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भाभी को चोदकर माँ बनाया


दोस्तों ये कहानी आप सेक्सवासना डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम पीयूष है और में गुडगाँव हरियाणा से हूँ और आज में आप सभी सेक्सवासना डॉट कॉम के चाहने वालो को अपना एक सच्चा सेक्स अनुभव बताने जा रहा हूँ। यह एक अच्छी चुदाई की घटना है जो कुछ समय पहले मेरे साथ

घटित हुई और अब ज़्यादा बातें ना करते हुए में आप लोगों को अपना मनपसंद सेक्स अनुभव पूरा विस्तार से बता रहा हूँ। दोस्तों यह बात तब की है जब में करनाल हरियाणा में रहता था और मेरी गर्लफ्रेंड उस समय दिल्ली में नौकरी

करने लगी थी। उसका नाम शालिनी था और वो एक बहुत बड़ी प्राईवेट कम्पनी में नौकरी करती थी। में उसके साथ उसके फ्लेट में रहता था और उसे बहुत बार चोदता था, लेकिन दोस्तों यह कहानी उसके बारे में नहीं है। एक दिन में अपनी गाड़ी

लेकर दिल्ली से वापस आ रहा था तो वो सर्दियों का समय था और उस समय बहुत ठंड पड़ रही थी। में दिल्ली से कुछ किलोमीटर दूर निकला ही था कि मैंने देखा कि रास्ते में एक बस खराब हो गई है और बहुत सारे लोग दूसरी बस का इंतजार कर रहे

थे तभी मुझे एक सुंदर सी औरत 30-32 साल की अलग सी खड़ी दिखाई दी। फिर मैंने थोड़ी हिम्मत करके उससे कहा कि अगर आपको बुरा ना लगे तो क्या में कोई आपकी मदद कर सकता हूँ? तो उसने तुरंत कहा कि हाँ जी मुझे अंबाला जाना है और यह बस भी

खराब हो गई है और दूसरी बस पता नहीं कब आएगी? फिर मैंने भी मौके पर चौका मार दिया और उससे कहा कि हाँ में भी अंबाला ही जा रहा हूँ, अगर आप कहे तो में आपको वहां तक छोड़ दूँगा? अब उसने इधर उधर देखा फिर मेरी तरफ देखा और कहा कि

ऐसे किसी अंजान लड़के पर में कैसे विश्वास कर लूँ? तो मैंने उससे कहा कि वो तो आपको देखना है कि में आपके विश्वास के लायक हूँ या नहीं, आप अकेले से और परेशान खड़े दिखाई दिए इसलिए मैंने अपनी गाड़ी रोक ली वरना तो यहाँ पर

सारी दुनिया खड़ी है और वैसे मेरा नाम पीयूष है और में अंबाला में रहता हूँ। फिर वो इतना सुनकर खिड़की से थोड़ा दूर हो गई मुझे लगा कि जा रही है और मैंने अपनी गाड़ी को फिर से स्टार्ट कर लिया तभी उसकी आवाज़ आई अरे मेरा बेग

तो गाड़ी में रख दो। तभी मेरे मन में लड्डू फूटा और में झट से उतरा और मैंने उसका बेग गाड़ी की पीछे वाली सीट पर रख दिया। फिर हम दिल्ली से चल पड़े ठंड बहुत थी इसलिए मैंने हीटर चला रखा था तो उसे थोड़ा अच्छा महसूस हुआ और

उसने अपनी जेकेट की चैन को खोल दिया और नीचे उसका गहरे गले का सूट जिससे उसकी छाती बिल्कुल साफ दिख रही थी उसके बूब्स का साईज़ करीब 36 का होगा और उसके इतने सेक्सी बूब्स को देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया। फिर मैंने लंबी साँस

लेते हुए उससे पूछा कि आपका नाम क्या है? अब उसने अपना नाम रवीना बताया और फिर बताया कि में अपने पति को एरपोर्ट तक छोड़ने आई थी। में हर बार आती हूँ, लेकिन आज उनकी फ्लाइट थोड़ा लेट हो गई और इसलिए मुझे ज़्यादा समय लग गया।

फिर मैंने उससे कहा कि अच्छा तो आपके पति बाहर है ( दोस्तों मुझे पति से क्या लेना देना था? में तो उसी के बारे में जानकारी निकालने लगा) और आप क्या करते हो? तो वो बोली कि में सारा दिन घर पर रहती हूँ और अपनी सास, ससुर देवर के

