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साले तेरा लण्ड से चुदने के मज़े ही कुछ ओर है


दोस्तों ये कहानी आप सेक्सवासना डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

मै लियाना हूँ आगरा में मेरी खुद की दुकान है मात्र साड़ियाँ व औरतों के ही कपड़े है। कुछ रेडीमेड, कुछ थान, फिर चड्डी ब्रा इत्यादि। मजे की बात तो यह है कि मेरे जिस भाग में चड्डी ब्रा बिकती है वहाँ लड़के बहुत आते है, अपनी

गर्लफ़्रेन्ड के लिये मंहगी से मंहगी चड्डी और ब्रा खरीदते है। मैं भी मौका देख कर उन चूतियों को दाम बढ़ा चढ़ा कर बेचती हु। उन हरामियों को तो देख कर ही एकदम समझ जाती हूँ कि लड़का जब पारदर्शी चड्डी या ब्रा खरीदता है तो यह

अवश्य ही उसे चोदने के समय पहनाता होगा। आप लोग यह कहानी सेक्सवासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | तो मेरी यह कहानी १ साल पहले की है जो मै आप लोगो को बताने जा रही हूँ मेरी चूत भी क्या मस्त हमेशा गर्म ही रहती है मेरा पड़ौसी

अब्बास जो मेरा दोस्त भी था, एक दिन मेरी दुकान पर आया और बोला- लियाना, तू कब फ़्री रहती है? क्यू क्या बात है? बस तुझसे बात करनी थी ! भोसड़ी के, अब साला आशिकी झाड़ेगा ! लियाना, तू तो ना जाने क्यू मुझसे उखड़ी उखड़ी सी रहती है,

मेरा कसूर क्या है? भड़वे, यह देख, सभी अपनी दोस्त के लिये कितनी अच्छी अच्छी ब्रा और चड्डियां ले जाते हैं, और तेरी तो बेहन की, मेरे लिये कभी कुछ लाया है? सच लियाना, ये ले पांच सौ रुपया, और ले ले अपने लिये एक मस्त सी ब्रा और

चड्डी, बस अब तो खुश है ना? बस एक ही? मादरचोद, चूत तो तेरी है नहीं, अपनी गाण्ड में घुसा ले इसे। ऐसे फ़ोकटिये तो अल्लाह किसी के पास ना भेजे ! अब्बास का मुख लटक सा गया। मेरे पास तो अभी इतने ही हैं ! अरे रे रे … अब्बास

भाईजान, ये ब्रा और चड्डी ले ले बस … पर ये गाण्ड जैसा मुँह मत बना, अब मां चुदा तू अपनी ! मैंने उसे अपनी पसन्द की चार सौ की एक चड्डी और एक ब्रा दे दी। अब्बास ने शाम को मुझे फोन किया- लियाना, आज घर में कोई नहीं है, अपना

गिफ़्ट तो ले जा ! मेरे मन में खलबली सी मचने लगी। साला चार सौ का गिफ़्ट भी तो लाया है…हाय मेरा आशिक दीवाना … मेरा क्या जाता है अगर मैं उसे खुश कर देती हूँ तो। आप लोग यह कहानी सेक्सवासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | बेचारा मुझे

अब तो गिफ़्ट भी तो देने लगा है। मैंने अपना आजकल के फ़ैशन वाला ऊँचा सा सलवार कुर्ता पहना और अब्बास के घर चली आई। घर के बाहर से ही मुझे तेज इतर की महक आई। उह, लगता है अब्बास पूरी तैयारी में है। अरे लियाना, तू तो सच में आ

गई? अब चल मुझे चूतिया मत बना। मेरा गिफ़्ट मुझे दे ! ना ना… ऐसे नहीं… इसे पहनना पड़ेगा… बोल क्या कहती है? अरे हरामी … तू तो साले … तेरी अम्मां की … ला मुझे दे … क्या करेगा, मुझे नंगी देखेगा भोसड़ी के? तेरी बातों से मन मचल

जाता है यार… ला इधर दे… तेरे सामने बदलूँ या कमरे में जाना पड़ेगा? अब्बास तो यह सब सुन कर थर्रा सा गया। उसे क्या मालूम था कि मैं तो उसके सामने ही कपड़े बदल सकती हूँ। मैंने अपना कुर्ता उतारा। अन्दर मैंने ब्रा नहीं

