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दीदी ने गैर से चूदवा कर पैर भारी करवाया


दोस्तों ये कहानी आप सेक्सवासना डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

हैल्लो दोस्तों, मेरी दीदी जो बहुत गोरी है, थोड़ी मोटी है, लेकिन फिगर ऐसा कि कोई भी उसको पटककर चोदने के ख्वाब देखने लगे, उसका फिगर साईज 38-34-36 है और लंबे बाल, लेकिन जो हिस्सा सबसे मस्त था वो उनके बूब्स है, उफ इतने

बड़े-बड़े कि देखते ही लड़के पागल हो जाते है। उनकी ब्रा से एक बहुत ही कामुक और मीठी खुशबू आती है इसलिए में उनके बूब्स का सबसे बड़ा दीवाना था। उनकी उम्र 28 साल है और उनकी शादी को 3 साल हो गये है, लेकिन उन्हें कोई बच्चा

नहीं है इसके लिए उन्हें ससुराल में ताने भी सुनने पड़ रहे है। मेरे घर में में, मम्मी और दीदी थे, मेरे पापा तो एक एक्सिडेंट में 10 साल पहले ही गुज़र गये थे। ये बात तब की है जब वो हमारे घर 15 दिन के लिए आई थी। तब में 18 साल का

था और जब गर्मी की छुट्टियाँ चल रही थी, जब हमारे पड़ोस के चौबे जी के घर उनका दामाद और बेटी जो 6 महीने प्रेग्नेंट थी, वो आए हुए थे। वो दामाद बिल्कुल कोयला जैसा काला और मुस्टंडा था, मोटा तगड़ा, वो बिल्कुल भयानक था। अभी

हम जहाँ रहते है वहाँ 4 परिवार का कॉमन 2 लेट्रीन और 2 बाथरूम है। फिर एक बार दीदी आकर बोली कि वो काला आदमी अपने घर के सामने बैठकर उन्हें गंदी नज़र से देखता है। तो मैंने कहा कि टेन्शन मत लो, वो हमेशा बैठा-बैठा सबको घूरता

रहता है और वो ये सुनकर कुछ नहीं बोली। फिर एक दिन जब में खेलकर दोपहर को लौटा तो मैंने देखा कि दीदी नल के पास नीचे बैठकर बर्तन साफ़ कर रही थी और वो काला आदमी उनके बिल्कुल सामने खड़ा होकर उनसे पता नहीं क्या बातें कर रहा

था? लेकिन मैंने देखा कि उसकी वहसी नज़रे मेरी भोली भाली दीदी के गोरे बूब्स पर ही थी और वो लगातार अपनी जीभ को अपने काले होंठो पर घुमाए जा रहा है। फिर मुझे लगा कि इसकी नियत ठीक नहीं है, लेकिन मैंने गौर किया अब वो दीदी

से अक्सर बातें किया करता और दीदी ने भी कभी उसकी शिकायत नहीं की, बल्कि वो हंसती और खुश रहती। फिर मैंने सोचा कि वो उनके ससुराल में तो इतनी परेशान रहती है, कम से कम वो यहाँ तो खुश है, लेकिन ये काला आदमी इतना हरामी

निकलेगा मुझे पता नहीं था। फिर एक दिन में रोजाना की तरह खेलने गया था, वैसे तो में रोजाना खेलकर 4 बजे से पहले घर नहीं लौटता था, लेकिन उस दिन मेरा पेट दर्द होने के कारण में जल्दी आ गया था, जब करीब 1 बज रहे होंगे। फिर मैंने

घर आकर देखा तो दीदी घर पर नहीं थी। फिर में जान गया कि दीदी बाथरूम में गयी होगी, फिर में बाथरूम की और गया। हमारा बाथरूम एक रूम है, जिसमें एक नल है और चद्दर की छत है और दरवाजे में बहुत से छेद भी है। अब अंदर से दीदी की

फुसफुसाने की आवाज़ें आ रही थी। अब दीदी आअहह ऊफफ्फ्फ आहिस्ता कोई देख लेगा हाईई कर रही थी। अब में तो डर गया था, फिर मैंने जैसे ही धीरे से दरवाज़े पर आँख लगाई तो में बिल्कुल चौंक गया। अब दीदी की साड़ी का पल्लू नीचे

गिरा था और वो काला आदमी दीदी के बिल्कुल पीछे चिपका हुआ था। अब उसका बायाँ हाथ दीदी की गोरी चिकनी कमर पर और दायाँ हाथ दीदी के दायें कंधे से होकर उनके ब्लाउज के अंदर उनके बायें बूब्स को मसल रहा था। फिर अचानक से दीदी

