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मुझे चाहिए कला मोटा लंड


दोस्तों ये कहानी आप सेक्सवासना डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

हैल्लो दोस्तों, हमारी शादी को अभी तीन सप्ताह ही हुए थे कि मेरे मम्मी पापा ने मुझे अचानक से मेरे घर पर बुला लिया और हम दोनों ने अभी सेक्स का भरपूर मज़ा भी नहीं उठाया था कि हमको अब कुछ दिनों के लिए अलग अलग होना पड़ा और

फिर में अपने घर पर आ गई मेरे पति को मेरा अपने घर पर जाना मंजूर नहीं था, लेकिन सेक्स के अलावा भी उस समय बहुत नियम थे। दोस्तों मेरे घर में मेरे पापा, मम्मी और मेरा एक छोटा भाई है और वो तो मेरा यार था। मेरा मतलब वो मेरा

एक बहुत अच्छा दोस्त है और दोस्तों आप सभी समझ सकते है कि शादी के बाद किसी भी लड़की का अपने घर पर आकर अकेले में बिस्तर पर रात गुजारना कितना मुश्किल होता है और फिर जिस रात को में अपने घर पर आई थी, उस रात को हमारे घर पर एक

छोटी सी पार्टी थी। उस दिन मेरे छोटे भाई के जन्मदिन की पार्टी थी। मेरे घर पर पहुंचते ही घर के सभी लोग बहुत खुश हो गए थे और हमने उस रात को बहुत मज़े किए और जब पार्टी चल रही थी तभी मैंने वहां पर एक अंजान लड़के को उस

पार्टी में देखा, जिसका चेहरा मेरे पति से बिल्कुल मिलता था। मैंने जब अपने भाई से पूछा कि वो काला सा आदमी कौन है? तो उसने मुझे बताया कि वो उनके कॉलेज का टीचर है और वो उन दिनों में मेरे पापा का बहुत अच्छा दोस्त भी बन

गया है। फिर मैंने उससे पूछा कि पापा को यह नमूना कैसे और कहाँ मिला? तो मुझे मेरे भाई ने बताया कि जब पापा भाई के एड्मिशन के लिए कॉलेज जा रहे थे, तो रास्ते में उनका एक छोटा सा एक्सिडेंट हो गया था और इस आदमी ने मतलब कि

मेरे भाई के केमस्ट्री टीचर ने उनकी मदद की थी और तब से यह दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन गये है और पूछने पर पता चला कि वो पिछले तीन दिनों से हमारे घर पर आ रहा है और रात रात भर पापा मम्मी और वो बातें करते रहते है। फिर जब

पार्टी खत्म हुई तो पापा ने मुझसे कहा कि बेटी पहले तुम फ्रेश हो जाओ और फिर सोने जाना, डांस कर करके तुम्हारा शरीर बहुत थक गया है और तुम पसीने से पूरी गीली हो चुकी हो, तुम्हे ऐसा करने से थोड़ी राहत मिलेगी। दोस्तों पापा

के मुहं से ऐसे शब्द सुनकर में बहुत चकित हो गई थी, तो मैंने उनसे कहा कि ठीक है पापा आप कहते है तो में नहा ही लेती हूँ, शायद मेरा शरीर थोड़ा हल्का हो जाए और फिर में बाथरूम में नहाने चली गई, वहां पर जाकर मैंने अपने कपड़े

उतार दिए और अब में पूरी नंगी होकर नहाने लगी, तभी कुछ देर बाद अचानक से मुझे अपने पति की याद आने लगी थी और में उनको याद करके अपनी चूत में ऊँगली करने लगी और में ज़ोर ज़ोर से मोन करने लगी। तभी अचानक से मुझे ऐसा लगा कि

जैसे शायद वो काला मर्द बाहर ही खड़ा हुआ था। उसने बाहर से खड़े होकर मुझे आवाज देकर पूछा कि बेटी क्या कुछ हुआ? कहीं तुम्हे चोट तो नहीं लगी? तुम इतनी ज़ोर से क्यों चिल्ला रही हो? तो मैंने अंदर से ही कहा कि नहीं अंकल, में

तो बस गाना गा रही थी, लेकिन आप मेरे बाथरूम के बाहर खड़े होकर क्या कर रहे हो? तो वो मुझसे बोला कि कुछ नहीं, बस में तुम्हारा बाहर निकलने का इंतजार कर रहा हूँ, तुम थोड़ा जल्दी करो, क्योंकि मुझे भी अब नहाना है। फिर मैंने कहा

