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ससुर जी के लॅंड मे अभी नही पड़ी ठंड


दोस्तों ये कहानी आप सेक्सवासना डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

मेरा नाम अंकिता है घर मे सब मुझे प्यार से अंकु कहकर बुलाते है. मे ऊP के एक छोटे टाउन मे रहती हू. मेरी उमर 32 य्र्स. है और मेरी शादी को 7 साल बीत चुके है.इस सेक्स वासना कहानी मे आपको मैं अपने ससुर के साथ हुए सेक्स की

स्टोरी सुनने जा रही हू . मेरे हज़्बेंड के साथ झगड़ा होने की वजह से मैं अपनी ससुराल मे अपने इन लॉस के साथ रहती हू और हज़्बेंड दूसरे सिटी मे रहते है. मेरे इन लॉस मुझे बिल्कुल भी पसंद नही करते है क्योकि वो मुझे उनके

बेटे के अलग रहने का दोषी समजते है मे एक स्कूल टीचर हू. मेरे फादर इन लॉ का नाम दिग्विजय है.उनकी आगे एज कोई 51 यियर्ज़ के लगभग होगी. फादर इन लॉ का शरीर एक दम कसा हुआ है और उनका कद तोड़ा ठिगना है. मेरी मदर इन लॉ मेरे

हज़्बेंड के साथ ही रहती है. और मैं फादर इन लॉ के साथ घर मे रहती हू .मैं उन्हे डॅडी जी कहकर बुलाती थी. मेरे हज़्बेंड कभी कभी ही घर पे आते है. मैं अपनी बॉडी का डिस्क्रिप्षन दे रही हू जिससे आप लोगो को मेरी एक इमॅजिनरी

बॉडी बनाने मे मदद मिल सके. मेरी हाइट थोड़ी कम है यानी की 5’2 के आसपास ही होगी. मेरा स्किन का कलर फेर है एक दूध माखन जैसा. मेरा बदन एक दम भरा हुआ है. मेरी छातियाँ दूध से भारी हुई है और निपल चॉकलते कलर के है. मेरी ब्रेस्ट

का साइज़ 34सी है. मेरे बाल ब्लॅक आंड ब्राउनिश कलर के है. मेरे हिप्स का उभर ऐसा है जो किसी भी मर्द को बेचैन करने के लिए काफ़ी है. जब मे सॅडी पहनती हू तो और भी खूबसूरत लगती हू. मेरी शादी 25 यियर्ज़ मे हुई थी. मेरे

हज़्बेंड का नाम राज है और उनकी उमर 35 य्र्स है. हाइट भी मेरे बराबर की है और सरीर दिखने मे आवरेज है.कॉलेज मे कई लड़को ने मुझे प्रपोसे काइया बुत मैने किसिको को सीरीयस नही लिया क्योकि मैं सिर्फ़ अपने पति को अपने सरीर

का गिफ्ट देना चाहती थी. जब मेरी सदी हुई थी तो मई कुवारि थी और मेरे पति ने ही पहली बार मुझे सुहग्रत को छुआ था. यह घटना कुछ समय पहले ही घाटी और मैं किसी को ये बाते बता भी नही सकती थी, जिससे मैने ये सोचा की ये मैं आप लोगो

के साथ शेर करू. एक दिन की बात है गर्मी के मौसम मे मैं कामन बातरूम मे नहा रही थी क्योकि मेरे बातरूम का शवर खराब हो गया था. कामन बातरूम का लॉक कुछ खराब था, मैने सोचा की रात मे कौन आएगा तो जिसकी वजह से मैने ऐसे ही डोर बंद

कर दिया था. मैने अपने सारे कपड़े उतार दिए थे और शवर के नीचे खड़े होकर शवर ले रही थी.तभी अचानक से डोर खुला तो मैने देखा की मेरे फादर इन लॉ सिर्फ़ लूँगी मे खड़े थे.मैने एक दूं चौक कर टवल को उठाया और लपेटने लगी लेकिन तब

तक फादर इन लॉ ने मेरे सारे अंगो को बड़े आचे तरीके से देख लिया था और वो बातरूम से बाहर निकल गये.मैं जल्दी से नाहके बाहर निकल आई. फादर इन लॉ ने बाहर आने के बाद मुझे डाटा और बोला की दरवाज़ा बंद करके नही नहा सकती हो और बाद