पास रहती हूँ और हमारे बच्चे नहीं है और मेरे पति बाहर रहते है, में साल साल भर अकेली रहती हूँ। फिर मैंने पूछा कि अरे यार कितना समय हो गया है आपकी शादी को? तो वो बोली कि पूरे 6 साल में : क्यों फिर भी कोई बच्चा नहीं? रवीना

: नहीं बस अभी मेरे पति का मन नहीं है। में : और आपका? रवीना : ह्म्‍म्म्म लंबी साँस के बाद, अरे यार मेरे मन होने ना होने से क्या फ़र्क पड़ता है? अब मुझे वो कुछ ज्यादा दुखी सी लगी, तभी मैंने अपनी बात को बदल दिया और में

उससे बोला कि अगर आप बुरा ना मानो तो क्या में एक बात बोलू? रवीना : बोलो? में : वैसे आप हो बहुत सुंदर और आपका पति बड़ा खुसकिस्मत है जिसे आप जैसी सुंदर पत्नी मिली। अब वो मुझसे बोली कि हाँ वो तो बहुत खुशकिस्मत, लेकिन

मेरी किस्मत का क्या? पता नहीं कब खुलेगी मेरी किस्मत? में : क्यों ऐसा क्या हुआ आपकी किस्मत को? रवीना : कुछ नहीं छोड़ो तुम कुछ अपने बारे में बताओ। मैंने कहा कि कुछ नहीं जी में तो बस कंप्यूटर ऑपरेटर हूँ और गुड़गांव

में नौकरी करता हूँ और अभी वहीं से आ रहा हूँ, एक और बात यार में अपने आप को रोक नहीं पा रहा हूँ बोलने से कि शादी के इतने सालो बाद भी आपने फिगर को बड़ा सम्भालकर रखा है नहीं तो इतने सालों में तो सभी औरते बेकार हो जाती

है। रवीना : हंसते हुए अच्छा जी आपको ऐसा क्यों लगा? में : सच बताऊँ तो आपने जब अपनी जेकेट की ज़िप खोली तो मेरी नज़र। रवीना : तुरंत मेरी बात को काटते हुए हाँ मुझे पता है हर लड़के की नज़र सबसे पहले वहीं पर जाती है और वो

हंसते हुए बोली मुझे सारा दिन कोई काम थोड़ी है बस में अपने शरीर को सम्भालती रहती हूँ। में : फिर हम दोनों मुस्कुराने लगे और फिर मैंने उनसे बोला कि वैसे आप अगर मेरी पत्नी होती तो में आपका पूरा पूरा ख़याल

रखता। रवीना : हाँ, लेकिन जिसके पास जो चीज़ होती है उसकी वो कदर नहीं करता। में : हम तो करते है जी अगर आप चहो तो कभी हमे आज़माकर भी देख लेना। रवीना : मुझे क्या आज़माना है, जो भी तुम्हारी पत्नी आएगी वो ही तुम्हे

आज़माएगी? में : हाँ वो तो आज़माएगी ही, लेकिन आप जैसी सुंदर बीवी हो तो कसम से निकल पड़ेगी। रवीना : (हंसते हुए) हाँ मुझसे भी सुंदर आ जाएगी। में : आप बुरा ना मानो, लेकिन आपका फिगर क्या है? रवीना : लेकिन, तुम मेरा फिगर

जानकर क्या करोगे? में : करना क्या है बस दिल में यह बात रहेगी कि इतनी हॉट औरत साथ में बैठी और में उससे उसका फिगर भी नहीं पूछ पाया? रवीना : ओह हॉट क्या सच में, लेकिन मुझे अब बुरा लगने लगा है। में : मुझे माफ़ करना मेरा

मतलब था कि सुंदर। रवीना : क्यों सिर्फ़ हॉट और कुछ नहीं? में : मतलब? हॉट तो आप हो ही ना सुंदर भी हो। रवीना : और क्या? में : और सेक्सी भी हो मुझे माफ़ करना और वो मेरी बात काटते हुए बोली रवीना : इतना बच्चो जैसे क्यों

व्यहवार कर रहे हो मुझे पता है कि में सेक्सी और हॉट हूँ? जब में बाहर निकलती हूँ तो पड़ोस के सभी लड़के मुझ पर नज़र गढ़ाए रखते है। में : अब मुझे कुछ अजीब सा महसूस हुआ और में बोला कि आप सच में बड़ी सेक्सी, हॉट और सुंदर हो