कि हाँ ठीक है अंकल आप थोड़ा सा और इंतजार करो, बस में बाहर ही आने वाली हूँ। अब में नहाकर अपने बदन पर टावल लपेटकर ही बाहर निकल आई और फिर में अपने रूम की तरफ जाने लगी, इतने में वो तुरंत बाथरूम में चला गया और नहाने लगा। अब

में जैसे ही रूम के अंदर गई तो अचानक से मुझे याद आया कि मैंने अपनी ब्रा और पेंटी को बाथरूम के फर्श पर ही छोड़ दिया है और में अब मन ही मन सोचने लगी कि अरे यार अब अंकल मेरी ब्रा और पेंटी को देखेंगे तो क्या सोचेंगे? में

जल्दी से बाथरूम के सामने आ गई और मैंने दरवाजे के पास आकर सुना कि वो कुछ गुनगुना रहा था। मैंने उससे कहा कि अंकल क्या आप थोड़ी देर के लिए बाहर आ जाओगे, मुझे अपने कुछ कपड़े धोने है, में उन्हें वहीं पर भूल गई थी। फिर वो

मुझसे बोला कि तुम थोड़ी देर रुक जाओ, में अभी नंगा हूँ और गलती से मेरे पास टावल भी नहीं है, में ऐसे बाहर नहीं आ सकता हूँ, तुम अपनी ब्रा और पेंटी को कुछ देर बाद में धो लेना। फिर मैंने उससे कहा कि नहीं अंकल, मुझे वो अभी

धोनी है, प्लीज आप एक काम करो अपनी गीली अंडरवियर को ही पहनकर बाहर निकल आओ, में एक मिनट में अपने कपड़े धो लूँगी। फिर वो बोला कि ठीक है जैसी तुम्हारी मर्ज़ी और फिर वो बाथरूम से बाहर निकले। ओह्ह मेरे भगवान मैंने क्या

देखा? कि उसने अंडरवियर पहना हुआ था या नहीं? लेकिन उसका वो काला और करीब 7 इंच का लंबा और एकदम मोटा सा लंड मुझे अंडरवियर के अंदर से साफ साफ दिखाई दे रहा था और में थोड़ी देर तक लगातार उसको देखती ही रही और एकदम से में उसमे

खो गई। फिर कुछ देर बाद उसने मुझे टोकते हुए कहा कि बेटी तुम अब अंदर चली जाओ, नहीं तो मेरा यह हथियार और भी बड़ा हो जाएगा। दोस्तों में उनसे कुछ ना बोली और एकदम चुपचाप अपना सर नीचे झुकाकर थोड़ा सा शरमाकर अंदर चली गई,

लेकिन अब में अंदर क्यों आई थी? वो भी में पूरी तरह से भूल गई थी, क्योंकि मुझे उसका वो काला, लंबा, मस्त लंड और कुछ भी करने नहीं दे रहा था। मेरी नजर तो बार बार उस लंड को देख रही थी। फिर में उस पर से अपना ध्यान हटाकर जल्दी

से अपने कपड़े धोकर में बाहर आ गई और वो तुरंत अंदर चला गया। में उसी हालत में चुपचाप वहां से चली गई और दोबारा अपने रूम में जाकर ज़ोर ज़ोर से अपनी चूत में ऊँगली करने लगी और ऊँगली करते करते थककर कब मुझे नींद आ गई मुझे

पता ही नहीं चला। फिर में अगले दिन सुबह उठी तो मुझे पता चला कि वो आदमी सुबह ही किसी काम से मुंबई चला गया। में तो अब हर वक़्त उसके काले लंड को सोच रही थी और मन ही मन मुझे इच्छा होने लगी थी कि में भी किसी काले लंड की दासी

बन जाऊँ और इस तरह मेरे मन में काले लंड की चाह ने जन्म ले लिया था और जबकि मेरे पति से मुझे बहुत प्यार था। दोस्तों अब मेरे पति को कैसे गोरी चूत की इच्छा हुई वो में आप सभी लोगों को विस्तार से बताती हूँ, वो भी उन्हीं की

ज़ुबानी। फिर मेरी बीबी को अपने घर पर गये कुछ ही दिन हुए थे कि मेरी माँ अपनी किसी सहेली की बेटी को घर ले आई। उसका नाम निशा था, जो सर से लेकर पैर तक कपड़ो में ढकी हुई थी और मुझे तो पहले वो बहन जी टाईप की लगी और मेरी

