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पड़ोसन को रात भर ठोका


दोस्तों ये कहानी आप सेक्सवासना डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

हैल्लो दोस्तों, में अपनी कहानी को आप लोगों को बताने के सबसे पहले कुछ मेरे बारे में भी बता देता हूँ, जैसे कि में 28 साल का एक नौजवान लड़का हूँ और में आगरा शहर का रहने वाला हूँ। दोस्तों में पिछले कुछ सालों से

सेक्सवासना डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियाँ पढ़ता आ रहा हूँ और मुझे ऐसा करना बहुत अच्छा लगता है, लेकिन में आज उन्हें पढ़कर अपनी भी एक सच्ची चुदाई की घटना बताने जा रहा हूँ, जिसमें मैंने अपनी पड़ोसन को रात भर बहुत जमकर

चोदा। दोस्तों मेरे घर के सामने वाले घर में रहने वाली भाभी जो कि बहुत ही सुंदर है और में हमेशा किसी ना किसी बहाने से उन्हें देखता रहता हूँ, उनके फिगर का आकार 36-28-34 है और मेरी पूरी सोसाईटी जिसमें में रहता हूँ, वहां के

सभी लड़को की भी नज़र हमेशा उन पर ही टिकी रहती है, क्योंकि वो बहुत हॉट सेक्सी है, उनका रंग गोरा, बड़ी बड़ी काली आखें, लम्बे काले बाल, गुलाबी गुलाबी होंठ, पतली कमर पर मटकती हुई गांड हर किसी को अपनी तरफ आकर्षित करती है और

ठीक वैसा ही हाल मेरा भी उन्हें देखकर था। में हमेशा उनके सपने देखा करता और उन्हें चोदने के बारे में सोचा करता था। वो हमेशा मुझसे बहुत हंस हंसकर बातें किया करती थी और वो मेरी बातों का खुलकर भी जवाब दिया करती थी। एक

दिन मैंने दोपहर के समय देखा। दोस्तों मेरा घर उनके घर के ठीक सामने है, जिसकी वजह से मुझे उनके घर का सब कुछ दिखाई और सुनाई देता है। उनका अपने पति से कमरे के अंदर किसी बात को लेकर झगड़ा हो रहा था और वो कुछ देर तक चलता

रहा। मुझे उनकी बहुत ज़ोर ज़ोर से लड़ने झगड़ने की आवाजें आ रही थी। फिर उस दिन शाम को जब भाभी रोज की तरह सोसाईटी के पार्क में टहलने के लिए नीचे आई और जहाँ में पहले से ही उनका इंतज़ार कर रहा था। अब में सब कुछ जानते हुए भी

उस बात से जानबूझ कर बिल्कुल अंजान बनते हुए बातों ही बातों में मैंने उनसे पूछा कि क्यों आप आज कुछ ज्यादा उदास उदास सी लग रही हो? तो उन्होंने मेरी बात को टालते हुए मुझसे झूठ कहा कि नहीं ऐसी कोई बात नहीं है, जैसा तुमने

सोचा है और फिर हमारी दूसरी बातें होने लगी थी, लेकिन फिर कुछ देर बाद में मैंने उनसे दोबारा पूछा कि क्या वाकई में ऐसी कोई बात नहीं है या आप मुझसे कुछ छुपा रही हो और आप मुझे वो बात साफ साफ बताना नहीं चाहती? तो वो मेरे

मुहं से इतना सब सुनकर थोड़ी सी भावुक हो गई और फिर वो तुरंत मुझसे बिना कुछ कहे अपने घर लौट गई। दोस्तों उसी शाम को मेरे घर वालों को दिल्ली मेरे किसी रिश्तेदार के घर पर शादी के लिये जाना था और वो लोग कुछ घंटो बाद चले गए

और अब उन सभी के चले जाने के बाद में अब अपने घर में बिल्कुल अकेला था, इसलिए मैंने अपने खाने के लिए बाहर से फोन करके कुछ खाने के लिए खाना मंगवा लिया था। अब में अपने कमरे में बैठा हुआ टी.वी. देखने लगा और उसके कुछ देर बाद

में बोर होने लगा तो मैंने अपने लेपटोप पर सेक्सी कहानियाँ पढ़नी शुरू कर दी। दोस्तों रात को करीब 11 बजे दरवाजे की घंटी बजी और जब में उठकर दरवाजा खोलने बाहर गया तो मैंने दरवाजा खोलकर देखा तो बाहर आरती भाभी खड़ी हुई थी।

