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मालकिन का तगड़ा लंड


दोस्तों ये कहानी आप सेक्सवासना डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

संजीव मेहरा सुबह का अखबार पढ़ रहे थे, सामने मेज़ पर गर्म चाय की प्याली रखी हुई थी, व चाय की चुस्की के साथ-साथ अखबार भी पढ़ रहे थे । तभी उनके कानों में आवाज आई- “सर, आपका फोन !” उन्होंने अखबार से नजर उठाई, सामने सफेद

शर्ट, काली पैन्ट में उनका नौकर खड़ा था । “किसका फोन है सोहन?” “सर, सक्सेना सर का फोन है ।” “इस वक्त? इतनी सुबह?… हैलो, हां सक्सेना ! बोलो, इतनी सुबह-सुबह? क्या हो गया भई ?” मेहरा साहब बात करते हुए- “अच्छा अच्छा ! हम्म

! यह कब की बात है? … फिर तुमने क्या किया? … चलो अभी कुछ भी करने की जरुरत नहीं है, मैं आता हूं थोड़ी देर में और जब तक मैं न पहुंचु, तुम लोग कुछ मत करना ! समझे न?” यह कह कर मेहरा साहब ने फोन रख दिया और वहीं मेज़ पर अखबार रखते

हुए उठ खड़ा हुआ और सोहन से पूछा- “मेमसाब कहां हैं?” सोहन ने जवाब दिया- “सर, व मार्निंग-वॉक के लिए गई हैं ।” मेहरा साहब ने कहा- “ठीक है, व आ जाएं तो उन्हें बता देना कि मैं किसी जरूरी काम से जा रहा हूं, लौटने में थोड़ी

देर हो जाएगी । यह कह कर मेहरा साहब अपने कमरे की ओर चले गए और तैयार होने लगे । सोहन ने पूछा- “साहब, नाश्ता लगाऊं?” मेहरा साहब ने जवाब दिया- “नहीं, मैं बाहर ही कर लूंगा, तुम गाड़ी निकलवाओ ।” संजीव मेहरा की पत्नी

अंजलि मेहरा घर लौटती है- “सोहन ! सोहन ! संजीव कहां हैं?” सोहन तेज कदमों के साथ आता है और अदब के साथ खड़ा होकर जवाब देता है- “मैडम, साहब के पास सक्सेना साहब का जरूरी फोन आया था तो वो ऑफिस चले गए हैं ।” “साहब ने कुछ

खाया या नहीं?” अंजलि पुछी । “नहीं मैडम, साहब ने कहा कि व बाहर ही खा लेंगे ।” “अच्छा, ऐसी भी क्या एमरजेंसी थी उन्हें? … साहब से बात करवाना मेरी !” “जी मैडम, अभी फ़ोन लगाता हूं ।” कह कर सोहन ने फोन लगाकर मैडम को दिया

। “संजीव, तुम कहां हो यार? इतनी सुबह ऑफिस में क्या कर रहे हो?” अचानक अंजलि चिन्तित दिखने लगी और कहा- “ठीक है, लेकिन ज्यादा परेशान मत होना तुम ।” अंजलि अपने कमरे में चली गई । अपने कमरे में पहुंचकर उसने सोहन को आवाज

लगाई। सोहन अब अंजलि के कमरे में था । अंजलि ने कहा- “संगीता को बोलो मेरी मालिश की मेज़ तैयार करे, मैं आती हूं अभी कपड़े बदल कर !” सोहन दूसरे कमरे में जाकर संगीता को ये बता दिया जो किचन मेँ काम पर लगी थी । सोहन की

बातें सुनकर संगीता तुरंत सारा सामान लेकर बगल के कमरे मेँ पहुंच गई । थोड़ी देर में वहां अंजलि भी पहुंच गई, उसने गाउन पहन रखा था। सामने मालिश की मेज़ थी और मेज़ के एक तरफ़ तेल और क्रीम की कई शीशियां रखी थी। संगीता

वहीं पास में सिर्फ एक पेटीकोट पहने खड़ी थी, उसकी बडे-बडे उभार खुले थे । गठीला सांवला बदन था, संगीता की उम्र यही कोई 43 की रही होगी । तीन बच्चोँ की मां है फिर भी उसकी बदन काफी कसी हुई थी । लेकिन संगीता की गांड बहुत चौडी