मे कहोगी की मैने तूमे इस अबस्ता मे देखा. मैने दादाजी को सॉरी बोला और अपने रूम मे चली गई. इस घटना के बाद दादा जी का बिहेवियर मेरी तरफ बदल गया था. मैं जब भी किचन मे काम करती थी वो मेरा हाथ बताने आ जाते थे और मेरे अंगो को

निहारते रहते थे और मुझे चुने का मौका ढुड़ते रहते थे. सनडे का दिन था मैं फ्रेश होकर ब्रेकफास्ट प्रिपेर कर रही थी की तभी डॅडी जी ने मूज़े आवाज़ लगाई की अंकु आज बाहर चलते है कही घूमने तुम रेडी हो जाओ जल्दी से.मैने

ब्रेकफास्ट लगाया और हम दोनो ने ब्रेकफास्ट किया और हम दोनो मार्केट घूमने चले गये. डॅडी जी ने मूज़े एक येल्लो कलर की साड़ी दिलाई और मैं बहुत खुस हो गई थी की डॅडी ने मूज़े माफ़ कर दिया है और सयद मेरी जिंदगी मे सब ठीक

हो जाएगा पर मूज़े कहा पता था की ये तूफान आने से पहले की शांति है. अगले दिन मेरा बर्तडे था तो मुझे ये ख़ुसीयन बर्दाश्त नही हो पा रही थी की इतनी सारी ख़ुसी एक साथ मुझे कैसे मिल गयी. शाम को जब हम लोग घर पे आ गये थे तो डॅडी

जी ने कहा की अंकु कल तुम यही साड़ी पहनना. मैने डॅडी जी को भी निराश नही करना चाहती थी और मैने झट से हा कर दी. अगले दिन जब मेरी आँख खुली तो मैने देखा की मेरे हज़्बेंड का मेसेज आया था. मेरे हज़्बेंड ने मूज़े बर्तडे विश

किया और बोला की अंकु अब मैं तुमसे कोई झगड़ा नही करना चाहता हू और मुझे ई लोवे योउ भी बोला मैं बहुत खुस हो गई थी मैने भगवान को धन्याबाद बोला और मैं फ्रेश होने चली गई. मैने फिर डॅडी जी वाली सॅडी पहनी थी और मॅचिंग की

पेंटी और ब्रा पहनी मैं उस साड़ी मे एक दूं खिली खिली लग रही थी. मैं किचन मे ब्रेकफास्ट बना रही थी की तभी डॅडी जी भी आ गये और मेरे पीछे खड़े हो गये और मूज़े बर्तडे विश काइया. डॅडी जी बोले की गिफ्ट नही लॉगी क्या मैने

कहा हा ज़रूर तभी उन्होने मूज़े पीछे से पकड़ लिया और मेरे खुले पेट पर हाथ फेर कर बोले मैं हू तुम्हारा गिफ्ट. मैं एकद्ूम चौंक गई और डॅडी जी को धक्का मारकर दूर करने की कोसिस की पर डॅडी जी ने मूज़े कसकर पकड़ लिया मैने

कहा की आप को क्या हो गया है. मे आपकी बहू हू मैं आपकी बेटी समान हू प्लीज़ मुझे छोड़ दीजिए और मैं रोने लगी.वो बोले की अंकु जब से मैने तुम्हारे नंगे बदन को देखा है तभी से उसे पाने की चाहत हो गई है मैं इस बदन को ले के ही

मनुगा. मैं रो रही थी और अपने आपको छुड़ाने की कोसिस कर रही थी लेकिन डॅडी जी के मर्डाने जिस्म के आयेज मेरी कोसिस बेकार साबित हो रही थी. डॅडी जी ने मुझे अपनी बहो मे क़ैद कर रखा था और मैं अपने फूले हुए चूतादो पे कुछ

चूबता हुआ महसूस कर रही थी. डॅडी जी मेरी गर्दन को चूम रहे थे और उनके हाथ मेरे पेट को सहला रहे थे, मैं रोए जा रही थी और छुड़ाने का प्रयास कर रही थी. पर काफ़ी दीनो से पति के साथ सेक्स ना करने से मेरा कंट्रोल मुजसे छूटता

जा रहा था और मेरा विरोध कम होने लगा था. डॅडी जी ने मेरा फेस अपने सामने किया और अपने घुटने के बाल बैठ कर मेरे पेट पे अपनी जीभ से चूमने लगे. मैं फ्रेश होकर आई थी और सयद मेरी पर्फ्यूम ने उन्हे और भी मदहोश कर दिया था.