आपके साथ सेक्स करने वाला तो कसम से बहुत अच्छी किस्मत वाला होगा और अब में मन ही मन सोचने लगा कि यह मैंने क्या बोल दिया? में तुरंत उनसे कहने लगा कि प्लीज़ मुझे माफ़ करना और मेरी बातों को दिमाग में ना लेना, वो में अपने

आपको रोक नहीं पाया और पता नहीं क्या बोल दिया? रवीना : कोई बात नहीं होता है। में : आपका बहुत बहुत धन्यवाद। फिर कुछ देर हम चुप रहे और बाहर कोहरा बहुत हो गया था जिसकी वजह से अब मुझे रोड बड़ी मुश्किल से दिखाई दे रहा था

और हम अभी पानीपत भी नहीं पहुंचे थे और कोहरे के कारण मुझे अपनी गाड़ी की स्पीड भी थोड़ी कम करनी पड़ी। तभी अचानक हमारे साथ से एक गाड़ी थोड़ी तेज़ स्पीड में निकली और हमने उस पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन उसी टाइम वो

गाड़ी चलते चलते एकदम से उसके आगे चल रही गाड़ी से जा टकराई और यह देखकर मैंने अपनी गाड़ी को वहीं पर रोक लिया। रवीना : यह क्या हुआ? में : शायद ज़्यादा कोहरे की वजह से सामने वाली गाड़ी में ठुक गई होगी। रवीना : क्यों

ऐसे तो हमारा भी आक्सिडेंट हो सकता है? में : डर तो मुझे भी इसी बात का है हम एक बार पानीपत पहुंचकर फिर देखते है अगर कोहरा कम हुआ तो आगे चलेंगे, नहीं तो पानीपत किसी होटेल में रुक जाएँगे? रवीना : क्या होटेल में वो भी एक

पराए मर्द के साथ? में : अरे यार अब आप बच्चों जैसी बातें कर रही हो और क्या में अभी भी पराया मर्द हूँ? रवीना : और नहीं तो क्या, मर्द तो पराए ही हो। में : हाँ ठीक है, अच्छा जी। रवीना : में तो बस तुमसे मजाक कर रही थी। में :

हाँ यह हुई ना बात, अब चलें नहीं तो सब होटल बंद हो जाएँगे और हमे इस कार में ही रात गुज़ारनी पड़ेगी। रवीना : ठीक है चलो ऐसा ही करेंगे, वैसे भी समय भी ज़्यादा हो गया है 10:30 हो गए है। में : ठीक है जी, चलो चलते है। मैंने फिर

20-30 की स्पीड पर गाड़ी चलानी शुरू कर दी। हम लगभग 30 मिनट में पानीपत पहुंचे और तब तक मेरे लंड का उसके बूब्स को देख देखकर बहुत बुरा हाल हो गया था और अब उसने चैन को बिल्कुल नीचे कर लिया था और मुझे बिल्कुल मस्त नजारा मिल

रहा था और शायद उसने भी मेरी इस बात पर गौर किया, क्योंकि वो मेरा खड़ा लंड कई बार देख देखकर दूसरी तरफ मुहं करके मुस्कुरा रही थी। में : ओह धन्यवाद भगवान, हम पानीपत तो पहुंच गए और यहाँ पर शहर में कोहरा बहुत कम है। रवीना :

ओह मुझे तो बहुत नींद आने लगी है जल्दी से चलो कोई ठीक ठाक सा होटल ढूँढ लो और फिर हम वहां पर चलकर आराम करते है। में : हाँ ठीक है। फिर मैंने एक होटल में अपनी गाड़ी को मोड़ लिया और पार्किंग में खड़ा कर दिया। मैंने कहा कि

फिर हमे दो कमरे लेने पड़ेंगे ना। रवीना : अरे नहीं नहीं, दो नहीं एक ही ले लेंगे, तुम्हारा पेट्रोल का खर्चा भी तो हो रहा है और रूम का किराया में दे दूंगी और में नहीं चाहती कि तुम्हारा कोई खर्चा हो। में : हाँ, लेकिन सोच

लो एक पराए मर्द के साथ रात गुज़ारनी पड़ेगी और वो भी एक रूम में। फिर में हंसने लगा और मेरे साथ वो भी हंसी और अब हम होटल के अंदर पहुंचे और एक कमरा बुक किया और वहीं पर उन्हें हमारे खाने को कमरे में पहुंचाने के लिए कहा।