मैंने उनसे पूछा कि क्या हुआ आप इतनी रात को कैसे आई हो, क्यों सब ठीक तो है ना? तो उन्होंने मुझसे कहा कि उनकी तबियत कुछ खराब है और सर में बहुत दर्द हो रहा है, इसलिए में तुम्हारे पास दवाई लाने के लिए चली आई क्या घर पर कोई

नहीं है? तो मैंने कहा कि हाँ में आज से कुछ दिनों के लिए अपने घर पर बिल्कुल अकेला रहूँगा, क्योंकि वो सभी लोग कुछ दिनों के लिए बाहर गये हुए है। फिर मैंने उन्हें कहा कि कोई बात नहीं मेरे घर में दवाई पड़ी होगी, वो में

आपको अभी लाकर दे देता हूँ और फिर मैंने उन्हें अंदर बुला लिया और दवाई वाले डब्बे में से उनको दर्द कम होने की दवाई लाकर दे दी। फिर उन्होंने मुझसे बोला कि प्लीज क्या मुझे थोड़ा सा पानी मिल सकता है? तो मैंने उनसे हाँ

कहते हुए किचन से उन्हें पानी लाकर दे दिया, उन्होंने पानी से वो दवाई ले ली और फिर वो अपने घर पर लौट गई। अब में उनके चले जाने के बाद भी बहुत देर तक उनके बारे में सोचता हुआ ना जाने कब सो गया, मुझे बिल्कुल भी पता नहीं चला।

सुबह 7.30 बजे मेरे दूध वाले ने घंटी बजाई तो में उठा और दरवाजा खोलने चला गया। तभी मैंने देखा कि आरती भाभी ठीक मेरे सामने अपने घर के दरवाज़े पर खड़ी हुई थी और वो मुझे देखकर थोड़ा सा मुस्कुराने लगी और फिर उन्होंने मुझसे

आवाज़ देकर कहा कि में नाश्ता आज उनके घर पर आकर कर लूँ। फिर मैंने भी उनकी यह बात सुनकर तुरंत मन ही मन खुश होकर हाँ कर दिया और फिर दूध लेकर अंदर चला गया। उसके बाद में जल्दी से नहाकर तैयार होकर बहुत खुश होता हुआ उनके घर

पर नाश्ता करने चला गया। फिर जब मैंने उनके घर की घंटी बजाई तो कुछ देर तक कोई भी बाहर नहीं आया। फिर मैंने दो चार बार और घंटी बजाई तो थोड़ी देर बाद दरवाज़ा खुला और आवाज़ आई कि अंदर आ जाओ और दरवाज़ा बंद कर दो। फिर मैंने

ठीक वैसा ही किया और कमरे में जाकर बैठ गया और फिर मुझे दोबारा से भाभी की आवाज आई कि तुम बैठ जाओ, में अभी नहा रही हूँ और में बस थोड़ी देर में नहाकर बाहर आती हूँ। दोस्तों जब में अंदर गया था और मैंने दरवाज़ा बंद किया था, तब

तक मुझे कोई भी नजर नहीं आया था, इसका मतलब यह था कि भाभी घर पर बिल्कुल अकेली थी और उन्होंने ही दरवाजा खोला और तुरंत बाथरूम में चली गई। में यह सभी बातें मन ही मन सोचता हुआ सामने वाले कमरे में बैठ गया और फिर भाभी के

नहाकर बाथरूम से बाहर आने का इंतज़ार करने लगा। फिर कुछ देर बाद जब मैंने देखा कि आरती भाभी नहाकर जब अपने बाथरूम से निकली तो वो क्या मस्त ग़ज़ब की सेक्सी लग रही थी, उनको देखकर मेरा लंड खड़ा होकर तन गया था और मेरा मन

उन्हें देखकर कर रहा था कि में अभी आरती भाभी को चोद दूँ, लेकिन फिर भी मैंने उस समय अपने आप पर बहुत कंट्रोल कर लिया था। फिर भाभी ने मुझे नाश्ता बनाकर दिया और हम दोनों नाश्ता करते हुए बातें करने लगे। मैंने अपनी पुरानी

बात को छेड़ते हुए उनसे पूछा कि आप कल इतना क्यों उदास थे? तो वो मेरी यह बात सुनकर रोने लगी। फिर मैंने उन्हें चुप करते हुए उनके कंधे पर अपना एक हाथ रख दिया और उन्हें पीने को पानी देने लगा, तो वो अब मेरे गले लगकर रोने

लगी थी। मैंने उन्हें फिर से चुप करवाया और उनसे पूछा कि ऐसा क्या हुआ? तो वो मुझसे बोली कि मेरी तबियत खराब है और मुझे अकेले रहने में बहुत डर लगता है और फिर भी सब घर वालों के साथ उनके पति भी उन्हें अकेले घर पर छोड़कर घर

