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रोशन लाल ने मस्ती से ठोका


दोस्तों ये कहानी आप सेक्सवासना डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

हैल्लो दोस्तों, मेरी उम्र 22 साल है और में दिल्ली से मेडिकल की एक स्टूडेंट हूँ और मेरा यह आखरी साल चल रहा है, मेरा नाम इशिका है और में पंजाब कि रहने वाली हूँ। वैसे मेरे पापा पंजाबी है और मेरी माँ हिमाचली और हम लोग अभी

दिल्ली में ही रहते है। दोस्तों मेरी नाक पतली है और मेरे होंठ एकदम गुलाबी है, मेरे गाल भरे हुए है और वो भी गुलाबी है इसलिए शायद सबको मेरे गाल खींचना बड़ा पसंद है। दोस्तों कई नई घटनाए मेरे साथ हो चुके है और में अब

खुद ही चुदाई में इतनी मस्त रहने लगी हूँ कि अपना घर वगेरह भूलकर बस अपनी चुदाई पर निकल पड़ती हूँ। दोस्तों यह बात करीब एक महीने पहले की है और अब तक में अपने आस पास के कई लोगों से चुदकर रिश्ते बना चुकी थी। दोस्तों दो

महीने पहले मैंने एक साईट पर आईडी बनाई थी जिसमे मैंने मोटे और बड़े लंड वाले लोगों को चुदाई के लिए बुलाया और मुझे बहुत सारे जवाब भी आए। अब मेरा सबके साथ जाकर मिलना तो बहुत मुश्किल था तो मैंने सोचा कि मिलना रहने देते

है और सीधे काम की बात पर आते है जिससे में कम से कम समय में ज़्यादा लंड को चख सकती हूँ और उनमे से एक थे मिस्टर रोशन लाल चौधरी। फिर गुरुवार रात को मैंने रोशन लाल जी जो कि करीब 53 साल के एक अंकल थे उन्हे फोन लगाकर अपना

प्लान फिक्स कर लिया और मैंने उन्हे कभी देखा नहीं था, बस उनके गोरे लंड की फोटो देखी थी जिसे देखकर मेरी चूत में सुनामी आ जाता था। फिर मैंने अपने हॉस्टल के गेस्ट ब्लॉक में उनके लिए एक रूम तीन दिन के लिए बुक करवा लिया

और मैंने रजिस्टर में उन्हे अपना ताऊजी बताया और वो शनिवार को सुबह आने वाले थे। फिर मैंने शुक्रवार शाम को ही एक कामवाली बाई को ले जाकर रूम को अच्छी तरह से साफ करवाया और फिर में अपने रूम पर आ गई और बहुत बेसब्री से

शनिवार का इंतजार करने लगी और रात को इसी बैचेनी की वजह से मुझे नींद भी नहीं आई और दो बार मेरी चूत लंड लेने के लिए उफन पड़ी थी और लंड के बारे में सोचकर झड़ चुकी थी, मुझे बिल्कुल भी नहीं पता कि मेरी कब आँख लगी। फिर जब में

उठी तो सुबह के 9 बज गये थे और मेरी सभी साथी कॉलेज जा चुकी थी और अब मैंने रोशन लाल जी को फोन लगाया तो उन्होंने मुझे बताया कि वो थोड़ा लेट आएँगे और करीब शाम के पांच बजे तक पहुंच जाएँगे। फिर में थोड़ा नाराज़ हुई, लेकिन अब

में इससे ज्यादा क्या करती? मुझे मानना ही पड़ा और फिर शाम होते होते मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे कई सदियाँ हो चुकी हो। फिर शाम को करीब 5:20 पर उनका फोन आया और उन्होंने कहा कि वो हॉस्टल के बाहर खड़े हुए है और मुझे उन्हे

लेकर आना पड़ेगा और अब मेरे मन में एक अजीब सा डर था और चुदाई की बहुत ख़ुशी भी। मेरे पेट में अब तितलियाँ उड़ रही थी और में तैयार होकर ही बैठी थी। अब में हॉस्टल के दरवाजे पर पहुँची तो मुझे वहां पर कोई नहीं मिला और फिर

मैंने इधर उधर देखा तो दो चार लोग आसपास खड़े हुए थे और वो गार्ड भी मुझे घूरे जा रहा था। में : हैल्लो भैया क्या यहाँ कोई अंकल तो नहीं आए थे ना? गार्ड भैया : नहीं मेडम यहाँ कोई नहीं आया। में : ठीक, बताने के लिए बहुत

