुम्हारे लंड जितनी बड़ी नही हे.. मैने भी अब धीरे से अपना सुपाड़ा चूत पर रगड़ा और धीरे धीरे अपना लंड आंटी की चूत मे डालने लगा। अब धीरे से पूरा लंड आंटी

की चूत मे डालने के बाद मैने कहा आंटी कैसा लग रहा है वो बोली यार बड़ा मज़ा आ रहा है आज के बाद जब भी मोका मिलेगा तो हम ज़रूर ये खेल खेलेंगे.. अब ज़ोर ज़ोर से तेरी आंटी की चूत की तड़प मिटा दे… अब मे भी जोश मे आ गया था और

दनादन धक्के मारने लगा तो आंटी चिल्ला रही थी अहा..आ.. इतना मज़ा जिंदगी मे पहली बार आ रहा है जल्दी जल्दी मेरे राजा चोदो मेरी प्यासी चूत की प्यास बुझा दो… मेरी चूत की चटनी बना दो बहुत ही आनंद मिल रहा है… मुझे भी स्वर्ग

का सुख मिल रहा था अब में भी फटाफट मेरे लंड को आंटी की चूत की अंदर बाहर कर रहा था वो भी मुझे एकदम चिपक गयी थी. अब मैने मेरा पूरा ज़ोर लगाके उसकी चूत मे वीर्य का फुवारा छोड़ दिया वो भी मेरे साथ झड गयी और उसने भी अपना

पानी छोड़ दिया.. अब हम दोनो बिस्तर मे हाँफते हुये पड़े रहे।
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