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एक मासूम चूत


दोस्तों ये कहानी आप सेक्सवासना डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

हैल्लो दोस्तों, में आज आप सभी को अपना एक सच्चा सेक्स अनुभव बताने जा रहा हूँ, जिसको पढ़कर में उम्मीद करता हूँ कि आप सभी को मजा जरुर आएगा, यह मेरा सेक्सवासना डॉट कॉम पर पहला सच्चा अनुभव है और अब में ज्यादा समय खराब ना

करते हुए सीधे अपनी आज की उस घटना पर आता हूँ जो कुछ समय पहले मेरे साथ घटी। दोस्तों जब में करीब 18 साल का था तो उस समय मेरे घरवाले एक नयी नौकरानी ले आए, वो दिखने में नेपाली जैसी थी, लेकिन उसकी चमड़ी बड़ी ही गोरी थी उसके

बूब्स बड़े ही मुलायम एकदम गोल बड़े आकार के थे और पतली दुबली सी थी, लेकिन फिर भी उसकी छाती और गांड का आकार उसकी लम्बाई कम होने की वजह से ज्यादा बाहर दिखने में आकर्षक लगता था वैसे उसकी उम्र उस समय करीब 18 साल की होगी,

लेकिन उसका स्वभाव बिल्कुल छोटे बच्चो जैसा था, वो हमेशा बच्चो जैसी हरकतें किया करती थी और उसकी बातें भी एकदम बच्चो वाली वो एकदम मासूम सी थी और वो अपने शरीर से तो बड़ी हो गई थी, लेकिन उसका मन बहुत साफ था वो दुनिया की

गलत भावनाओं से बिल्कुल बेख़बर थी। दोस्तों मेरे मम्मी, पापा दोनों ही डॉक्टर हैं इसलिए वो दोनों 90% घर से हमेशा बाहर ही होते थे और उस वजह से में घर पर बिल्कुल अकेला और इसलिए मेरे घरवालों ने घर के काम के साथ साथ मेरे

भी काम करने के लिए उसको नौकरानी को हमारे घर काम पर रखा था। दोस्तों वो अधिकतर समय फ्रॉक और टॉप ही पहनती थी या फिर सलवार सूट। उसके हर कपड़े के गले का कट हमेशा बहुत बड़ा होता था और इतना बड़ा कि बस निप्पल से ज़रा सा ऊपर

जिसकी वजह से मुझे हमेशा उसकी गोरी गोरी उभरी हुई सुंदर छाती नजर आती और जब वो नीचे झुककर झाड़ू लगाती तो मुझे वो पूरा सुंदर नजारा दिखाई देता, लेकिन बस उसके गले में एक छोटा सा लोकेट है जो हमेशा मेरी नज़रों को मामूली सी

रुकावट देता था, लेकिन फिर भी में उसको लगातार घूर घूरकर देखता रहता था और वो जब कभी नीचे बैठकर फर्श को कपड़े से साफ करती तो में उसके झूलते हुए बूब्स का वो मस्त नजारा देखकर अपनी आखों को सेकता था। दोस्तों मेरा स्वभाव

थोड़ा सा शर्मिला होने की वजह से में शुरू में तो उससे अपनी नज़रें छुपा लेता था, लेकिन दोस्तों दिल तो पागल है ना वो कहाँ किसी की बात सुनने को तैयार होता है इसलिए में धीरे धीरे अब उसकी तरफ कुछ ज्यादा ही आकर्षित होने

लगा था और उसके मज़े लूटने लगा। फिर में जब अपने स्कूल से घर पर आता तो मेरे आने के कुछ देर बाद जब में अपने कपड़े बदल लेता और दूसरे कामों से फ्री हो जाता तो वो मुझसे पूछकर मेरे लिए खाना लगा देती थी। फिर उसके बाद मेरी

उसके साथ हल्की फुल्की बातें शुरू होती और कभी कभी उन बातों से लड़ाईयाँ भी हो जाती, जिसकी वजह से वो कभी कभी रो पड़ती थी और वो मुझे मारने के लिए मेरे पीछे पढ़ जाती और में उससे बचने के लिए अपने कमरे में चला जाता और फिर