ने एक धक्का दिया और दरवाज़ा खोला तो में छुप गया और वो भागकर घर में घुस गयी। अब में कुछ सोच पाता उससे पहले ही वो काला आदमी भी दौड़कर उनके पीछे हमारे घर में प्रवेश कर गया। फिर मैंने सोचा कि ये ग़लत है, फिर सोचा कि इससे

एक बड़ा फ़ायदा भी है अगर यह सांड अपनी बीवी की तरह मेरी दीदी की कोख भर दे, तो दीदी सिर उठाकर जी पाएगी। फिर मैंने और देर ना करते हुए अपने घर के पीछे के पेड़ पर चढ़कर सूरज की रोशनी के लिए बनाये हुए छेद से घर के अंदर देखा

तो मेरे रोंगटे खड़े हो गये। अब दीदी दीवार से चिपकी हुई खड़ी थी और उनके ब्लाउज के बटन सामने से पूरे खुलकर उनकी बगल के पास झूल रहे थे और उनकी साड़ी ज़मीन पर पड़ी हुई थी। अब वो आदमी सिर्फ़ एक लूँगी पहनकर अपनी काली छाती

को दीदी की ब्रा से ढकी चूची को ऊपर दबाकर उनकी गर्दन को पागलों की तरह चूम रहा था। अब दीदी आहह हहाअ आहहह कर रही थी। फिर वो अपने दायें हाथ से दीदी की बाई चूची को ब्रा के ऊपर से मसलने लगा और दीदी के मुँह को चूमने लगा,

लेकिन दीदी ने अपना मुँह हटा लिया, तो वो वापस गर्दन पर आ गया। लेकिन इस बार उसने अपने बायें हाथ को दीदी के पेटीकोट के अंदर डाल दिया और उनकी चूत से खेलने लगा। अब दीदी कसमसा गयी और उसके हाथ को पकड़ लिया। फिर उस आदमी ने

अचानक से दीदी को पलट दिया और दीदी की ब्रा के हुक को एक ही झटके से खोल दिया और उनकी ब्रा के खुलते ही दीदी के बड़े-बड़े चूचे एक झटके से नीचे आ गये। फिर देखते ही देखते दीदी ने अपना ब्लाउज और फिर ब्रा उतारकर हवा में उछाल

फेंके, क्योंकि शायद अब दीदी भी बेताब हो गयी थी। फिर मुझे जो नज़र आया, वो में सह नहीं पाया और अपना लंड बाहर निकालकर मुठ मारना शुरू कर दिया, क्या बूब्स थे उफ़फ्फ़ एकदम सफेद गोल फूले हुए? और ऊपर के उभरे हुए हिस्से पर एक

चैरी कलर का दाना पूरा तना हुआ था। फिर उस आदमी ने जैसे ही दीदी को पलटा तो में पूरा पागल हो गया। फिर जल्दी से उसने अपने दोनों हाथों से दीदी की एक चूची को उठाया और अपने काले बड़े-बड़े होंठो में जकड़ लिया और फिर अपनी

आँखे बंद करके आराम-आराम से चूसने लगा। फिर दीदी को ऐसा गहरा अहसास हुआ कि वो चीख पड़ी। अब दीदी आआहह अआह्ह्ह हूहह हाईईई कर रही थी और अपने हाथ से उसके चेहरे को धकेलने लगी थी, लेकिन भला वो ऐसी खुशबूदार और लज़ीज़ चूची को

क्यों छोड़े? अब दीदी कसमसाकर नीचे बैठ गई थी और इसके साथ ही उनकी चूची उसके मुँह से पचक की आवाज़ के साथ फिसल गई थी। फिर उस काले आदमी ने गुस्से से दीदी की और देखा और बोला कि साली रंडी, इतनी खुशबूदार नाज़ुक और लज़ीज़

चूची तू अपनी चोली में छुपाना चाहती है, ला इन्हें आज मुझे जी भरकर चूसने तो दे। फिर मेरी दीदी बोली कि मेरी चूचीयों को छोड़ दो ये बहुत मुलायम है प्लीज। तो उस काले आदमी ने कहा कि चुप साली और फिर उस आदमी ने अपनी लूँगी

उतारकर फेंक दी, जिससे मुझे उसका लंड दिखा, जो कि 7 इंच लंबा और करीब 3 इंच मोटा होगा। फिर उसने दीदी के ऊपर आकर उनके दोनों हाथों को पकड़ लिया। अब तो दीदी भी समझ चुकी थी कि ये आदमी जानवर है और अब वो फंस चुकी है, फिर उसने भी

ज्यादा विरोध नहीं दिखाया। फिर उस आदमी ने दीदी के दोनों हाथों को अपने बायें हाथ से दीदी के सिर के ऊपर पकड़कर लॉक कर दिए। अब वो फिर से उनकी बाई चूची को अपने दाहिने हाथ से पकड़कर अपनी जीभ और होंठो से खेलने लगा।