पहनी थी। पहनने की आवश्यकता भी नहीं थी। वो तो वैसे भी सीधे और तने हुए थे। मुझे देख कर अब्बास तो पगला ही गया। फिर मैंने अपना पायजामा उतार दिया। भीतर चड्डी भी नहीं पहनी थी। मेरी चूत और गाण्ड देख कर उसके पसीने छूटने

लगे। मैंने उसकी चड्डी और ब्रा पहन ली। और वैसे ही खड़ी होकर उसे घूम घूम कर दिखाने लगी। अब बता कैसी है? आ…अ… तू क्या चीज है लियाना… मादरचोद, मैं चड्डी ब्रा के लिये पूछ रही हूँ ! बस एक बार मेरे गले से लग जा ! मैं मन ही मन

मुस्करा उठी- तो आ जा … लग जा गले से ! ओह हरामी साला … लौड़ा देखो तो कैसे तन्ना रहा है, यह आज मुझे चोदे बिना मानेगा नहीं। वो मेरे पास आया और मुझे ललचाई नजरों से ऊपर से नीचे देखता ही रहा। फिर हाथ बढ़ा कर मेरे शरीर को छूने

लगा, मेरी पीठ को सहलाने लगा, मेरी तनी हुई सख्त हुई चूचियों को सहलाने लगा। आप लोग यह कहानी सेक्सवासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | फिर मेरी कमर और फिर चूतड़ों को अपने हाथों से सहला-सहला कर देखता रहा। फिर धीरे से उसने मेरी

चूत पर हाथ रख कर सहलाया। आखिर मैं भी तो जवान थी। मेरी चूत गीली होने लगी। फिर उसने मुझे जोर से अपनी बाहों में लिपटा लिया। मेरा दम घुटने लगा- अरे मादरचोद, मुझे मार डालेगा क्या? लियाना, बस तुझे चोदना है … एक बार चुदा

ले ! अरे जा, बाप का माल है क्या जो चुदा ले? हारामी साला ! प्लीज लियाना, बस एक बार तो मान जा … देख तेरी चूत भी तो गीली हो गई है। तो… तो क्या … बोल चोदेगा मुझे, भड़वा साला…… अच्छा चल, उधर बेडरूम में चल ! ऐईईईइ या…… मेरी

लियानाऽऽऽऽऽऽऽ … चल चल यार जल्दी चल ! अब्बास तो जैसे उछल ही पड़ा। अब मैं भी क्या करती चुदे हुए भी बहुत महीने हो गये थे। अब लण्ड मिल रहा है तो क्यूँ छोड़ना उसे। चल उतार दे अपनी चड्डी बनियान ! मैंने अब्बास को कहा। ओह

मेरी लियाना, तुझ पर मेरी जान निछावर … ये ले अभी उतारी ! वो तो झट से नंगा हो गया। उसका खुला हुआ सुपाड़ा बहुत सुन्दर लग रहा था। कड़क लण्ड ! आह ! यह तो काफ़ी लम्बा है… मोटा नहीं है तो क्या हुआ, लम्बा तो मस्त है, दूर तक जायेगा।

मेरी चूत गुदगुदा उठी। आ तेरा लण्ड मल दूँ, फिर चूसूंगी ! अब्बास तो खुशी के मारे बावला हुआ जा रहा था। मैंने उसे बिस्तर के पास खड़ा कर दिया। मैं स्वयं बिस्तर पर बैठ गई और उसका लण्ड सहलाने लगी। आप लोग यह कहानी

सेक्सवासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | लम्बा था शायद ८ इंच से अधिक ही होगा। मैं पहले तो उसे मलती रही। आह ! क्या सख्ती थी लौड़े में… जवान जो था… उसमें से अब थोड़ा थोड़ा रस टपकने लगा था। मैं अपनी जीभ से उसे चाटती भी जा रही थी।

मैं जितनी सख्ती से उसे चूसती थी उतना ही वो अपना प्रेम रस छोड़ता जा रहा था। मैं उसे बाखुशी जीभ में उतार कर मजे से उसका स्वाद लेती थी। अब्बास भाई, मेरी चूत चूसेगा? अरे यह चड्डी और ब्रा तो उतार, मजा आ जायेगा तेरी चूत

