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लंड डलवा कर सो जाती हु


दोस्तों ये कहानी आप सेक्सवासना डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

मेरी उम्र लगभग ३८ साल की है. मेरे पति ने मुझे आज से १२ साल पहले तलाक दे दिया था. उनका मेरे साथ आरम्भ से ही नहीं जमा था. हकीकत यह थी कि मैं अत्यधिक सुन्दर थी जब कि वे बहुत साधारण चेहरे वाले. यही बात आगे तलाक में बढ़ गई.

मैंने पी एच डी की हुई थी इसलिए तलाक के बाद मैंने एक छोटे से शहर में कॉलेज में पढ़ाना शुरू किया. मैं एम् ए फाइनल में एक दिन पढ़ा रही थी कि मैंने एक नया लड़का देखा. पूछने पर उसने बताया कि उसका नया एडमिशन हुआ है. वो दिखने

में बेहद सुन्दर और गठीला लग रहा था. ना जाने क्यूँ पहली नजर में ही मुझे वो भा गया. लेकिन अपनी उमर का ख़याल कर मैंने अपना विचार बदल दिया. एक दिन वो स्टाफ रूम में मुझ से कुछ पूछने आया. मैंने उसे समझा दिया. उसने मुझे कह कि

मैं बहुत अच्छी तरह से पढ़ाती हूँ. उसी तरह एक बार वो एक छुट्टी के दिन कोई सवाल पूछने मेरे घर चला आया. मैंने उसे फिर समझा दिया. उसने टेबल पर मेरी मेरे पति के साथ तस्वीर देखी और उसके बारे में पूछा. मैंने उसे विस्तार

सारी बात कह दी. वो एकदम उदास हो गया. उसकी आँखें भर आई. इसके बाद वो अक्सर मुझसे मिलता और मेरे साथ पढ़ाई के साथ साथ दूसरी बातें करता. मुझे यह लगने लगा कि वो मुझे खुश रकने का प्रयास कर रहा है. इस तरह से वो मेरे काफी करीब

हो गया. रविवार का दिन था. सवेरे से ही तेज बारिश हो रही थी. मैं बालकनी में खड़ी थी. तभी मैंने देखा कि वो अणि साइकिल को तेज चलता मेरे घर के तरफ ही आ रहा है. मैंने दरवाजा खोल दिया वो अन्दर आया. पूरी तरह से भीगा हुआ था. उसने

एक थैली निकाली और बोला ” मैडम मैं गरमा गरम पकौड़े ले आया हूँ आपके लिए.” मैंने उसकी तरफ देखा. उसका चेहरा ख़ुशी से दमक रहा था. मैंने वो पकौड़े ले ले लिए. मैंने उसे कहा ” तुम भीग चुके हो. कपडे बदल लो. ऐसी बारिश में भीगने

से बीमार भी पड़ सकते हो.” उसने मेरे कहते ही अपना शर्ट उतार दिया. मैंने उसे तौलिया दे दिया. उसने अपना बनियान भी खोल दिया. उसका चौड़ा सीना मुझे ललचाने लगा. मुझे लगा जैसे बरसों बाद उझ्मे कोई चाहत जागी है. लेकिन उमर का

अंतर देखा मैं कुछ ना कर सकती थी. पटा नहीं क्या हुआ ; मुझे लगा जैसे उसने मेरी मन:स्थिति को भांप लिया हो. वो अपने नंगे बदन पर टिया लपेटे मेरे साथ पकौड़े खा रहा था. उसने अचानक मुझ से कहा ” मैडम; आप अपने आप को कभी अकेला मत

समझो. मैं आपके साथ हर मुसीबत में खडा रहूंगा. आप बेहिचक कोई भी काम हो कह देना. मैं ना नहीं कहूंगा.” मुझे लगा जैसे मुझे फिर से कोई साथी मिल गया है. उसकी और मेरी उम्र में करीब बीस साल का अंतर था. लेकिन वो मुझ से मेरे हिसाब

से बातें कर रहा था. उस दिन तो वो चला गया इन में मन में एक खलबली मच गई. अब वो मुझ से कॉलेज में हर दिन अलग से मिलने लगा. हम दोनों एक दूसरे का हाल चाल पूछते. मैं कभी उसे स्टाफ रूम में चाय पर बुला लेती. धीरे धीरे वो एक दोस्त

बनता चला गया. मैं उसे एक हमदर्द समझने लगी थी. वो मुझे देखता तो ऐसा लगता जैसे वो कुछ और भी कहना चाहता है, वक्त युहीं गुजरता गया औए हमारी दोस्ती चार महीने पुरानी हो गई. सर्दीयाँ आ गई थी..कॉलेज के छात्र-छात्राएं कम आने