डॅडी जी की लार से मेरा पूरा पेट एक दम गीला हो चुका था. वो अपने दतो से मेरे पेट को काटने की कोसिस कर रहे थे.उनके दतो के बार से मेरे पेट पे लाल निशान पॅड गये थे. डॅडी जी अपने हाथो से मेरे च्यूटाडो को साड़ी के उपर से ही मसल

रहे थे और मूज़े अपने कंट्रोल मे करने की कोसिस कर रहे थे.मैं हर नही मानना चाहती थी. मैने उन्हे धक्का देकर अपने रूम की तरफ भागने की कोसिस की पर मेरी सॅडी खुल गई और पैर फस गया जिससे मैं गिर गयी. डॅडी जी बोले अंकु प्लीज़

मान जाओ ज़िद मत दिखाओ मई तुम्हारी जिंदगी बदल दूँगा तुम्हारी ख़ुसीयन वापस आ जाएँगी.डॅडी जी ने ज़मीन पर ही मेरी टॅंगो को अपने हाथो मे पकड़ लिया और मेरे पैर के अंगूठे को मूह मे लेकर चूसने लगे टाँगे उपर उठाने की वजह

से मेरा पेटीकोत मेरी थाइस के उपर चाड गया डॅडी जी को मेरी ढूढ़िया और मखमली जाँघो के दर्शन होने लगे. वो जल्दी से नीचे बैठ गये और मेरी थाइस को अपने दातों से काटने और अपनी जीभ से चूमने लगे मैं मदहोश हुई जा रही थी और

सेक्स का खुमार मेरे सर पर चड़ता ही जा रहा था.उन्होने मेरा येल्लो कलर का पेटीकोत को उपर कर दिया और मैं जो येल्लो कलर की चड्धि पहनी थी अब वही मेरी सुनी चूत को छुपाए हुई थी. मखमली और चिकनी जंघे और टाँगे उनके सामने थी वो

उन्हे सहला रहे थे. मैने बहुत दीनो बाद किसी मर्द का हाथ अपने बदन पर महसूस किया था जिससे मेरा विरोध ख़तम सा ही हो चुका था और सेक्स की खुमारी चाड रही थी. डॅडी जी ने मूज़े गोद मे उठाकर मेरे रूम मे लाकर बेड पे लिटा दिया और

मुजसे बोले अंकु वा क्या जिस्म पाया है तुमने राज को ठीक से इसका मज़ा लेने भी दिया है की नही, चलो वो ना सही उसके पापा तो है तुम्हारा इस जिस्म की मज़ा लेने को. आज तो जी भरके प्यार करूँगा तुम्हारे बर्तडे के लिए इससे अछा

गिफ्ट कोई नही हो सकता है. डॅडी जी भी मेरे पास ही लेट गये और मेरे होतो को चूसने लगे होतो को काटकर बिल्कुल लाल कर दिया था.वो मेरे गालो पेर दाँत से काट रहे थे.मैं उनका विरोध कर रही थी पर वो कम था. डॅडी जी ने फिर मेरे

ब्लाउस के अंदर हाथ डाला और दूध को दबा रहे थे. वो अपनी उंगली से निपल को दबा दबा कर खेल रहे थे. मैं अपना होश ही खो चुकी थी. सेक्स का जादू मेरे सर पे चाड गया था मैं आहे भर रही थी और गरम गरम साँसे छोढ़ रही थी. डॅडी जी ने एक

हाथ से हुक खोलकर मेरा ब्लाउस भी अलग कर दिया मैने अपने दूध को छिपाने की कोसिस की तो उन्होने मेरा हाथ हटा दिया और मेरी ब्रा को नीचे खिसका कर दूध बाहर निकल लिए. मेरे बुबो को चूसने लगे और अपने डातों से मेरे निपल को काट

रहे थे. मूज़े दर्द के साथ साथ एक आनंद मिल रहा था मेरी आँखो बंद हो चुकी थी. मैं उनके ताने हुए लंड को अपनी जाँघो पे महसूस कर रही थी. डॅडी जी ने मेरी नाभि मे जीभ फिरना सुरू कर दिया और अपने हाथो से मेरे दोनो दूधो का कचूमड़