का तो ! सुन रे कुत्ते, मेरी चूत को काटना नहीं, बस लप लप करके चाट लेना ! तो घोड़ी बन जा … पीछे से कुत्ते ही की तरह से चाटूँगा। मैं घोड़ी बन गई। फिर वो मेरे पीछे आ गया। मुझे अपनी गाण्ड पर ठण्डक सी लगी। वो मेरी गाण्ड सूंघ

रहा था, फिर वो मेरी गाण्ड चाटने लगा। आ तेरा लण्ड मल दूँ, फिर चूसूंगी ! अब्बास तो खुशी के मारे बावला हुआ जा रहा था। मैंने उसे बिस्तर के पास खड़ा कर दिया। मैं स्वयं बिस्तर पर बैठ गई और उसका लण्ड सहलाने लगी। लम्बा था

शायद आठ इंच से अधिक ही होगा। मैं पहले तो उसे मलती रही। आह ! क्या सख्ती थी लौड़े में… जवान जो था… उसमें से अब थोड़ा थोड़ा रस टपकने लगा था। मैं अपनी जीभ से उसे चाटती भी जा रही थी। मैं जितनी सख्ती से उसे चूसती थी उतना ही वो

अपना प्रेम रस छोड़ता जा रहा था। मैं उसे बाखुशी जीभ में उतार कर मजे से उसका स्वाद लेती थी। अब्बास भाई, मेरी चूत चूसेगा? अरे यह चड्डी और ब्रा तो उतार, मजा आ जायेगा तेरी चूत का तो ! सुन रे कुत्ते, मेरी चूत को काटना

नहीं, बस लप लप करके चाट लेना ! तो घोड़ी बन जा … पीछे से कुत्ते ही की तरह से चाटूँगा। मैं घोड़ी बन गई। फिर वो मेरे पीछे आ गया। मुझे अपनी गाण्ड पर ठण्डक सी लगी। वो मेरी गाण्ड सूंघ रहा था, फिर वो मेरी गाण्ड चाटने लगा। यह

क्या कर रहा है भड़वे…? अरे, कुत्ते की तरह पहले गाण्ड सूंघा और फिर उसे चाट लिया … क्या गलत किया? बावला है साला ! मैं हंस पड़ी….मेरी चूत बहुत गीली होने लगी थी। पर उसका गाण्ड के छेद को चाटना बन्द ही नहीं हो रहा था। अह्ह्ह !

मैं तो तड़प उठी थी उसका लण्ड खाने के लिये…। तभी उसकी लम्बी जीभ मेरी चूत पर चिपक गई। आप लोग यह कहानी सेक्सवासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | मुझे बहुत आनन्द आया। वो मेरी चूत का रस पी रहा था- लियाना, साली मजा आ गया … छिनाल,

क्या स्वाद है तेरी चूत का ! तो हरामी रगड़ दे ना ! देख क्या रहा है? मेरा लण्ड ! आह इतना सख्त हो गया है कि बस ! अब्बास अपने लण्ड की तरफ़ देख रहा था। तभी उसका लण्ड मेरी चूत से टकराया। हाय अल्लाह, घुसेड़ दे ना मेरे मौला ! तभी

उसका सुपाड़ा मेरी चूत में घुस गया। मुझे लगा अह्ह्ह्ह हाय रे अम्मी, ये तो घुसता ही जा रहा है। भाई जान, कितना लम्बा है रे तेरा लण्ड? बस गया ही समझो ! अरे बस, बहुत हो गया … फिर मैं चीख सी उठी। बाबा रे, यह तो बहुत गहराई

में चला गया है, कहीं मुँह से बाहर तो नहीं आ जायेगा? तभी उसका लण्ड गुदगुदाता हुआ बाहर निकला और फिर गहराई में जाने लगा। हाय, अब तो मैं मजे के मारे मर ही गई। साले तेरा लण्ड है या मजे की खान … बहुत अन्दर तक जाकर चोदता है

साला। बस जोर जोर से चोद दे ! ये ले मेरी लियाना, आज तू भी अब्बास का लण्ड ये ले, साली … छिनाल … ले खा मेरा लौड़ा… इतनी मस्ती लम्बे लण्ड से मिलती है, हाय मैं तो उसकी मुरीद हो गई। उसके कुछ ही धक्कों ने मुझे चरमसीमा तक

पहुँचा दिया। फिर मुझे पूरी संतुष्टि का अहसास हुआ और मैं जोर से झड़ गई। बस बस कर अब्बास… मैं तो बुरी तरह से चुद गई … अब छोड़ दे ! अरे लियाना मेरा क्या होगा … ओह तो क्या करूँ मैं, चल तो मेरी गाण्ड चोद दे ना … बस? उसने जब