लगे. सभी सर्दी का बहाना कर देते. इसी सर्दी के मौसम ने मुझे अपना शिकार बना लिया. मुझे बुखार आ गया. जब मैं दो दिन कॉलेज नहीं जा पाई तो वो एक दिन दोपहर को कॉलेज से सीधे मेरे घर आ गया. मैं उस वक्त सोई हुई थी. थोड़े से झटके से

दरवाजे की कुण्डी खुल गई और वो अन्दर आ गया. मैं घर में अक्सर एक गाउन पहना करती हूँ सर्दीयों में. उस वक्त भी मैंने गाउन पहना हुआ था. गहरी नींद की वजह से चद्दर नीचे गिर गई थी. मेरे गाउन का लेस खुला हुआ था और मेरा सीना

गाउन में से बाहर दिख रहा था. वो उसकी आहट से मेरी नींद खुल गई लेकिन अधखुली आँखों से मैंने उसे आते और मेरे सामने बैठते हुए देख लिया.वो मेरे सामने आकर बैठ गया. उसने मुझे काफी देर तक ऐसे ही निहारा. मेरा दिल अब थोडा

घबराने लगा. वो अब पलंग पर बैठ गया. मैंने देखा कि उसकी नजरें मेरे सीने पर है. उसने अचानक अपना सर झुकाया और धीरे से सीने के खुले हुए भाग को यानि कि मेरे दोनों स्तनों के बीच की रेखा को अपने होंठों से चूम लिया. मेरा बदन

तड़प उठा. करीब बीस साल से भी ज्यादा समय के बाद किसी मर्द ने मुझे ऐसे चूमा था. मैं कोई विरोध ना कर सकी. उसने अब मेरी खुली आँखें देख ली. वो मुस्कुराया और मेरे बाएं गाल को चूम लिया. मैं अचानक मुस्कारा पड़ी. उसने अब मेरे

दायें गाल को चूम लिया. मैंने अपने बदन में दौड़ रहे करंट के चलते उसे अपनी ऑर खींचा और बाँहों में भर लिया. अब वो मेरे सीने पर अपना सर रखे मेरी आँखों में देख रहा था. मैंने उसके बाल बिखेर दिए. आप लोग यह कहानी सेक्सवासना

डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | वो मुस्कुराया और मेरे दायें गाल को चूम लिया. मुझे अच्छा लगता देख अब उसने मेरे बाएं गाल को भी चूम लिया. मैंने उसे अब फिर बाहों में भर लिया.उसने अब मेरे गाउन के लेस को पूरा खोल दिया. मैंने अन्दर

ब्रा नहीं पहनी थी. वो मेरे सीने को देखने लगा. मेरी बढ़ती धड़कने मेरे स्तन को ऊपर नीचे कर रही थी. वो मेरे स्तनों को चूमने लगा. अब वो स्तनों को चूमते चूमते मेरे करीब आकर मुझसे चिपक कर लेट गया. मैं भी उसे चूमने लगी. धीरे

धीरे हम दोनों जोश में आने लगे. उसने पास के स्टूल से तेल कि शीशी उठा ली और मेरे स्तनों की मालिश करने लगा. उसने उस शीशी का सारा तेल मेरे जिस्म के ऊपर उंडेल दिया और दोनों हाथों से मालिश कर कर के मेरे जिस्म के हर हिस्से

को फिसलन वाला बना दिया.अब उसने मेरी पैंटी और खुद की अंडर वेअर खोल दी. अब हम दोनों पूरी तरह से नंगे हो चुके थे. मैंने अब उसे कसकर पकड़ा और उसकी पीठ के नीचे के हिस्से को अपनी जाँघों के बीच में जकड लिया..उसने भी मुझे अपनी

बाहों में ले लिया. उसने फिर अपने लिंग को धीरे धीरे मेरे गुप्तांग और जननांग के सा पास ले जाकर मालिश सी करने लगा. मुझे बहुत अच्छा लगा. जब उसका लिंग एकदम कड़क ; सीधा और लंबा हो गया तो उसने मेरे जननांग में एक जोर के झटके

से घुसा दिया. मेरे मुंह से जोर की एक चीख निकल गई. उसने अपने होंठों से मेरे होंठ सीकर मेरी आवाज को दबा दिया. अब उसका लिंग मेरे जननांग में यहाँ वहां घूमने लगा. मुझे बहुत ही मजा आने लगा था. आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट

नेट पर पढ़ रहे है | उसने करीब आधे घंटे तक अपने लिंग को मेरे जननांग में फंसाए रखा. फिर अचानक उसके लिंग ने मलाईदार पिचकारी मेरे जननांग में मार दी. मेरा जननंग उस मलाई से पूरी तरह से भर गया. मैं अखंड आनंद में पहुँच गई थी.