धन्यवाद। में थोड़ा आगे चली गयी और रोशन लाल जी को फोन किया.. में : हैल्लो अंकल आप कहाँ हो? रोशन लाल : इशिका में हॉस्टल के दरवाजे पर खड़ा हुआ हूँ और में तुम्हे बहुत अच्छी तरह से साफ साफ देख पा रहा हूँ तुम तो बड़ी सुंदर

दिखती हो। में : धन्यवाद अंकल, लेकिन आप हो कहाँ और आपने क्या पहना है जिससे में आपको पहचान सकूं? फिर इतने में मुझे अपनी तरफ एक पतले से बुड्ढे अंकल आते हुए दिखाई दिए और में उन्हें देखकर समझ गई कि यही रोशन लाल जी है।

दोस्तों मेरा मन तो उन्हें देखते ही पूरा खट्टा ही हो गया था क्योंकि वो बहुत दुबले पतले से और कमज़ोर से दिख रहे थे। दोस्तों अब मुझे उन्हें देखकर थोड़ी शर्म भी आ रही थी कि में किसी को क्या कहूँगी कि यह मेरे ताऊजी है

और फिर में थोड़ा आगे चली गयी। में : नमस्ते, क्या आप ही रोशन लाल जी है? रोशन लाल : हाँ इशिका, में ही हूँ तुम तो बड़ी मस्त हो। अब उन्होंने मुझे ऊपर से नीचे पूरा देखा जैसे कि में लड़की नहीं कोई खाने का पकवान हूँ। में

थोड़ा मायूस, उदास थी। मैंने उनको अपने साथ आने के लिए कहा और फिर में उन्हे हॉस्टल से थोड़ा दूर ले गई। फिर हम बाजार पहुँचे और वहां पर हम लोगों ने जूस पिया और खाना खाया, क्योंकि आज की रात मैंने चुदाई का प्रोग्राम बनाया

था। फिर में मेडिकल की दुकान पर गयी और बड़ा वाला कंडोम खरीद लाई, वहां पर सभी लोग मुझे ऐसे देख रहे थे जैसे मैंने कोई बहुत ग़लत काम किया हो। फिर में अंकल के पास आ गई और हम लोग हॉस्टल आ गये। में उन्हे उनके रूम पर लेकर गई और

उनके मुहं हाथ धोने तक में वहीं बेड पर बैठी थी, वो अंडरवियर और बनियान में मुहं हाथ धो रहे थे और बाथरूम भी रूम से बिल्कुल जुड़ा ही था। दोस्तों मैंने उनके लिए एक ए.सी रूम बुक करवाया था और वहां पर बेड भी बहुत मुलायम था

इसलिए मैंने अपने कपड़े उतार दिए और सिर्फ़ काली कलर की ब्रा और काली कलर की पेंटी में बेड पर उल्टी लेटी हुई थी और में पैर ऊपर करके अपने फोन पर मैसेज करने लगी, लेकिन मेरी आखें बाथरूम पर ही टिकी हुई थी। फिर कुछ देर बाद

रोशन लाल जी बाथरूम से बाहर आए वो टावल से मुहं साफ करते हुए बाहर आए और जैसे ही मुझे वहां पर लेटा हुआ देखा तो वो एकदम से खिल गये। मैंने उन्हे सेक्सी स्माइल दी और उंगली से इशारा करके पास बुलाया, तो उन्होंने जल्दी से

हाथ मुहं टावल से साफ किए और मेरे करीब आकर मेरे गोरे गोल चूतड़ को आटे की तरह गूंधने लगे और मुझे किस करने लगे। अब में उठकर बैठ गई जैसे लोग नमाज़ पढ़ते है और उस पोज़ में और उन्हे प्यार से देखने लगी और में उन्हे किस नहीं

करना चाहती थी, लेकिन जैसे ही उनका लंड मुझे याद आया में अपने आपको रोक नहीं पाई और उन्हे लंबा किस करने लगी, लेकिन उन्हे ढंग से किस करना नहीं आ रहा था और लग रहा था कि वो मुझे खाना चाहते है। फिर मैंने उन्हे इशारे से रोका

और धीरे धीरे किस करना शुरू किया। मुझे उन्हे किस करने में बहुत मज़ा आ रहा था और उनके दोनों हाथ मेरे कूल्हों को लगातार मसलने में व्यस्त थे। अब मैंने उनका एक हाथ अपने बूब्स पर लाकर रखा और लगातार किस करती रही, वो अब एक