दोस्तों ये कहानी आप सेक्सवासना डॉट कॉम पर पड़ रहे है। फिर उसने बारी-बारी करके 15-20 मिनट तक दीदी की दोनों चूचीयों को चूसा और चाटा। अब दीदी भी कभी अकड़ती तो कभी अपने पैरों को मोड़ती तो कभी पटकती और कभी अपनी चूचीयों को

ऊपर धकेलती और वो बहुत अच्छे से उन चूचीयों के स्वाद को चखता। अब इसी बीच उसने दीदी के पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया था, फिर वो उन्हें छोड़कर नीचे आ गया और दीदी के पेटीकोट और चड्डी को खींचकर उनके पैरों से निकाल दिया। फिर

उसने जैसे ही दीदी के पैरों को खोला तो वो देखता ही रह गया, एकदम बालों से भरी हुई चूत और बालों को बीच में से अलग करने पर पिंक गुलाब जैसी चूत, जो काम रस से पूरी तरह से गीली थी। अब उसके मुँह में पानी आ गया और वो उसे चाटने

चूसने लगा था। अब दीदी आअहह उहहुउ हहा साले गांडू करती रही और झड़ती रही और वो आदमी उनकी चूत के रस को पीता रहा। फिर वो 10 मिनट के बाद उठा और दीदी के मुँह में जाकर अपना लंड पेलने लगा, लेकिन दीदी ने फिर से अपना मुँह घुमा

लिया। फिर उसने कहा कि साली चुदवाएगी भी नखरे से, रुक दिखाता हूँ। फिर उसने अपने लंड पर थोड़ा सा थूक लगाया और दीदी की चूत पर रगड़ने लगा। फिर दीदी बोली कि घुसा साले, तो वो सिर्फ़ सुपाड़ा अंदर डालता और वापस बाहर निकाल

देता। फिर दीदी बोली कि अब तो घुसेड़ काले सांड के बच्चे। फिर उसने कहा कि तू बोल कि तू मेरी जीभ और लंड दोनों अपने मुँह में लेगी। फिर अब दीदी ने समय बर्बाद ना करते हुए कहा कि हाँ भोसड़ी के अब अंदर चोद। फिर उसने बोला कि

अब देख सांड कैसे चोदते है? और फिर एक ही झटके में उसका आधा लंड दीदी की चूत के अंदर चला गया। फिर दीदी जोर से चिल्लाई हाहहहह आहिस्ते कर रे उफ़फ्फ़ बहुत बड़ा है हाईईइ। फिर उस आदमी ने अपनी गांड को सख्त किया और धक्का

लगाने लगा। अब दीदी आअहह आहह सस्शह सस्शह हाईई करे जा रही थी। अब पूरा घर दीदी की सिसकारियों और फ़च-फ़च की आवाजो से गूँज रहा था। फिर वो धीरे-धीरे अपनी स्पीड बढ़ाता गया और अब उसका पूरा लंड अंदर बाहर होने लगा था। अब वो

चोदते-चोदते रूककर दीदी की चूचीयां चूसता और फिर दे-दनादन शुरू हो जाता था। अब दीदी भी नीचे से अपने चूतड़ उठा-उठाकर चुदवा रही थी। फिर थोड़ी देर के बाद वो दोनों उठे और वो आदमी बेड पर सो गया और दीदी उसके लंड पर अपनी चूत

फैलाक़र बैठ गयी और उछल-उछलकर चुदवाती रही और सिसकारियाँ भरती रही। फिर ये चुदाई 1 घंटे तक ऐसे ही चलती रही। फिर दीदी ने कहा कि हाह्ह्ह में तो फिर से झड़ने वाली हूँ आहह हूउ सस्शह। फिर उस आदमी ने कहा कि रुक में भी आ रहा

हूँ, नीचे उतर में अपना माल निकालूँगा। फिर दीदी ने कहा कि नहीं- नहीं अंदर झड़ जा बहनचोद आअहह। फिर उस आदमी ने कहा कि ठीक है सस्सह आह बोला और आखरी 5-6 धक्के मारकर लेट गया। फिर दीदी ने उससे कहा कि मेरे भाई का आने का टाईम हो

गया है और उसे उसकी लूँगी देकर भगा दिया। अब इस तरह दीदी रोज चुदती और में 15 दिन तक उनकी गोरी चूत से काले लंड की चुदाई देखकर मज़ा लेता। अब दीदी 6 महीने पेट से है और सिर्फ़ में ही जानता हूँ कि ये कमाल किसने किया था? अब दीदी

और उसके सुसराल वाले बहुत खुश है ।। धन्यवाद …
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