मैं उसके होंठों को जोर से चूम लिया. हम दोनों थक गए थे. उसका मेरे अन्दर ही रह गया और हम दोनों सो गए. करीब एक घन्टे के बाद हमारी आँख खुली. उसने एक बड़ी मिल्क चोकलेट निकाली और अपने मुंह में दबा ली. उसका दूसरा हिस्सा मेरे

मुंह में दे दिया. हम दोनों ही ने वो चोकलेट खाई. हमारा पूरा मुंह उस चोकलेट से भर गया. मिल्क चोकलेट हमारे मुंह में लार के मिल कर घुल गई. अब उसने मेरे होंठों पर चोकलेट का रस छोड़ा और उसे अपनी जीभ से वापस चाट लिया. मैंने

भी ऐसा ही किया. धीरे धीरे चोकलेट हम दोनों के मुंह से निकलकर हमारे मुंह के ऊपर फ़ैल गया.अब हम अपनी जीभ और होंठों से उस चोकलेट को वापस अपने मुंह में लेने लगे. इससे उत्तेजना और बढ़ गई. उसका लिंग एक बार फिर कड़क लंबा और

सीधा हो गया उसने फिर से लिंग को मेरे गीले हुए जननांग में चारों तरफ घुमाना शुरू किया. चोकलेट का असर हमें और भी जोश दिला रहा था. उसका मीठापन हमें मदहोश किये जा रहा था. मैंने उसे अपने लिंग को मेरे जननांग में से थोड़ी

थोड़ी देर से बाहर निकालकर फिर अन्दर डालने के लिए कहा. उसने ऐसा ही किया. इससे इस बार उसका लिंग करीब पौन घंटे तक मेरे अन्दर बाहर होता रहा. मैंने अपने मुंह से चोकलेट की मलाई उसके होंठों पर छोड़ छोड़कर चूसती रही और उसे

नशे में रखती रही. आखिर में उसका लिंग दूसरी बार जवाब दे गया और उसके लिंग से एक बार फिर गाढ़ी मलाई निकली और र्मेरे जननांग के अन्दर हर जगह फ़ैल गई. एक बार फिर मैंने उसके होंठों पर अपने मुंह का चोकलेट निकाला और वापस

अपनी जीभ से अपने मुंह में ले लिया. उसने भी वापस अपनी जीभ मेरे मुंह में डाली और चोकलेट अपने मुंह में ले गया. हम दोनों आपस में ऐसे ही लिपटकर सोते रहे. उसका लिंग अभी तक मेरे जननांग के अन्दर था. हम दोनों को फिर एक बार नींद

आ गई. काफी देर बाद मेरी आँख खुल गई. नींद में होने के कारण उसका लिंग अब छोटा हो गया था. मैंने उसे फिर से चूमना शुरू किया. अब तक बची हुई चोकलेट को फिर से उसके मुंह में दे दी. उसे फिर से उत्तेजना हुई और वो इस बार और भी

ज्यादा जोर से मेरे जननांग में अपने लिंग को अन्दर बाहर करने लगा. लेकिन इस बार वो ज्यादा देर तक नहीं कर सका और उसके लिंग ने तीसरी बार मेरे जननांग में पिचकारी छोड़ दी. हम दोनों ने एक दूसरे को कसकर पकड़ लिया. हम दोनों के

मुंह आपस में सिल गए.कुछ ही देर में एक बार फिर हमें नींद आ गई. उसका लिंग भी मेरे जननांग के अन्दर हम दोनों के साथ सो गया. आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | इस बार जब मेरी आँख खुली तो वो अब तक सो रहा था. मैंने

घडी देखी. शाम के सात बजे थे. मैंने उसे फिर चोकलेट के घोल के साथ चूमा. वो उठ तो गया लेकिन मेरे उपर लेटने की ताकत उसमे नहीं थी. मैंने धीरे से खुद को उस के ऊपर लिटा लिया.हम दोनों ने एक दूजे को फिर बहुत चूमा. अब मैं उस पर बैठ

गई. मैंने खुद को अपनी टांगों के बल पर थोडा ऊपर किया.उसका लिंग मेरे जननांग से थोड़ा सा बाहर निकला. मैं वापस बैठ गई. लिंग फिर से जननांग में चला गया. उसे बहुत मजा आने लगा. मैंने अब लगातार धीरे धीरे ऐसा ही उठना बैठना जारी

रखा. उत्तेजना इतनी जल्दी आ गई कि केवल पांच मिनट में ही उसके लिंग ने चौथी बार मेरे जननांग को पिचकारी मार हर तरह से फिर भर दिया. मेरे ऊपर होने के कारण थोड़ी सी मलाई मेरे जननांग से बाहर आ गई. इससे थोड़ी चिकनाई और बढ़ गई