वालों के साथ बाहर शादी में चले गये है और इस वजह से कल उनकी उनके पति के साथ बहुत लड़ाई हुई थी और फिर उन्होंने मुझसे कहा कि डर की वजह से में कल पूरी रात नहीं सो सकी। दोस्तों ये कहानी आप सेक्सवासना डॉट कॉम पर पड़ रहे

है। फिर मैंने उन्हें कहा कि कोई बात नहीं है, आज रात को में उनके घर पर ही रुक जाऊंगा। फिर उन्होंने खुश होते हुए मुझसे कहा कि हाँ ठीक है, तुम रहोगे तो मुझे डर भी नहीं लगेगा और नींद भी बहुत अच्छी आएगी, वरना कल रात को

मुझे बहुत डर लगा और में बहुत परेशान थी। फिर में वहां से वापस आ गया और मन ही मन सोचने लगा कि अब आज रात को में आरती भाभी को ज़रूर चोदूँगा, उनके बूब्स को बहुत मज़े लेकर चूसूंगा और में पूरे दिन यह सभी बातें सोच सोचकर बहुत

खुश था और जब रात को में उनके घर पर गया तो उन्होंने मुझे बताया कि उनके सर में थोड़ा सा दर्द हो रहा है। फिर मैंने उनसे कहा कि आप खाना रहने दो पहले और सबसे पहले मैंने उनको दवाई लाकर दे दी और फिर उनसे पूछा कि अगर आप कहे तो

में आपका थोड़ा सर दबा देता हूँ, शायद आपको थोड़ा अच्छा लगेगा। फिर उन्होंने कुछ देर ना जाने क्या सोचकर मुझसे कहा कि ठीक है तुम मेरे रूम में आ जाओ और में उनके पीछे पीछे कमरे में चला गया। वो बेड पर बैठ गई और में नीचे खड़ा

होकर उनका सर दबाने लगा। कुछ देर बाद उनको थोड़ा थोड़ा आराम आ रहा था और उनके बिल्कुल पास खड़ा होने की वजह से मुझे उनके मोटे मोटे बूब्स साफ साफ दिख रहे थे और मेरा लंड उन्हें देखकर पूरा तन गया था, जो अब आरती भाभी को भी

नज़र आ रहा था। फिर उन्होंने मुझसे कहा कि तुम बहुत अच्छी मालिश करते हो और मेरा दर्द अब कम होने लगा है, तुम अब मेरी थोड़ी पीठ भी दबा दो, क्योंकि वो भी दर्द कर रही है हो सकता है कि तुम्हारे स्पर्श से मेरा वो दर्द भी चला

जाए। अब में उनसे हाँ कहकर पीछे आकर उनकी पीठ को भी दबाने लगा था और उनकी गोरी मुलायम कमर को छूते ही मेरा लंड और भी जोश में आ गया और उनकी गांड से लग रहा था, जिसकी वजह से वो भी अब उत्तेजित हो रही थी और में उस मौके का फायदा

उठाकर उनकी कमर पर हाथ मसलने लगा था तो वो उत्तेजना के मारे सिसक पड़ी और पलटकर मुझे ज़ोर से जकड़ लिया और बोली कि प्लीज मुझे चोद दो, अह्ह्ह प्लीज और फिर एक ही झटके में मैंने उनके ब्लाउज के हुक खोलकर उनके बूब्स को

दबाने, सहलाने लगा और वो भी अब जोश में आकर मेरा लंड पकड़कर सहलाने लगी। फिर में उन पर टूट पड़ा और उनके बूब्स को दबाने और फिर से चूसने भी लगा। अब में उनको पूरा नंगा करके उनके गरम अंगो के साथ खेलने लगा और जिसकी वजह से

उनको बहुत ही अच्छा लगने लगा था, वो अब सिसकियाँ लेने लगी थी और कुछ देर में वो पूरी गरम हो चुकी थी और फिर वो मुझे नंगा करके मुझसे प्यार करने लगी थी और अब वो मेरा 7 इंच का लंबा, मोटा लंड पूरा अपने मुहं में लेकर उसे चूसने

लगी थी। फिर करीब दस मिनट के बाद जब मैंने उनसे कहा कि मेरा वीर्य अब निकलने वाला है। फिर वो मुझसे बोली कि तुम तुम्हारा सारा माल मेरे मुहं में ही डाल दो और फिर मैंने अपना पूरा वीर्य उनके मुहं में भर दिया और अब आरती