बना रहे थे, मूज़े बहुत दर्द हो रहा था पर मेरी सुनने वाला वाहा कोई नही था. मेरे सफेद दूध एक दूं लाल पद चुके थे. मेरे दूधो को खूब चूसने के बाद ही उन्होने मूज़े आराम लेने दिया. मैं अपने पेटीकोत मे थी और मेरे उपर के जिस्म

पे मेरी एल्लवो ब्रा ही थी जो उन्होने पेट पे खिसका दी थी. डॅडी जी ने मेरे पेटीकोत को उपर उठा दिया और चड्डी मे हाथ डाला तो जैसे ही मेरी छूट पर उनकी उंगली का स्पर्श हुआ मूज़े एक दूं से करेंट सा लग गया मैने एक दूं से उनका

हाथ पकड़ लिया और अपनी जंघे बंद कर ली. मैं अपनी छूट को एक दूं सॉफ करके रखती थी और आज ही उसको शेव किया था जिससे एक भी बाल मेरी छूट पे नही था. मैं बेड पे सीधा होकर लेती थी और डॅडी जी का मूह एक दूं मेरी जाँघो के बीच मे था.

डॅडी जी ने मेरी चड्धि को टॅंगो से नीचे खिसका कर अलग कर दिया और अपनी जीभ से मेरी छूट को चाटने लगे. मेरी छूट को खा जाना चाहते थे. मेरा तो बुरा हाल हो चुका था और मई सही ग़लत भूल चुकी थी. मेरी छूट भी उनकी सलाइवा से भीग कर एक

दूं गीली हो चुकी थी और रस उगल रही थी. डॅडी जी अपनी जीभ को अंदर तक ले जा रहे थे मैं उनके सर को पकड़ कर अपनी छूट चटवा रही थी, मेरी तो हालत बिल्कुल खराब हो चुकी थी. मेरी मांसल जांघे उनके हाथो मे नही आ रही थी. वो मेरी चिकनी

जाँघो को सहला रहे थे. डॅडी जी तोड़ा उठ कर बैठे और मूज़े घुमाया जिससे मेरे गोल गोल चूतड़ उनके मूह के सामने आ गये. डॅडी जी मेरे चूतादो को अपने हाथो से तेज़ी से दबाने लगे थे. और कुछ देर बाद अपनी जीभ से चूमने लगे.मेरी

छूट से भी रस निकल रहा था. मैं आहे भर रही थी. घर के सन्नाटे को मेरी सिसकारियाँ चियर रही थी. और एक बहू अपने ससुर के सामने अपना समर्पण कर चुकी थी. मैं चूतादो मे उनका मूह दबा रही थी वो मेरे गांद के छेड़ को अपनी जीभ से

छेड़ने लगे मैं अहहह अहहाहह कर रही थी. डॅडी जी के काटने की वजह से मेरे जंघे और चूतड़ एक दूं लाल हो कर खिलने लगे थे. डॅडी जी ने बरी बरी से मेरे दोनो चूतादो को खूब चूसा और अपने हाथो से मेरे दूधो को दबाने लगे.डॅडी जी ने

फिर मेरी छूट के उपरी भाग को अपनी उंगली से छेड़ना सुरू कर दिया मैं आहे भर रही थी और आअहह आ की आवाज़ निकल रही थी. डॅडी जी सिर्फ़ पायजामा और बनियान ही पहने थे. फिर अपना पायजामा उतार दिया और उसके अंदर कुछ नही पहना था.