इस बार हम दोनों ने बची चोकलेट से एक दूजे के गाल; होंठ और जीभ को चूम कर ख़त्म कर दिया. अब हम दोनों ही पस्त हो गए थे. मैंने धीरे से खुद को तिरछा किया लेकिन उसने लिंग को बाहर नहीं आने दिया. हम करवट बदलकर आमने सामने थे. एक

दूजे के होंठों को सी दिया. रात के आठ बज गए थे. हम उसी अवस्था में फिर सो गए. इस बार सोये तो सवेरे सात बजे ही उसकी आँख खुली. उसके हिलते ही मैं भी उठ गई. उसका लिंग अभी तक मेरे जननांग में ही सोया था. इसका मतलब यह हुआ कि

लगातार दोपहर के दो बज से सवेरे सात बजे तक उसने लिंग को मेरे जननांग में ही डाल कर रखा. अब उठना ही पडा. उसने लिंग को बाहर निकाला. मैंने उसके लिंग को चूमा और हम बाथरूम में आ गए. दांतों को पेस्ट करने के बाद जब हमारे मुंह

ताजे हो गए तो हमने बाथरूम में एक बार फिर चूमना शुरू कर दिया. मैंने फवारे को पूरे तेजी से चला दिया. उसने मुझे पानी की बौछार में लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर लेट गया. उसने एक बार फिर मेरे जननांग में अपना लिंग भेज दिया. मैं

तो जैसे धन्य हो गई थी कल दोपहर से ही. पानी की तेज बोछार में सेक्स का अपना ही आनंद आया. दस मिनट के बाद बरसते पानी में हम दोनों के होंठ आपस में मिले. जिस्म तडपे और उसने पांचवी बार पिचकारी मेरे जननांग में मारी. स्नान के

बाद हम ने कपडे नहीं पहने. हम नंगे ही नाश्ता तैयार करने लगे. मैंने उसे घर जाने से रोक लिया. उसे खूब नाश्ता कराया. ताकत हम दोनों में ही नहीं थी. हम फिर से आपस में लिपटे और सो गए. दोपहर में बारह बजे मेरी आँख खुली. उसका लिंग

मेरे जननांग को धीरे धीरे भेद रहा था. वो मुझे चूम रहा था. हम ने धीरे धीरे फिर से सेक्स किया. एक घंटे तक धीरे धीरे रुकते रुकते सेक्स के बाद मेरा जननांग उसके लिंग की पिचकारी से छठवीं बार भर गया. आप लोग यह कहानी मस्ताराम

डॉट नेट पर पढ़ रहे है | हम फिर से सो गए. दोपहर को हमने नग्नावस्था में ही खाना बनाया और खाया. दोपहर को करीब तीन बजे मैंने उसे फिर अपनी बाहों में लिया. बहुत जल्दी उसका लिंग मेरे जननांग में घुस गया. अब तो मेरे जननांग का

सारा रास्ता उसके लिंग को पहचानने लगा था. पूरे आधे घंटे के अन्दर बाहर के बाद उसने सातवीं बार मेरे जननांग की प्यास एक जोर की पिचकारी मारकर बुझा दी. मैं फिर से जवान हो गई थी. आप लोग यह कहानी सेक्सवासना डॉट कॉम पर पढ़

रहे है | अब वो मेरे साथ मेरे घर में ही रहता है. उस दिन को तीन माह बीत चुके हैं. हर दूसरे दिन मेरा जननांग उसके लिंग को अपने अन्दर फंसा लेता है. उसका लिंग जोर की पिचकारी छोड़ता है और मैं उसके लिंग को अपने अन्दर ही दबाये

रात भर सोती रहती हूँ. आप भी एक बार ऐसे ही लिंग को अन्दर रख सोकर देखिये जबरदस्त आनंद आएगा. आप बार बार करना चाहोगे. चोकलेट को इसी तरह से खाकर देखिये सेक्स करने की ताकत पांच गुना बढ़ जाती है. रात हो चली है. मेरा जननांग

तड़प रहा है. वो अपने लिंग को कड़क किये सामने ही लेटा हुआ है. मैं उसके पास जा रही हूँ. आज लिंग और जननांग को आपस में फिर से मिलना है. आप भी चोकलेट मुंह में लीजिये; फ्रेंच किस से उसे खाइए; उसे भी खाने दीजिये और लिंग की

पिचकारी को अपने जननांग में छुडवाकर मजे से सारी रात लिंग को अपने जननांग में दबाकर दोनों के होंठों को आपस में मिलाकर सो जाइए. आप असीम आनंद में पहुंचेंगे. उस वक्त मुझे याद जरुर करना.
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