उसमें इतनी रूचि भी नहीं हुई और फिर में अपने कमरे में जाकर सो गया। रात को करीब साड़े ग्यारह बजे मुझे माँ ने बुलाया और फिर उन्होंने मुझसे कहा कि निशा की कमर में थोड़ी चोट लग गई है और उसे शायद किसी डॉक्टर के पास ले जाना

पड़ेगा। फिर में उनकी पूरी बात सुनकर तुरंत उठ गया और में निशा के रूम में चला गया। जहाँ पर जाकर मैंने देखा कि वो अपनी कमर के दर्द की वजह से बेड पर लेटी हुई थी। माँ ने उसके सामने मुझसे कहा कि तू जल्दी से डॉक्टर को फोन

लगा या इसे लेकर किसी नज़दीक हॉस्पिटल ले जा। फिर मैंने अपनी पहचान के सभी डॉक्टर को फोन किया, लेकिन उन्होंने किसी ने भी मेरा फोन नहीं उठाया और रात के समय उसे बाहर ले जाना भी मैंने सही ना समझकर मैंने उससे पूछा कि

तुम्हें क्या दर्द ज़्यादा हो रहा है? तो उसने मुझसे कहा कि हाँ मुझे दर्द तो बहुत हो रहा है, लेकिन उसके लिए आपको किसी भी डॉक्टर को बुलाने की या इतना परेशान होने की कोई ज़रूरत नहीं है, मम्मी जी अगर आप मुझे सरसों के तेल

से मालिश कर दो तो शायद मेरा यह दर्द थोड़ा कम हो जाएगा। फिर उसके मुहं से यह बात सुनते ही मेरी माँ तुरंत पास वाले कमरे से सरसों का तेल ले आई और अब उन्होंने मुझसे कहा कि तू इसके जिस जगह पर दर्द है तो वहां पर मालिश कर दे,

में तो मालिश नहीं कर सकती। फिर मैंने कहा कि में यह कैसे कर सकता हूँ? किसी पराई लड़की की मालिश कैसे कर सकता हूँ? तो माँ ने मुझसे कहा कि में तुझे इसके साथ सोने के लिए नहीं कह रही हूँ, बस तुझे इसकी मालिश करनी है और वो यह

बात मुझसे कहते हुए अपने रूम में चली गई और अब हम दोनों उस कमरे में बिल्कुल अकेले हो गये थे और फिर हम दोनों में कुछ इधर उधर की बातें हुई। में : प्लीज आप बुरा मत मनना, मेरी माँ ने गुस्से में कुछ गलत कह दिया, क्योंकि वो

थोड़ी बीमार है और इसलिए वो मालिश नहीं कर सकती, इसलिए उन्होंने मुझसे यह काम करने के लिए कहा है और अगर आपको ज्यादा दर्द हो रहा है तो अब मुझे ही आपकी मालिश करनी होगी, प्लीज इसलिए अब आप अपने कुर्ते को थोड़ा ऊपर खिसका

लीजिए, नहीं तो यह तेल लगने की वजह से गंदा हो जाएगा। निशा : कोई बात नहीं जी, आप मेरे नये दोस्त हो, मुझे आपके हाथों से मेरी कमर को छूने से कोई आपत्ति नहीं है और वैसे भी हर दर्द में दोस्त ही काम आते है, आप मालिश

कीजिए। दोस्तों अब में उसकी सफेद दूध जैसी गोरी कमर पर अपने एक हाथ में थोड़ा सा तेल लेकर धीरे से रखकर हल्के हल्के हाथ को घुमाते हुए उसकी कमर की मालिश करने लगा। दोस्तों उसकी कमर को छूते ही मुझे एक अजीब सा अहसास आ गया

और में वो सब महसूस करने लगा था। उसका बदन एकदम गोरा, मुलायम, गदराया हुआ था, वो ठीक मेरे सामने चुपचाप लेटी हुई थी और मेरा हाथ उसकी कमर की वजह से मेरे पूरे बदन में करंट पैदा कर रहा था और वो बहुत धीरे धीरे दर्द से करहा रही

थी। फिर मैंने उससे थोड़ी हिम्मत करके पूछा। में : क्यों आपको कहीं और दर्द तो नहीं है ना? मेरा मतलब हाथ पैर या पीठ में। निशा : जी नहीं, बस मुझे अपनी पीठ पर ही दर्द हो रहा है, लेकिन आप वहां पर कैसे मालिश करोगे? मैंने