हाथ से मेरे एक बूब्स को और दूसरे हाथ से मेरे चूतड़ को मसल रहे थे। उन्होंने मेरी ब्रा का हुक खोल दिया था और मेरे दोनों बूब्स को देखकर खुश हो उठे और मेरी तारीफ करने लगे। रोशन लाल : वाह इशिका तेरे बूब्स तो ग़ज़ब ढा रहे

है, ऐसे बूब्स मैंने आज तक कभी नहीं देखे। में : क्या अब इन्हें चखकर नहीं देखोगे अंकल, यह जितना दिखते है उससे भी ज़्यादा स्वादिष्ट है। फिर मेरे इतना कहते ही अंकल बहुत ज़ोर ज़ोर से एक एक बूब्स को बारी बारी से चूसने

लगे और मेरी सिसकियाँ निकल रही थी। मेरी चूत तो गीली हुई पड़ी थी और इतना पानी छोड़ चुकी थी कि मुझे टेंशन हो रही थी कि कहीं चूत पूरी खाली ना हो जाए। मुझे उनके काटने और ज़ोर से मसलने पर भी मज़ा आ रहा था और में उनके गंजे

सर पर किस कर रही थी और उनका सर अपनी छाती पर दबा रही थी। मुझे अब उनका गंजा सर भी बहुत सेक्सी लग रहा था और में उसे अपनी जीभ से चाट रही थी। रोशन लाल : तुम यह क्या कर रही हो? हाँ करती रह, मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है। में :

अह्ह्ह उम्म्म्म अंकल अब तो मुझे आपका सर भी बहुत सेक्सी लग रहा है। अंकल का जब मेरे बूब्स से जी भर गया तो उन्होंने मुझे बेड पर हल्के से धकेला और मेरी भीगी हुई जूस से सराबोर पेंटी को उतार दिया और अब वो उसे सूंघने लगे

और पेंटी पर किस करने लगे। उनके चेहरे पर मेरा जूस लग गया था और वो देखकर मुझे हंसी आ रही थी। दोस्तों ये कहानी आप सेक्सवासना डॉट कॉम पर पड़ रहे है। फिर अंकल भी हंसकर मेरी चूत पर हल्के हल्के हाथ घुमाने लगे, जैसे कि किसी

बिल्ली को प्यार कर रहे हो और अपनी जीभ से धीरे धीरे सहलाने लगे, उनके दो मिनट मेरी चूत पर जीभ से सहलाने पर ही मेरा जूस फूट पड़ा और उनके चेहरे पर और गर्दन पर गिर पड़ा। मुझे लगा जैसे कि में जन्नत में आ गई हूँ एम्म्म

अह्ह्ह्हह सस्स वाह वो क्या अहसास था? मैंने उनका चेहरा अपनी चूत पर दबा दिया और ज़ोर ज़ोर से रगड़ने लगी। अंकल को भी मज़ा आ रहा था और वो भी मेरी चूत में अपनी जीभ को फंसाए हुये अपना मुहं बहुत ज़ोर से रगड़ने लगे। अब मेरे

मुहं से सिसकी निकल गई, लेकिन अंकल बंद होने का नाम नहीं ले रहे थे और में लगातार खिलखिला रही थी और थोड़ी ही देर में दूसरी बार मेरी चूत गीली हो गई। दोस्तों में बहुत बड़ी चुदक्कड़ हूँ और जब मेरी चूत से जूस निकलता है तो

बहुत ज्यादा मात्रा में निकलता है जिसकी वजह से बेडशीट चिपचिपी और गीली हो गयी थी। फिर हमने उस बेडशीट को उतारकर फेंक दिया और वापस एक दूसरे को बाहों में लपेटे बेड पर पड़े रहे, अंकल ने अंडरवियर में से अपना लंड बाहर

निकाला और हिलाते हुए मेरे पास आए। में एकदम सीधी लेटी हुई थी और अंकल घुटनों पर बैठे हुए मेरे सर के पास में आ गये और अपने पैरों को फैलाकर मेरे मुहं की तरफ अपनी कमर को झुकाकर अपना लंड हिलाते रहे और अब उन्होंने मेरे

मुहं पर हल्के हल्के लंड से थप्पड़ लगाना शुरू किया। में : आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह उह्ह्ह प्लीज अंकल, मुझे लग रही है। रोहनलाल : शैतान लड़की सज़ा तो तुझे जरुर मिलेगी, तू बहुत शरारत करती है बिगड़ी लड़की। में : अह्ह्ह अगर