और उभरी हुई थी । उसकी मस्त चुतड देख कर कोई भी मर्द का नियत खराब हो सकता था । अंजलि ने अपने गाउन की नॉट को खोल दिया । उसने सिर्फ काले रंग की पैंटी पहन रखी थी । बहुत ही सेक्सी बदन था अंजलि का । बडी-बडी चुचियां, पतली कमर

और चौडी उभरी चुतड, बदन थोडी सी गदराई हुई थी । इस अधेड उम्र मेँ भी अंजलि ने अपनी शरीर को सुडौल रखा था । अंजलि रोज पुरुषोँ के तरह जिम में कसरत करती थी । जिसकी वजह से अंजलि की जांघ और वाकी अंगोँ के मॅसल्स बढने लगे थे ।

इसिलीए रोज सुबह को जिम के बाद अपनी पुरी बदन की मालिस करवाती थी । फिर अंजलि ने सिर्फ पैँटी मेँ ही वहां से मेज़ की ओर बढ़ गई और बोली- “संगीता, पूरा बदन टूट रहा है ! आज जरा बढ़िया मालिश करना मेरी !” मेरी मालकिन का

कातिलाना जिस्म “जी मैडम… इससे पहले कभी शिकायत का मौका दिया है कभी आपको? आप बिल्कुल बेफिक्र रहें ! एन्ड जस्ट रिलेक्स ।” संगीता हंसती हुई बोली । अंजलि पेट के बल लेट गई..बगल से उसकी चूची साफ झलक रही थी और गोरे जिस्म

पर उसकी काली पैंटी बहुत सेक्सी लग रही थी। गांड काफी चौडी और उभरी हुई थी । संगीता ने अपने हथेली में थोडा ऑलिव-आयल लिया और हल्के-हल्के कंधों की मालिश करने लगी । मालिश करते करते व अंजलि की पीठ पर पहुंच गयी और बडे

प्यार से पूरी पीठ की मालिश करने लगी । मालिश करते करते उसकी उंगलियां बगल से अंजलि की चूचियों को स्पर्श करने लगी । जैसे ही बगल से संगीता ने चूचियों को छुआ, मस्ती से अंजलि की आंखें बंद होने लगी । संगीता समझ गयी थी कि

मैडम अब मस्त हो रही हैं ! व धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ने लगी । अब व अंजलि की कमर की मालिश कर रही थी, कभी कभी उसके हाथ अंजलि की पैंटी की इलास्टिक को भी छू जाते थे । संगीता ने धीरे से मालिश करते करते अंजलि की पैंटी को

थोड़ा नीचे सरका दिया । अब उसकी आंखों के सामने अंजलि की गांड की दरार साफ दिखाई दे रही थी । व गांड की दरारों पर खूब अच्छी तरह से तेल की मालिश करने लगी । संगीता धीरे-धीरे मालीश करते करते अंजलि की गांड की छेद को भी मलने

लगी । अंजलि अब सांसें तेजी से लेने लगी थी। संगीता ने आगे बढ़कर पूछा- “मैडम, आपकी पैंटी खराब हो जाएगी, इसमें तेल लग जाएगा, आप कहें तो उतार दूं पैंटी को?” अंजलि पूरी मस्ती में थी और उसने सिसियाते स्वर में कहा- “हां,

उतार दे !” संगीता ने धीरे से अंजलि की काली पैंटी बड़े प्यार से गांड से अलग कर दी । अब अंजलि पूरी तरह से नंगी लेटी हुई थी । संगीता की बुर मेँ भी खुजली होने लगी । संगीता के हाथ फिर से चलने लगे, वह अब अपने अंगूठे को

अंजलि की गांड के छेद को मसलने लगी । अंजलि एकदम मस्ती में आ गई और पलट गई । अब उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां संगीता की आंखों के सामने थी । अंजलि ने अपनी टांगें भी खोल दी थी और उसकी बुर के जगह एक मोटा तगडा लंड लहरा रहा था ।

हैरानी की बात तो थी, कि अंजलि तो औरत थी फिर उसकी शरीर पर मर्दानी की छाप कैसे? व भी इतना लम्बा मोटा । अंजलि की अधेड नारी शरीर पर हल्के रेशमी झांटोँ से भरी लंड और बडे बडे अंडकोष किसी अजुबे से कम नहीँ था । ये सब लंडन,