कुर्ता पहना हुआ है और में इसे इतना ऊपर भी नहीं ले जा सकती, जिससे आप मेरी मालिश करने के लिए अपना हाथ मेरी कमर पर चला सके। में : जी अगर आपको मुझसे मालिश करवानी ही है, तो आप ऐसा कर सकती है, में उठकर इस कमरे की लाईट को बंद

कर देता हूँ और फिर आप अपने कपड़े उतार दो और फिर जब मालिश पूरी हो जाए तो उसके बाद में आप उनको पहन लेना। निशा : हाँ वो तो ठीक है, लेकिन मैंने अपने कुर्ते के अंदर ब्रा भी नहीं पहनी हुई है। में : तो क्या हुआ, में थोड़े

अंधेरे में आपके बदन को देख सकता हूँ? निशा : जी आप मुझे छू तो लोगे ना? में : तो ठीक है, अगर आपको मेरे हाथ लगाने से इतना ऐतराज है तो में यह सब नहीं करता और वैसे भी दर्द आपको है मुझे नहीं। फिर निशा तुरंत मुझसे बोली कि आप

मुझसे नाराज़ ना होईए, आप लाईट बंद कर आओ, में अपने कपड़े उतारती हूँ। दोस्तों में उठकर गया और मैंने लाईट को बंद किया और उसके बाद में जैसे ही पीछे मुड़ा तो उसके गोरे सेक्सी बदन को देखकर बिल्कुल दंग रह गया और में मन ही

मन सोचने लगा कि क्या कोई इतनी गोरी भी लड़की होती है? में झट से बिस्तर के एक कोने में चला गया और सरसों के तेल की बोतल को मैंने जानबूझ कर उसकी पीठ पर ऐसे गिराया कि जिसकी वजह से आधे से ज़्यादा तेल उसके बूब्स की तरफ मतलब

उसकी उभरी हुई छाती की तरफ चला गया। दोस्तों अब में उसकी सफेद दूध जैसी गोरी कमर पर अपने एक हाथ में थोड़ा सा तेल लेकर हल्के हल्के हाथ को घुमाते हुए उसकी कमर की मालिश करने लगा। दोस्तों उसकी कमर को छूते ही मुझे एक अजीब

सा अहसास आ गया और में वो सब महसूस करने लगा था, उसका बदन एकदम गोरा, मुलायम, गदराया हुआ था, वो ठीक मेरे सामने चुपचाप लेटी हुई थी और मेरा हाथ उसकी कमर की वजह से मेरे पूरे बदन में करंट पैदा कर रहा था और वो बहुत धीरे धीरे

दर्द से कराह रही थी। फिर मैंने उससे थोड़ी हिम्मत करके पूछा क्यों क्या हुआ? निशा : ऊऊऊ जी आपने इतना तेल क्यों गिराया? मेरी छाती पर पूरा तेल ही तेल हो गया है, आप पहले इसको साफ कर दो, उसके बाद आगे कुछ करना। दोस्तों मुझे

तो कब से इसी मौके का इंतज़ार था कि कब वो मुझसे बोले कि जानू कूद पड़ो और में उसके कहने पर तुरंत उसके ऊपर कूद पड़ा। में अब उसके बूब्स को हल्के हल्के मसलने लगा और उसकी तरफ से मुझे कोई भी शिकायत नहीं हुई तो में थोड़ा ज़ोर

पे ज़ोर लगाने लगा और उसके निप्पल को बादाम के जैसा मजबूत बना दिया और अब मेरे दोनों हाथ उसकी कमर पर थे। दोस्तों में अब उसके बूब्स को हल्के हल्के मसलने लगा था और उसे कोई आपत्ति नहीं हुई तो में समझ गया कि दर्द तो आग

लगाने का एक ज़रिया था। इसे तो खुद मेरा लंड चाहिए था, में अब धीरे धीरे अपनो हाथों में मजबूती लाने लगा था और अपने हाथ को मसलना थोड़ा ज़्यादा होने लगा था। में अंधेरे में उसकी चूत के दर्शन तो नहीं कर पाया, लेकिन जब हाथों

ने उसकी मुलायम घनी झांटो का स्पर्श पाया तो मेरा दिल गार्डन गार्डन हो गया, लेकिन उसी समय माँ ने आवाज़ लगाई और पूरा गार्डन पानी से भर गया। दोस्तों मेरा मतलब माँ ने मेरी मेहनत पर पानी फेर दिया था और में मालिश का काम