बिस्तर पर हम एक दूसरे पर टूट पड़ते। दोस्तों वो मुझे मारने के लिए बिल्कुल भी किसी भी बात की परवाह करे बिना मेरे ऊपर चढ़ जाती, जिसकी वजह से उसके झूलते लटकते हुए बूब्स मेरे सीने पर दबने लगते थे और में तो हमेशा उससे

थोड़ा दूर ही रहने की कोशिश करता था, लेकिन वो तो बिल्कुल ही अंजान थी, जैसे उसे पता ही ना हो कि वो एक लड़की है और में लड़का वो इस तरह से मुझसे लड़ती कि कई बार खुद जानबूझ कर उसके बूब्स को छू लिया करता था, लेकिन उसके इन सभी से

कोई भी फर्क नहीं पढ़ता था। दोस्तों हम दोनों कुछ ही सप्ताह में बहुत खुल गए थे और अब में भी उससे पूरी तरह से खुलकर लड़ता था और जब वो मेरे ऊपर बैठती या मुझसे लिपटती तो में भी उससे जानबूझ कर कसकर लिपट जाता और उस बिस्तर पर

हम दोनों लॉटपोट होते रहते थे। हमारी छाती के साथ साथ जांघो से जांघे भी रगड़ जाती थी और मेरा हाथ हम दोनों के शरीर के बीच में अटक जाता जो सीधा उसके गोल गोल पर लगता और में उनको दबाने लगता और बहुत बार उसका एक पैर मेरे

पैरों के बीच में चला जाता था और में तो बस उसे ज़ोर से पकड़ ही लेता था और उसके पैरों को अपने पैरों के बीच में फंसाकर मज़े लेता और जब कभी उसका हाथ मेरे लंड के पास से छूता हुआ निकलता तो में उससे बड़ी ज़ोर से चिपक जाता,

जिसकी वजह से उसका वो हाथ हमारे दोनों पैरों के बीच में ही फँस जाता था। दोस्तों यह सब बहुत अचानक से होता था, जब वो अपना हाथ बाहर निकालने की कोशिश किया करती उसकी वजह से मेरे खड़े लंड पर उसका हाथ हल्का हल्का हिलने लगता

और वो सब मुझे एक अजीब सा सुख देता, जिसको में किसी भी शब्दों में नहीं बता सकता, लेकिन उसका पूरा पूरा ध्यान तो बस मुझे मारने में ही होता था। दोस्तों ये कहानी आप सेक्सवासना डॉट कॉम पर पड़ रहे है। फिर कुछ दिनों बाद

गर्मियाँ आ गई और में अब सिर्फ़ कॉटन की एक छोटी सी निक्कर और बनियान में ही रहने लगा। दोस्तों उसको कोकरोच से बहुत ही ज़्यादा डर लगता था और यह बात मुझे पहले से ही पता थी इसलिए एक दिन मस्ती करते समय मेरे मन में एक शरारत

आई और में कहीं से मरा हुआ एक छोटा सा कोकरोच लेकर उसको डराने के लिए उसके पीछे भागने लगा जिसकी वजह से वो मुझसे दूर होते होते एक कोने में जाकर फँस गई। तभी मैंने सही मौका देखकर उस कोकरोच को उसके ऊपर फैंक दिया और अब मेरी

अच्छी किस्मत से वो कोकरोच गिरा भी कहाँ? वो जाकर सीधा उसके दोनों बूब्स के बीच में फंस गया उस कोकरोच को अपनी छाती पर देखकर वो बिल्कुल पागलों की तरह चिल्लाते हुए इधर उधर भागने लगी और में अब बहुत ज्यादा घबरा गया। तभी

मैंने उसके पास जाने की थोड़ी हिम्मत करके मैंने उसके पीछे से आकर उसकी कमर के सहारे से उसे ज़ोर से पकड़कर उसे नीचे गिरा दिया, लेकिन वो अब भी बहुत ज़ोर से चिल्ला और लगातार हिल रही थी, जिसकी वजह से उसको अपने काबू में

करना मुझे बहुत मुश्किल हो गया था और वो अपनी दोनों आखें बंद करके चीख रही थी। फिर में फटाफट उसके ऊपर चड़ गया और मैंने उसके दोनों पैरों को अपने घुटनों से रोक लिया और अपने एक हाथ से मैंने उसका मुहं बंद कर दिया, जिससे कि