लण्ड बाहर निकाला तो लगा कि जैसे भीतर से कोई जादूगर रस्सी खींच कर निकाल रहा हो। आप लोग यह कहानी सेक्सवासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | फिर मुझे एक ओर मस्त गुदगुदी सी और हुई और उसका लण्ड मेरी सैकड़ों बार चुदी चुदाई गाण्ड

में घुस गया। पर आप क्या जानें, हर गाण्ड चुदाई अपना एक मजा होता है, हर लण्ड एक प्यारा सा स्वाद। ओह्ह … अरे बस कर … क्या पेट में ही घुसा देगा। फिर से मैं चिल्ला उठी। पर उसका लण्ड प्यार से घुसता ही चला जा रहा था। अरे ये

जाने कहाँ घुसा जा रहा है मां के लौड़े … बस बहुत हो गया। पर उसने अपना पूरा लण्ड घुसा कर ही दम लिया। मुझे लगा कि जैसे किसी ने मेरी गाण्ड में कीला ठोक दिया हो। फिर सहसा मुझे आराम सा मिला और गुदगुदी सी भी हुई। उसने अपना

लण्ड बाहर निकाल लिया। मेरी गाण्ड को राहत सी मिली। पर फिर मेरी आँखें उबल पड़ी। वो तेज गति से फिर पूरा घुस गया। इसी तरह कई बार उसका लण्ड मेरी गाण्ड में घुसता निकलता रहा। इस तरह मेरी गाण्ड मस्ती से चुदने लगी। मुझे अब

मजा आने लगा था। फिर मुझे लगा कि अब्बास का माल निकलने वाला है। उसके धक्के बहुत तेज हो गये थे, मेरी चूत भी फिर से झड़ने को थी। तभी अब्बास जोर से झड़ गया। उसका रस मेरी गाण्ड में भरने लगा। मुझे उसका वीर्य गाण्ड में बहुत

भला लगा। उसका लण्ड वीर्य की चिकनाई से फ़िसलता हुआ बहर आ गया। अब्बास अब तू सीधे लेट जा … मैं भी अपने आप को झाड़ लूँ ! वो हांफ़ता हुआ सीधे हो गया और मैंने अपनी नरम सी चूत उसके होंठों से लगा दी। जोर से चूस ले मेरी जान, मेरे

भाई जान ! उसने जोर से चाटना और चूसना शुरू कर दिया। किनारे लगती हुई नैया सहारा पा कर झड़ने लगी। ओह्ह्ह कितना आनन्द आ रहा था। थोड़ी सी देर में मैं कई बार झड़ चुकी थी। सो मैं निढाल हो कर लेट गई। लियाना उठ, अब देर ना कर, ११

बजे रात तक तो अब्बू आ जायेंगे ! मैंने जल्दी से उठ कर चड्डी ब्रा सहित अपने कपड़े पहने और जाने के लिये तैयार हो गई। मुझे कोई भी लफ़ड़ा नहीं चाहिये था, किसी के भी आने के पहले मुझे चले जाना चाहिये था। तो अब्बास भाई जान, अब

मुझे अगला तोहफ़ा कब दे रहे हो? मैंने मुस्कराती हुई बोली। मुझे तो वो भा गया था, साले को यूँ कैसे छोड़ दूँ । पर साथ में कुछ माल ताल भी गिफ़्ट में मिल जाये तो क्या बुरा है। आप लोग यह कहानी सेक्सवासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे है |

अब्बास तो यह सुन कर पागल सा हो गया। उसे तो कानों पर जैसे विश्वास ही नहीं हो रहा था। लियाना मेरे से और चुदेगी। लियाना जान, बस जल्दी ही, जैसे ही पैसे आ जायेंगे … तुम्हारा गिफ़्ट तैयार … पर लियाना तुम मेरे घर आ जाओगी

ना? पहले तो मैंने अपनी नजरें झुकाई, फिर धीरे से मुस्करा कर नजरे उठा कर अब्बास को देखा। फिर मेरी एक आंख दब गई और वो खुशी के मारे उछल पड़ा। और मै अपना गिफ्ट लेकर अपने घर आ गयी तब से अब तक कितनी बार चुदा चुकी हु | कम से कम

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