उनका कला लंड मेरी आँखो के सामने था. उनका लंड मेरे पति के लंड से छोटा था पर मोटा जाड़ा था. डॅडी जी के लंड के चारो र काले बालो का गुकचा था. और उनकी जाँघो पे भी बाल थे. मैने डॅडी जी का लंड शर्मा कर देख रही थी और मैं सोच रही

थी अब ये कला लंड मेरी छूट मे कैसे घुसेगा बहुत दर्द होगा. डॅडी जी ने मेरे गोरे गोरे हाथो मे अपना कला लंड पकड़ा दिया और उसको सहलाने को कहा मेरे हाथ खुद बा खुद उनके काले मोटे लंड को चुने लगे. मैने उसकी मोटाई को छुआ तो

उनका लंड मेरे हाथो मे नही आ पा रहा था. उसका टोपा भी एक दूं फूला हुआ था और तपते लोहे जैसा गरम था. जहा एक र मेरे दूध और जांघे ठंडी थी वही दूसरी ओररे डॅडी जी का लंड एक दूं आग उगल रहा था. थोड़ी देर तक सहलाने के बाद डॅडी जी ने

अपने लंड को मेरे मूह मे घुसेड़ने की कोसिस की मैने माना किया तो ज़बरदस्ती बाल पकड़ कर मेरे मूह मे अपना लंड दल दिया दूं घुटने की वजह से मेरी आँखो मे आँसू आ गये.वो मेरे बाल पकड़ के मेरे मूह मे धक्के लगाने लगे थे. फिर

उन्होने मुजसे कहा की इसको लोल्ल्यपोप की तरह चूसो.थोड़ी देर तक बाइसे ही चूसने के बाद डॅडी जी ने अपना लंड मूह से हटा लिया. डॅडी जी ने मुझे बेड पे सीधा लिटाया. मेरे बदन पे पेटीकोत अभी भी था. डॅडी जी ने छूट पे अपने लंड

को रगड़ना सुरू कर दिया. उनके लंड का टोपा मेरी छूट के मूह मे ठीक से नही आ पा रहा था. मैं उनके धक्को को झेलने के लिए अपने आप को तैयार कर रही थी. मेरी छूट बहुत दीनो से सुनी पड़ी थी जिससे एक दूं टाइट थी. मैने उन्हे रोकना

चाहा पर उनके जबरदस्त धक्को के सामने मेरा विरोध फीका पद गया. जैसे ही उनका लंड पहली बार मेरी छूट मे घुसा मेरी तो साँसे ही रुक गई और मैं चीख पड़ी. उनके दोनो घुटने बेड पे थे और मेरे घुटने उनके कंधे के पास थे. मेरी टांगे

हवा मे लहरा रही थी. डॅडी जी ने रुक कर लंड को धीरे धीरे आयेज पीछे करना सुरू किया और मूज़े तब जाके कही साँस आई. डॅडी जी बोले आह कितनी टाइट छूट है अंकु. डॅडी जी का मूह मेरे मूह के बिल्कुलुपर था और उनके मूह से गर्म साँसे

निकल रही थी. वो जब बी मेरी आँखो मे देखते तो तेज़ धक्का लगा रहे थे. डॅडी जी के धक्के के कारण उनकी दोनो पोते मेरी गंद पर टकरा रहे थे उनमे से पाट पाट की आवाज़ आ रही थी. डॅडी जी ने अपने धक्के बड़ा दिए थे मैं बस उन धक्को का

आनंद उठाने लगी थी मेरा पूरा सरीर धक्को से आयेज पीछे हो रहा था. डॅडी जी मेरी सुनी पड़ी छूट की जबरदस्त चुदाई कर रहे थे उनके हाथो मेरे दूधो को मसल रहे थे मैं एक दूं से स्वर्ग मे पहुच चुकी थी. डॅडी जी के हर धक्के के साथ

अनाँन्ड़ बदता ही जा रहा था.तभी ससुरजी रुक गये और उन्होने अपना लंड मेरी छूट से बाहर निकल लिया और उनका ताना हुआ लंड मेरी छूट के पानी से चमक रहा था. डॅडी जी ने आक्षन बदला और मूज़े उल्टा कर के जनवरो की तरह झुका दिया और

मेरे उपर चाड़कर पीछे से चढ़ कर मेरी छूट मे अपना लंड घुसने लगे. उनकी जांघे मेरी जाँघो को स्पर्श कर रही थी और उनके जाँघो के बाल मेरी जाँघो से रग़ाद कर सेक्स की गर्मी पैदा कर रहे थे. डॅडी जी पीछे से पकड़ कर अपने हाथो से

मेरे दूध को दबा रहे थे. डॅडी जी के धक्के सुरू हो चुके थे और पच पच की आवाज़ घर मे गूँज रही थी. डॅडी जी रुक रुक कर मूज़े छोड़ रहे थे. मैं भी अपनी कमर को पीछे कर के उनका साथ दे रही थी. डॅडी जी पीछे से मेरी सॉफ्ट पीठ पे अपनी

जीभ से छत रहे थे. थोड़ी देर मे ही मेरा पहला पानी निकल आया और मैं एक अद्भुत अहसास महसूस करने लगी थी. डॅडी जी नही रुक रहे थे एक दूं से डॅडी जी ने भी अपनी स्पीड बड़ा दी, मैं समझ गई की डॅडी जी का पानी भी निकालने वाला है.