उसकी चीखने की आवाज बंद हो जाए और अब में तुरंत अपने दूसरे हाथ को उसके थोड़े से ढीले उस टॉप के अंदर डालकर उस कोकरोच को ढूँढने लगा। तब मैंने महसूस किया कि उसका दिल तो उस समय डरने की वजह से इतनी ज़ोर से धड़क रहा था कि में

कुछ भी कर नहीं पा रहा था और वो लगातार उछल रही थी वो अपने एक हाथ से जैसे मुझे अपने से दूर करने की नाकाम कोशिश रही थी और मेरी कमर का हिस्सा उसकी कमर के ठीक ऊपर होने के कारण उसका एक हाथ अब सीधा मेरे लंड के पास ही जाकर अटक

गया मैंने उसी समय उसके हाथ को रोकने के लिए अपनी दोनों जांघो को कसकर दबा दिया, लेकिन अभी भी वो इतनी ज़ोर से मचल रही थी कि कोकरोच उसके बूब्स के बीच से ढूँढना बड़ा ही मुश्किल हो गया और मेरा एक हाथ उसके दोनों बूब्स को

इतनी ज़ोर से दबा रहा था कि जैसे कोई अपने एक सप्ताह पुराने गंदे कपड़े धो रहा हो, वो बिल्कुल ही चकित थी और मुझे इस बात का बिल्कुल भी पता नहीं था कि उस कोकरोच को ढूँढने की वजह से मुझे पता ही नहीं चला कि कब उसका एक हाथ

मेरी निक्कर के नीचे से अनजाने में अंदर फँस गया और मेरे हाथ की पकड़ उसके हाथ पर बड़ी अच्छी थी, लेकिन फिर भी उसका हाथ अंदर हल्का हल्का डोले जा रहा था। अब उसके नरम हाथों का स्पर्श पाने की वजह से मेरा लंड तो जैसे अब लोहे

का हो गया था, लेकिन उसका पूरा ध्यान तो सिर्फ़ कोकरोच पर ही था और बहुत हद तक मेरा भी दोस्तों यह सब होते हुए करीब चार से पांच मिनट गुज़र चुके थे। मुझे उस समय इतना मज़ा आ रहा था कि में आपको क्या बताऊँ? क्योंकि वो तो उस

कोकरोच की वजह से चिल्ला रही थी और में उस बात का फायदा उठाकर उसकी छाती को हल्के से दबाकर छूकर उसके मज़े ले रहा था और में अपने काम को करने के साथ साथ उसके गोल गोल बूब्स पर अपना हाथ घुमाकर उनको महसूस कर रहा था, लेकिन

उसकी चीख वैसी की वैसी ही थी। तभी कुछ देर बाद मुझे पता नहीं क्यों में उस पर बड़ी ज़ोर से चिल्ला पड़ा “छुउउउप्प्प, चुप करो चिल्लाना, बस मिल ही गया। में उस पर बस इतनी बात कहकर चिल्लाकर उसको देखा रहा वो तो जैसे मेरे

चिल्लाने से एकदम मर ही गयी हो, ऐसी बिल्कुल शांत हो गई और डर के मारे उसका वो हाथ अब मेरे लंड के ऊपर कसकर लिपट गया और घबराने के कारण वो एकदम चुप बिल्कुल बेजान हो गयी। उसकी दोनों आँखें खुली की खुली रह गई और उसका वो गरम

शरीर हल्का हल्का सा कांपने लगा था, वो तो जैसे मेरे नीचे पड़ी हुई बेहोश ही हो गयी हो ऐसे पड़ी रही और उसके ना हिलने की वजह से कोकरोच मुझे बहुत आसानी से मिल गया और फिर मैंने तुंरत अपना हाथ उसकी छाती के ऊपर से हटा लिया और

अब उसकी आखों से आँसू बाहर निकल चुके थे और में भी अब तक बहुत थका हुआ सा उसके ऊपर ही उसकी छाती पर अपना सर रखकर कुछ देर ऐसे ही लेट गया और वो ज़ोर ज़ोर से हांफती रही। दोस्तों अब उसके बूब्स दबाना और उसकी गांड पर हाथ फैरना

मेरे लिये सामान्य बात हो गई है, लेकिन अभी तक मैंने उसे चोदा नहीं है ।।
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