हम रूम में पहुंचे और वो फ्रेश होने चली गई और जब वापस आई तो मेरी आँखें फटी की फटी रह गई क्योंकि उसने अपनी ब्रा और पेंटी को उतार दिया और उसने सिर्फ़ वो पतला सा सलवार सूट पहना हुआ था, जिसकी वजह से उसके निप्पल उसके

बिल्कुल टाईट सूट में बिल्कुल साफ चमक रहे थे, जिनको देखकर मेरे लंड की अब और भी ज्यादा हालत खराब थी। रवीना : जाओ तुम भी फ्रेश हो जाओ तब तक खाना आ ज़ाएगा। में : हाँ, में भी वहीं सोच रहा हूँ। फिर जब में बेड से उठा तो

रवीना मेरे सामने वहीं पर मुझसे 7/8 फीट की दूरी पर खड़ी थी और जैसे ही में उठा तो मेरा लंड बिल्कुल सीधा उसकी तरफ निशाना साधे खड़ा हुए था और लंड को देखकर वो हल्की सी मुस्कुराई और में एकदम से बाथरूम में चला गया और फिर

उफ़फ्फ़ उसकी ब्रा, पेंटी वहीं पर लटकी हुई थी। मैंने उसकी ब्रा, पेंटी को सूँघा और पता नहीं कब मेरा हाथ लंड पर चला गया और मैंने उसकी पेंटी को सूंघते सूंघते मुठ मारना शुरू कर दिया और जब मेरा वीर्य बाहर निकलने वाला था

तभी रवीना की आवाज़ आई खाना आ गया है, जल्दी से बाहर आ जाओ मुझे बहुत भूख लगी है और में अब ज्यादा इतंजार नहीं कर सकती। फिर में तभी रुक गया और दो मिनट में मुहं हाथ धोकर बाहर आ गया और अब में भी अपना अंडरवियर वहीं पर छोड़

आया और सिर्फ़ लोवर पहनकर बाहर आ गया और मेरे बाहर आते ही। रवीना : क्या बात है अंदर ऐसा क्या कर रहे थे? ज़्यादा गरम तो नहीं हो गए थे और फिर हंसने लगी। में : ना ना नहीं, कुछ नहीं बस पानी गरम नहीं था और इसलिए बाहर आने में

थोड़ा समय लग गया। दोस्तों लेकिन वो बहुत समझदार थी, वो अब तक सब कुछ समझ चुकी थी और वो दोबारा मुझे देखकर मुस्कुराने लगी तो उसने मुझसे कहा। रवीना : अच्छा चलो आ जाओ खाना खाते है। में : अरे आप तो खा लेते जब आपको भूख लगी

थी तो। रवीना : अरे यार में हर रोज़ ही अकेली खाती हूँ किसी के साथ खाने का मौका कभी कभी मिलता है। में : हाँ ठीक है। फिर में भी अब बेड पर बैठ गया और हम दोनों ने एक एक रज़ाई ओढ़ ली और आमने सामने बैठकर खाने लगे। में तो

खाना खाते खाते भी में उसको देख रहा था उसके बूब्स बड़े ही मुलायम आकर्षक दिख रहे थे और बहुत बड़े भी थे और मेरा लंड तो बस उसके रसीले गुलाबी होठों को छूने को तरस रहा था और में उसके बूब्स को देखते हुए उन्हे चूसने की बात

सोच रहा था कि तभी वो बोली कि इनको देखने से तुम्हारा पेट नहीं भरेगा पहले आराम से खाना खा लो। दोस्तों में उसके बूब्स में इतना खोया हुआ था कि मैंने तुरंत कह दिया कि अगर देखने से पेट नहीं भरेगा तो एक बार चूसने दो। इनका

दूध पीकर मेरा पेट भर जाएगा। फिर मेरे मुहं से यह बात सुनते ही उसने मेरी तरफ बहुत गुस्से से देखा और खड़ी होकर वॉशरूम में चली गई और में अब और कुछ बोल ही नहीं पाया, लेकिन मुझे लगा कि यह तो अंदर जाकर शायद रोने लगी होगी।

तभी वो कुल्ला करके वापस आ गई और मुझे गुस्से से देखते हुए ही बोली कि जल्दी से खाना खाओ मुझे अब सोना है और में भी चुपचाप बीच में ही खाना ऐसे ही छोड़कर उठ गया। रवीना : अरे खाना तो पूरा खाओ, ऐसे नहीं उठते। फिर मैंने