मैने एक दूं से उन्हे दूर करने की कोसिस की तो उन्होने मूज़े कस कर पकड़ लिया और अपना बीज मेरे सुनी छूट मे छोढ़ दिया.डॅडी जी की जबार्दुस्त चुदाई से मेरी छूट एक दूं लाल पद चुकी थी. पूरा बीज छूट मे छोढ़ने के बाद डॅडी जी

वही मेरे उपर लाते गये मैं एक dum तक चुकी थी. जब उन्होने अपना लंड मेरी छूट से नही निकाला तो मैने ही धक्का देकर उन्हे अपने से अलग किया और उनके लंड को छूट से निकाला. मैं उठकर सीधे अपने बातरूम मे गई, मूज़े चलने मे थोड़ी

परेसानी हो रही थी.मैं अपनी छूट को पानी से ढोने लगी जिससे की डॅडी जी के लंड का पानी सॉफ हो जाए.डॅडी जी का रूस पानी के साथ मेरी छूट और जाँघो से नीचे वा रहा था. मैने तुरंत अपने आप को साबुन से सॉफ किया. और बात्ट्च्ब मे लेट

कर अपने आप को शांत करने की कोसिस कर रही थी. जब मैं बातरूम से लौट कर आई तो देखा की डॅडी जी अभी भी बेड पे लेते थे. मैने देखा की डॅडी जी का लंड सिकुड कर छोटा हो गया था. मूज़े अपने पति की याद आ रही थी. और मैं अपने आपको कोष रही

थी की मैने विरोध क्यो नही काइया. मैं दर गई और अपना रूम बंद करके रोने लगी की मैने ये क्या करवा लिया. तभी डॅडी जी उठे और मेरी टवल खोल दी और मैं पूरी नंगी उनके सामने खड़ी थी. डॅडी जी मुजसे लिपट गये और बातरूम मे ले गये

मूज़े. बातरूम मे शवर के नीचे खड़े होकर मेरे दोनो दूधो को चूसने लगे और अपने हाथो से मेरे चूतड़ को दवाने लगे. मैने कहा अब प्लीज़ छोढ़ दो मूज़े जाने दो. उन्होने मेरी एक ना सुनी और मुझे वॉशबेसिन के सहारे खड़ा कर दिया और

मेरी टाँग को उपर उठा कर अपना लंड को मेरी छूट मे घुसा दिया. दर्द के मारे मेरा तो बुरा हाल था. डॅडी जी के हाथ मे एक तंग थी और वो मेरी छूट मे धक्के मारे चले जा रहे थे. मैने शर्म से आँखे बंद कर रखी थी. डॅडी जी के धक्को की

स्पीड बदती ही चली जा रही थी.वो अपने छोटे पर मोटे लंड को अंदर तक घुसेड रहे थे. जिससे उनके झंटते मेरी छूट को रग़ाद रही थी. थोड़ी देर के बाद उनका पानी छूटने लगा और मेरा भी पानी उनके साथ ही छूटने लगा. फिर वो शवर लेने लगे

और मेरी टवल से अपने लंड को सॉफ करके बाहर चले गये. उन्होने पहले मूज़े मेरे पति के बेड मे छोड़ा और बाद मे मेरे बातरूम मे जहा कई बार मेरे पति ने भी मूज़े छोड़ा था. मूज़े बहुत शर्म आ रही थी. इश्स घटना के बाद मैं अपनी

नज़ारे नई मिला पा रही थी. मैने अपने आपको फ्रेश काइया और बेडरूम की शीट बदल दी. ब्रेकफास्ट करने के बाद सीधे स्कूल चली गई. स्कूल मे सभी लोग मूज़े विश कर रहे थे. पर मेरे आँखो के सामने बार बार मेरे फादर इन लॉ की चुदाई का

सीन आ रहा था .
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