खत्म हो गया और यह बात कहकर उसके रूम से बाहर निकल आया। फिर सुबह में जल्दी से उठ ना पाया और वो बिन बताए ही मेरे घर से नौ दो ग्यारह हो गई। दोस्तों ये कहानी आप सेक्सवासना डॉट कॉम पर पड़ रहे है। दोस्तों इस तरह हम दोनों की

सेक्स की वो भूख अब तक अधूरी ही रह गई और हमारे दिल में औरों से सेक्स करने की इच्छा ने जगह बना ली और अब कैसे हमने अपने साथी को इस काम के लिए उत्तेजित किया, में आपको अब वो सब विस्तार से बताती हूँ। दोस्तों करीब दो

सप्ताह तक अपने मम्मी, पापा के घर पर रहने के बाद मेरे पति मुझे लेने वहां पर आ गए और एक दिन ठहर कर अगले ही दिन सुबह हम अपने घर के लिए निकल गये। वो हमारा ट्रेन का सफ़र था और हमारे पास A.C. टिकट थी, इसलिए हम आराम से अपनी सीट

पर बैठ गये और ट्रेन के आगे बढ़ने का इंतज़ार करने लगे। फिर थोड़ी देर में ट्रेन अपने स्टेशन से निकलने लगी और धीरे धीरे वो स्टेशन पार कर गई और कुछ देर चलने के बाद ट्रेन एक गावं के बीचो बीच सिग्नल ना मिलने की वजह से रुक

गई तो हमने ऐसे ही खिड़की का परदा उठा दिया और बाहर का नज़ारा देखने लगे तो मैंने देखा कि गावं के खेत में एक काला कुत्ता एक सफेद कुतिया से बिल्कुल सटा हुआ है और वो लगातार उसको धक्के देकर चोद रहा था और वो अपनी लंबी जीभ को

बाहर निकालकर सेक्स का मज़ा ले रहा है। दोस्तों यह सीन देखकर हम दोनों पति पत्नी में पति पत्नियों वाली बातें शुरू हो गई। पति : देखो कितना ख़ुशनसीब है? वो कुत्ता जो काला होकर भी एक गोरी कुतिया का साथ पा रहा है और वो

उसको चोदने का पूरा पूरा मज़ा ले रहा है और हम एक शादीशुदा इंसान होकर भी करीब एक महीने से मुठ मारकर अपना काम चला रहे है। में : जी आप अब इतने उतावले मत होईये, में आज रात को घर पर पहुंचकर आपकी सारी भूख मिटा दूँगी और वैसे

मुझे भी सेक्स की बहुत भूख लगी है और इस बार तो कुछ ज़्यादा ही है, आप जरा मुझसे बचना, कहीं में इस बार आपको हरा ना दूँ। पति : छोड़ो तुम मुझे क्या हराओगी जानेमन, आज रात में होने नहीं दूँगा, में तो अभी से तैयार हूँ अपने जोड़े

के साथ वो सब करने के लिए। दोस्तों इतना कहकर उन्होंने अपना लंड अपनी आधी पेंट से तुरंत बाहर निकाला और वो मदहोश होकर मुझसे कहने लगे कि ले चूस ले आज तेरे इस दीवाने को कि इसके पास एक कतरा भी ना रहे, अगले दस पन्द्रह दिन

बहाने को। में : मुझे तड़प पता है तुम्हारे इस औज़ार की, बस तुम थोड़ी देर ज़्यादा मेरा साथ निभाना जालिम, क्योंकि मुझे अब ज्यादा ज़रूरत है ऐसे हज़ारों हथियार की। पति : क्या? में : प्लीज मुझे माफ़ करना जानेमन, में जोश

में आकर कुछ ज्यादा ही बोल गई। दोस्तों में इतना कहकर उनके ढीले लंड को गहराई तक अपने मुहं के अंदर समा गई और कुछ ही देर बाद उन्होंने मेरे लिपस्टिक वाले होंठो के बाहर अपने सफेद पानी को निकाल दिया, जो मुझे आज बहुत

ज्यादा टेस्टी लग रहा था। पति : शांत हुई कि नहीं रांड, एक बार और चूस, में एक बार और तेरे मुहं में झड़ना चाहता हूँ। में : आज ऐसे क्यों बोल रहे हो जी? लंड तो सिकुड़ गया है और में इस रबड़ को चूसकर अब क्या करू
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