भाभी को मेरी संतुष्ट करने की बारी थी, वो पहले से बहुत गरम तो थी ही। फिर मैंने उन्हें और भी गरम करने के लिए उन्हे बेड पर लेटा दिया और उनके दोनों पैरों को फैलाकर बीच में आकर में अपनी जीभ को पूरा अंदर तक डालकर उनकी पूरी

चूत को चाटने लगा, चूसने लगा, जिसकी वजह से वो एकदम मदहोश हो गयी थी और थोड़ी देर बाद वो मेरे बालों को पकड़कर मेरे मुहं को ज़ोर ज़ोर से अपनी चूत पर दबाने लगी थी, लेकिन कुछ देर बाद वो शांत हो गई, शायद उनका पानी निकल चुका

था। दोस्तों अब मेरा लंड फिर से तनकर चुदाई करने के लिए तैयार खड़ा हुआ था तो मैंने अपना लंड थोड़ा सा और उनसे चूसने के लिए कहा और फिर में उनकी चूत मारने की तैयारी करने लगा था और फिर मैंने आरती भाभी को लेटने को कहा तो वो

मेरे कहने पर बिल्कुल सीधी लेट गई। फिर मैंने अपना तना हुआ पूरा लंड उनकी चूत के अंदर एक ही जोरदार धक्के के साथ डाल दिया, उनको थोड़ा सा दर्द हुआ, लेकिन पहले से गीली और चुदी हुई चूत होने की वजह से लंड बहुत आराम से फिसलता

हुआ अंदर चला गया और मैंने उनके दोनों बूब्स को अपने हाथों में जकड़ लिया। फिर करीब आधे घंटे तक में उनको ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर चोदता रहा और वो भी मेरे हर एक धक्के पर अपने चूतड़ को उठा उठाकर मेरा पूरा पूरा साथ देने लगी,

वो मुझसे कह रही थी हाँ उफ्फ्फ्फ़ थोड़ा और अंदर डाल दो, आह्ह्हह्ह्ह्ह हाँ जाने दो पूरा अंदर, वाह मज़ा उईईईईइ आ गया, स्स्सीईईईईईईइ वाह तुम बहुत अच्छा चोदते हो मुझे तुमसे चुदाने में जो मज़ा मिला है, वो पहले कभी नहीं आया,

हाँ थोड़ा आगे करो। फिर कुछ देर चुदाई करने के बाद मैंने उनसे कहा कि में अब झड़ने वाला हूँ, में अपना वीर्य कहाँ निकालूं? तो उन्होंने मुझसे मुस्कुराते हुए कहा कि तुम मेरी चूत के अंदर ही डाल दो, में उस मज़े को भी महसूस करना

चाहती हूँ और फिर मैंने एक झटके के साथ अपना पूरा वीर्य उनकी चूत के अंदर ही छोड़ दिया और ऐसे ही उनके ऊपर लेट गया और कुछ देर बाद मेरा लंड छोटा होकर खुद ही बाहर आ गया और फिर मैंने देखा की उनकी चूत से मेरे वीर्य के साथ साथ

उनकी चूत का पानी भी बहता हुआ बाहर आने लगा था। दोस्तों उसके बाद हम दोनों ने दो दिनों तक लगातार कई बार अलग अलग तरह से सेक्स किया। मैंने उनको कई तरह से चोदा और वो मेरी चुदाई से बहुत संतुष्ट थी। मैंने उनकी चूत के साथ

साथ उनकी गांड में भी अपना लंड डालकर बहुत मज़े किए, वो चीखती चिल्लाती रही, लेकिन में बिना सुने लगातार चोदता रहा। फिर जब उसके घर वाले आने वाले थे, तब आरती भाभी ने मुझसे हंसकर कहा कि इन दो दिनों में तुमने मुझे अपनी

चुदाई से खुश करके मुझे अपना गुलाम बना लिया है और में अब तुम्हारे लंड की प्यासी हो चुकी हूँ, तुमने मुझे वो सुख दिया जिसके लिए में बहुत सालों से तरस रही थी, तुम्हें मेरी चुदाई करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। आज से जब

भी तुम मुझे चोदना चाहो चोद सकते हो, क्योंकि मुझे भी अब तुम्हारे लंड की बहुत जरूरत है। दोस्तों अब भी जब कभी मुझे मौका मिलता है तो हम दोनों बहुत मज़े लेकर सेक्स करते रहते है और अंत में एक बात और दोस्तों लंड चूसने के

मामले में उनका कोई जवाब नहीं है, वो लंड को बहुत प्यार से अपना समझकर चूसती है। दोस्तों यह थी मेरी प्यासी भाभी की चुदाई की कहानी मेरे साथ जिसमें मैंने बहुत मज़े किए ।।
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