आपको सज़ा ही देनी है तो जो नीचे है उस को दो ना। रोशन लाल : हाँ उस चूत को भी मिलेगी और गांड को भी मिलेगी, लेकिन अभी फिलहाल तो तेरे प्यारे मुहं की बारी है, यह मुहं बहुत लंड खा चुका है। में : नहीं, मेरे मुहं ने बहुत लंड

नहीं लिए, फिलहाल तो में आपका ही ले रही हूँ। रोशन लाल : इशिका तू इतना अच्छा लंड कैसे चूस लेती है? में : (मुस्कुराकर बोली) लंड को चूसना लंड के ऊपर ही निर्भर करता है और इतना अच्छा लंड अगर सामने हो तो चूसना अपने आप ही आ

जाता है। अब अंकल ने अपने लंड से हल्के हल्के से थप्पड़ लगा लगाकर मेरे गाल लाल कर दिए थे और जैसे ही में लंड के थप्पड़ से बचने के लिए उसे चूसने के लिए ऊपर की तरफ मुहं करती तो वो ज़ोर से थप्पड़ लगा देते। में : प्लीज़ बस

करो ना अंकल, इतने भारी लंड से मुझे चोट लग रही है। फिर अंकल ने मेरे प्यारे से मुहं में अपना आधा खड़ा लंड का टोपा ठूंस दिया और उन्होंने अपने दोनों पैर मेरे सर के इधर उधर रखे और मेरे दोनों बूब्स पर बैठ गये जैसे में कोई

कुर्सी हूँ और अब उनका लंड मेरे मुहं में था और धीरे धीरे खड़ा हो रहा था। उन्होंने मेरी चोटी पकड़ी और मेरे सर को पीछे से पकड़कर अपने लंड पर ऊपर नीचे करने लगे। एक मिनट के बाद ही मैंने उन्हे रोक दिया क्योंकि अब मुझे

चक्कर आने लगे थे और अब अंकल का लंड पूरा खड़ा हो चुका था जिसकी वजह से मुझे उस पर बड़ा प्यार आ रहा था। मेरा तो मन कर रहा था कि चूस लूँ, लेकिन मेरी चूत को भी प्यार की ज़रूरत थी। फिर अंकल को मैंने कंडोम दे दिया, लेकिन

उन्होंने लगाने से मना किया और मुझसे कहा कि तुम मेरा भरोसा करो, में तुम्हे गर्भवती नहीं करूँगा। फिर मेरे बहुत बार कहने पर उन्होंने कंडोम पहना अंकल ने मुझसे लंड पर बहुत सारा थूक लगाकर चिकना करने को कहा तो मैंने लंड

को बहुत चिकना बना दिया और लेट गई। मैंने अपनी आखों को बंद कर लिया और अंकल एक हाथ से मेरा एक बूब्स दबाने लगे थे और दूसरे से अपना लंड मेरी चूत पर रखकर धीरे धीरे अंदर सरकाने लगे। फिर मैंने महसूस किया कि उनका लंड मेरी

चूत के अंदर तो बड़े आराम से फिसलता हुआ जाने लगा था, लेकिन मेरी हालत बहुत खराब हो रही थी और मुझे बहुत दर्द हो रहा था। में बार बार अपनी चूत को टाईट कर रही थी। फिर करीब दस मिनट तक अंकल ने अपने लंड का टोपा धीरे धीरे अंदर

बाहर किया और फिर उन्होंने लंड को और अंदर सरकाया और धीरे धीरे अपना आधा लंड अंदर डाल दिया। अब मज़ा आने लगा था और में मस्ती में आकर इतरा रही थी और बहुत ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ भर रही थी। अंकल ने इस बीच ताक़त लगाकर धीरे से

पूरा लंड मेरी चूत में सरका दिया और मुझे बहुत तेज़ दर्द हुआ। जैसे ही उनका टोपा मेरी चूत की छत पर टकराया तो मैंने उन्हे पीछे धकेल दिया। मेरी चूत टाईट हो गयी थी जिसकी वजह से उनका लंड मेरी चूत में फंसा का फंसा रह गया।

फिर दो मिनट रुकने के बाद उन्होंने और आहिस्ता से फिर से लंड को अंदर डाला और बहुत बार कोशिश करने के बाद मुझे कुछ सही लगने लगा। करीब दस मिनट तक धीरे धीरे धक्के देकर चोदने के बाद में भी पूरी तरह मस्ती में आ गयी और अपनी