अमेरिका और ब्राजिल मेँ आम बात है । वहां पर आप कोई भी मस्तानी हसीनाएं यानि किसीकी पत्नी या फिर मां को देख के अंदाजा लगा नहीँ सकते की व भी किसी मर्द से कम नहीँ है । अब ये फॅन्टासी भारतीय महिलाएं भी ज्यादा से ज्यादा

अपनाने लगीँ है । और क्योँ न हो! दोहरी चोदाई का मजा जो इसमेँ है । और बडे-बडे घराने के औरतेँ इसके शौकीन बनते जा रहे थे । खैर, लेकिन संगीता पर इसका कोई असर नहीँ था । तभी संगीता की नजर अंजलि मैडम की तन रही लंड पर पड़ी ।

संगीता ने अपनी एक हाथ से अंजलि की लंड को पकड़ लिया और उसे सहलाने लगी । अंजलि को भी काफ़ी मजा आ रहा था । “संगीता, इसे उतार दे ! मेरी मालिश के लिए इसका भी इस्तेमाल कर ना ! कितना तगड़ा हो चुका है मेरी लंड । तेरी बुर के

दर्शन तो करा इसे ।” अंजलि ने संगीता की बुर को पेटीकोट के उपर से मसलती हुई बोली । संगीता ने बिना किसी देरी के अपनी पेटीकोट को अपने से अलग कर दिया । अब उसकी गदराई मस्त बदन अंजलि के सामने था । अंजलि उसकी मस्त चुचियां

और बुर को अपने हाथों में लेकर सहलाने लगी । अंजलि थोड़ी देर यूं हीं संगीता की बदन को मसलती हुई मजा लेती रही, और उठ कर संगीता को टेबल पर लिटा दिया । फिर वहीं पास के मेज़ पर रखी शहद की शीशी को लेकर संगीता की चूत के पास

पहुंच गयी । उसने बहुत सारा शहद संगीता की चूत पर टपका दिया । अंजलि ने अपने हाथोँ से संगीता की बुर के झांटें साफ कर रखी थी, ताकि बुर चाटने मेँ मस्ती आ जाए । शहद सीधे चूत की दरार में जाता दिखने लगा । अंजलि वहीं अपनी लंड

को मुठ्ठी मेँ सहलाती हुई पैरों पर झुक गयी और अपनी जीभ से संगीता की बुर के दरार को चाटने लगी । अंजलि को संगीता की चूत का स्वाद काफी अच्छा लग रहा था और संगीता भी पूरी मस्ती में आ चुकी थी । अंजलि अपनी जीभ बुर के छेद मेँ

घुसाने का प्रयास कर रही थी और साथ ही अपनी मूषल लंड को मुठिया रही थी । “चाटो चाटो मैडम ! ऐसे ही चाटो ! बड़ा मजा आ रहा है … वाह, क्या चाटती है आप ! हां हां ! ऐसे ही ! ऐसे ही! और अन्दर तक ! बहुत अच्छा लग रहा है ।” संगीता मस्ती

मे बडबडा रही थी । अंजलि बुर चाटती ही जा रही थी । अचानक संगीता कांपने लगी, उसका बदन झटके खाने लगा और उसने हाथ बढ़ाकर अपनी मालकिन की सर को पकड़ लिया और जोर से अपनी चूत पर दबाने लगी । “मैडम, ऐसे ही चाटो ! मैं झड़ रही

हूं ! हां हां ! चाटती रहो ! रुकना मत ! हां हां ! बड़ा अच्छा लग रहा है !” संगीता उत्तेजना मेँ कराहने लगी और फिर व पूरी तरह से झड़ चुकी थी । अंजलि सारे चुत रस को चाट गई । कुछ देर पडे रहने के बाद संगीता ने अपनी आंखें खोल कर

अपनी मालकिन की तरफ देखा । अंजलि की 10 इंच का लंड लोहे की तरह खड़ा था, संगीता ने उसे बड़े प्यार से अपने हाथ में थाम लिया और हिलाने लगी । संगीता की आंखों में मस्ती साफ दिखने लगी थी । “मैडम, बड़ा प्यारा लंड है आपकी ।”

संगीता लंड के सुपाडी को बाहर निकालते हुए बोली । यह कह कर संगीता ने अंजलि को अपनी ओर खींच लिया और अपने मुंह के करीब ले गई । उसने जबान निकालकर अंजलि की लंड को चाटना शुरु कर दिया । फिर धीरे से पूरा लंड अपने मुंह में ले