उसके कहने पर एक और रोटी खाई और फिर से उठ गया और बर्तन टेबल पर रख दिए और कुल्ला करके वापस आ गया। फिर मैंने देखा कि वो बिस्तर में नहीं थी और जैसे ही में पीछे मुड़ा तो वो बिल्कुल मेरे सामने खड़ी हुई थी और मेरी आँखों में

आँखें डालकर बोली कि अभी क्या कह रहा था चूसने दो? और फिर वो मेरे बाल पकड़ खींचने लगी और फिर बोली कि चूसेगा क्या इनको, बोल ना अब क्या हुआ? मैंने बोला नहीं नहीं आप तो बुरा मान गई, मेरा यह मतलब नहीं था। रवीना : हाँ और बोल

क्या मतलब था तेरा, जल्दी बोल? में : ( अब मुझे भी थोड़ा सा गुस्सा आ गया और में थोड़ा ज़ोर से बोला) हाँ में जरुर चूसूंगा, अगर आप मुझे चूसने दो तो। फिर उसने मेरे बालो को खींचकर मेरे मुहं को अपने दोनों बूब्स के बीच में रख

दिया और बोली कि यह ले चूस इनको, ओह भगवान मुझे बिल्कुल भी विश्वास नहीं हो रहा था कि यह सब क्या हो रहा है? और फिर मैंने अपने दोनों हाथों से उसके बूब्स को पकड़ लिया और ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा और झट से एक बूब्स को उसके सूट

से बाहर निकालकर चूसने लगा और दूसरे को दबाने लगा, वाह कितने मुलायम बूब्स थे दोस्तों और 36 साईज़ के मस्त बूब्स, मेरे लंड से वीर्य निकलने लगा और तभी अचानक उसने अपना सूट उतार दिया और फिर मेरे सर को पकड़कर अपने बूब्स पर

लगा दिया और में अब तो पागल कुत्ते की तरह उसके बूब्स को चूसने लगा और ज़ोर ज़ोर से उसके निप्पल को अपने दातों से पकड़ पकड़कर खींचने लगा, जिसकी वजह से अब उसकी सिसकियाँ निकलने लगी और वो मुझसे बोली हाँ थोड़ा और ज़ोर ज़ोर

से दबा उह्ह्ह्ह और निकाल मेरा दूध, पी जा उईईईइ और आज मिटा ले अपनी भूख को और अब में अपने दोनों हाथों से उसके बूब्स को दबाने लगा और निप्पल को चूसने और दातों से काट रहा था और अब उसकी सिसकियाँ धीरे धीरे बढ़ती जा रही थी

और भी तेज़ हो रही थी। दोस्तों ये कहानी आप सेक्सवासना डॉट कॉम पर पड़ रहे है। फिर उसने मेरे लोवर में अपना एक हाथ डाल दिया और मेरे लंड को पकड़ने की बजाए उसने मेरे आंड को इतनी ज़ोर से पकड़ा कि मेरी हल्की सी चीख बाहर

निकल आई, लेकिन में फिर से उसके बूब्स को चूसने लगा और फिर उसने मेरे लोवर को नीचे कर दिया और मैंने लोवर को पैरों से नीचे सरका दिया। तभी वो मेरे आंड को पकड़कर खींचने लगी और खींचते खींचते मुझे बेड तक ले आई और अब उसने

मुझे बेड पर बैठा दिया और बोली कि वाह तेरा लंड तो बड़ा मस्त है मेरे पति से थोड़ा बड़ा और मोटा भी है, लेकिन तेरे यह आंड थोड़े सिकुड़े हुए से है, इनको ज़रा में गरम कर दूँ और इतना कहते ही उसने मेरे आंड पर थप्पड़ मार दिया,

जिसकी वजह से मेरी चीख बाहर निकल आई अहह यह क्या कर रही हो? रवीना : चुपचाप बैठा रह, अगर मुझे चोदना है तो नहीं तो सो जा बोल सोना है या मुझे चोदना है? में : हाँ यार चोदना है। रवीना : फिर से आंड को थप्पड़ मारते हुए फिर आराम

से लेटा रह और मुझे जो करना है करने दे। फिर एक के बाद एक कई सारे थप्पड़ मारे और में हर बार सिर्फ़ कराह रहा था। फिर उसने मेरे आंड को चूसना शुरू कर दिया और लंड को हाथ से हिलाया, जिसकी वजह से मुझे अब धीरे धीरे बहुत मज़ा

आने ही लगा था कि तभी वो मेरे आंड क
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