चूत को उनके लंड पर धकेलकर उनके हर झटके का जवाब दे रही थी जिसकी वजह से मेरी चूत और उनका गधे जैसा लंड आपस में मैच खेल रहे थे। अब में बहुत हैरान थी कि उनका झड़ना नहीं हो रहा था और वो बहुत देर तक टिक गये थे, लेकिन में मस्ती

में अपनी चूत को मज़े दिलवा रही थी। अब उन्होंने मेरी कमर पकड़कर मुझे उठाया और पैर घुमाकर बिस्तर पर ही बैठ गये। अब में उनकी तरफ अपना चेहरा किए उनकी गोद में बैठी हुई थी और उनका लंड मेरी चूत में गहरा फंसा हुआ था। वो

मेरे बूब्स को चूस रहे थे और में उछल उछलकर उनका लंड ले रही थी। फिर करीब पांच मिनट में उनके लंबे खंबे पर उछल उछलकर में थक गई थी। अब उन्होंने मुझे कुतिया बनाया और मेरी चूत में लंड घुसेड़ दिया और मेरी कमर पकड़कर मेरे

कूल्हों को अपने लंड पर पीछे की तरफ खींच रहे थे और उनके मोटे तगड़े लंड की रगड़ से मेरी चूत तो खुश थी ही और मुझे भी बड़ा मज़ा आ रहा था। मेरा तो मन कर रहा था कि में सारी उम्र इसी लंड से चुदवाती रहूँ। फिर मैंने अंकल से कहा

कि प्लीज़ जब आपका लंड झड़ने वाला हो तो प्लीज वीर्य को मेरे मुहं में निकाल देना, चूत में नहीं। फिर रोशन लाल जी अब मुझे बहुत तेज़ी से धक्के देकर चोद रहे थे और मेरे कूल्हों पर बहुत ज़ोर से थप्पड़ मार रहे थे। मेरे मुहं से

आईईईई उह्ह्ह्हह्ह्ह्ह प्लीज थोड़ा आराम से करो निकल रही थी। फिर वो करीब दो मिनट तक मुझे बहुत तेज़ी से चोदते रहे, लेकिन फिर भी उनका वीर्य निकल ही नहीं रहा था। फिर उन्होंने मेरी चोटी पकड़ी और एक हाथ से मेरे कूल्हों पर

थप्पड़ मारते रहे जिसकी वजह से मेरी गांड एकदम लाल हो गई थी और मैंने जब पीछे की और देखा तो उस पर कुछ निशान भी थे और अब उन्होंने मेरी चोटी को कसकर खींचा और मेरे कूल्हों को कसकर दबोच लिया और फुल स्पीड से चोदते रहे। उनका

गरम वीर्य मेरी चूत में मुझे महसूस हो रहा था और में झटके से आगे की तरफ उछली और जब मैंने पीछे देखा तो उनके लंड पर फटा हुआ कंडोम लटका हुआ था। फिर मैंने अपनी चूत पर हाथ लगाकर देखा तो मुझे उनका वीर्य मिला। मैंने उनसे

कहा कि मैंने आपसे कहा था ना मेरे मुहं में डालना, में बहुत नाराज़ हो रही थी, लेकिन फिर उन्होंने कहा कि ग़लती हो गई और में अब ऐसा नहीं करूँगा और मैंने जब घड़ी देखी तो 9.30 बज रहे थे। में जल्दी से उनके बाथरूम में ही नहा धोकर

और कपड़े पहनकर गर्ल्स हॉस्टल चली आई। दोस्तों हॉस्टल में सबको रात को हाजरी रजिस्टर में साईन करने होते है। में दस बजे पहुँची और अपने बेड पर लेट गई। अब मैंने महसूस किया कि मेरी चूत में हल्की हल्की सी जलन हो रही थी और

बहुत दर्द भी हो रहा था, लेकिन उससे कहीं ज़्यादा मज़ा भी आया था और में अगले दिन मेरी होने वाली चुदाई के बारे में सोचकर बड़ी खुश थी और इतनी जबरदस्त चुदाई के बाद में गहरी नींद में डूब गयी। दोस्तों आगे दो दिन तक रोशन

लाल जी ने मुझे बहुत जमकर चोदा और उन्होंने अपने लंड से चोद चोदकर मेरा कोई भी छेद सलामत नहीं छोड़ा, लेकिन मुझे रोशन लाल जी का लंड बहुत पसंद आया इसलिए दो दिन तक उन्
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