लिया और उसे चुसने लगी । अंजलि अपनी उभरी गांड हिलाए जा रही थी और संगीता के मुंह में अपना लंड पेले जा रही थी । “मैडम, आप बहुत अच्छी हैं ! कितना ख्याल रखती हैं हम लोगों की ” संगीता लंड को मुंह से बाहर निकाल कर अंजलि की

और देखते हुए बोली । “अरे पगली ! मैं तुम्हारा ख्याल नहीं रखूंगी तो कौन रखेगा? बता ! देख, मेरी लंड कितना गरम हो चला है ? कितनी झटके ये रहा है यह !” अपनी लंड को संगीता की होँठोँ पर रगडते हुए अंजलि बोली । “जी मैडम, मैं अभी

आपकी लंड से गरमी निकालती हूं । पर मैडम जरा प्यार से ! आपकी लंड काफी बड़ा और मोटा है ।” संगीता अपनी बुर को चिदोर कर लेटते हुए बोली । “तु चिन्ता मत कर संगीता ! मैँ ज्यादा जोर नहीँ लगाउंगी ।” संगीता की चिकनी मोटी

जांघोँ को फैलाते हुए अंजलि बोली । अंजलि संगीता की चूत के पास जाकर अपना लंड उस पर घिसने लगी । पानी से उसकी चूत एकदम लथपथ थी । फिर अंजलि अपनी लंड अपने हाथ में लेकर चूत के छेद पर भिड़ा कर अन्दर डालने लगी और अन्दर-बाहर

करने लगी । संगीता की बुर के कसाव से अंजलि एकदम से मस्ती में आ गई । अब अंजलि ने अपना पूरा लंड बाहर निकाली और उसकी चूत के पास झुककर उसे चाटने लगी । कुछ देर तक चाटने के बाद अंजलि उठी और अपनी लंड संगीता की चूत में फ़िर

से पेल दी । इस बार अंजलि का पूरा का पूरा लंड संगीता की चूत के अन्दर जा चुका था, अब अंजलि अपनी लंड को अन्दर-बाहर करते हुए संगीता को चोदने लगी । “मैडम, काहे तड़पा रही हैं ! जम कर चुदाई करो न ! और जोर से पेलो ! हां हां ! ऐसे

ही … वाह क्या लंड पाई है मैडम आप ने ! इतना बड़ा ! बड़ा मजा आ रहा है ! करो करो ! और जोर से करो न ।” संगीता निचे से गांड उछालते हुए बडबडाने लगी । अंजलि भी अब पूरी रफ़्तार से लंड पेले जा रही थी । संगीता निचे से अंजलि की

चुचियोँ को मुंह मेँ भर कर चुसने लगी और दोनोँ हाथोँ से मैडम की भारी चुतड को अपनी बुर पर दबाने लगी । इससे अंजलि की मुंह से सिसकारीयां निकलने लगी और व जोर से चिल्लाए जा रही थी । तभी अचानक संगीता का बदन काम्पने लगा और व

झड़ गई । अंजलि वैसे ही अपना लंड बुर मेँ पेलती रही, चोदती रही … फ़िर उसने अपना लंड संगीता की बुर से बाहर निकाल लिया । अंजलि की लंड अब भी वैसे ही तन कर खड़ा था । पुरे दस इंच का तगडा लंड था अंजलि का, संगीता की चुत रस से

लपलपा गया था । “संगीता, चल अपना गांड इधर कर, बहुत मस्त गांड है तेरी ! चाट खा जाने को मन करता है ।” अंजलि संगीता की उभरी हुई मस्त चुतडोँ को सहलाते हुए बोली । “मैँने कभी मना किया है आपको मैडम? पर पहले तेल लगा लेना

अच्छी तरीके से और धीरे धीरे घुसाना ! आपका बहुत बड़ा मूसल जैसे लंड है ।” “तु बस देखती जा !” कह कर अंजलि ने संगीता को बांई और लेट जाने को कहा और व भी उसिके पिछे उसी पोजिसन पे लेट कर अपनी लंड को संगीता की गांड के दरार

मेँ रगडने लगी । तभी अंजलि ने अपने दांए हाथ के एक उंगली को संगीता के मुंह मेँ घुसा दिया, संगीता उंगली को चाट चाट कर गिला कर दिया । अब अंजलि गिले उंगली को मुंह से सिधे संगीता की गांड के छेद मेँ अंदर पेल कर घुमाने लगी ।
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