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भैया कर दो मेरा बलात्कार


दोस्तों ये कहानी आप सेक्सवासना डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

हाय ,मेरा नाम कनिका शर्मा हे और में जयपुर कि एक पॉश कॉलोनी में रहती हु। मेरी २ साल पहले ही शादी हुई हे और मेरे पति १ इंजीनियर हे जिनकी पोस्टिंग आजकल पुणे में हे। मेरे पति अमित के मम्मी पापा जयपुर ही रहते हे तो मुझे

उनकी देखभाल के लिए उन्ही के पास रहना पड़ता हे। अमित हर ३ महीने में १ हफ्ते कि छुट्टी लेकर आ जाते हे तो हम पति पत्नी मिल पाते हे .,में अभी तक १५-१५ दिन के लिए २ बार पुणे गयी हु।मेरे और अमित के बिच सेक्स सम्बन्ध एक आम पति

पत्नी कि तरह ही हे ,अमित जब जयपुर रहते हे तो रोजाना ही सेक्स करते हे,जब में पुणे गयी तो वंहा भी उन्होंने रोज ही सेक्स किया,पर उनका सेक्स करने का तरीका सीधा साधा से हे ,वो न तो कोई ज्यादा सेक्सी बात करते हे ,न ही कोई

नया प्रयोग करते हे ,बस वो १०-१५ मिनट में मेरे उप्पर चढ़ जाते हे अपने धक्के लगाये ,खलास हुए और उतर गए उन्हें न तो ये एहसास होता हे कि में उत्तेजित हुई या नहीं या मे चरम उत्कर्ष पर पहुची या नही। पर चूंकि अमित ने कभी मेरी

योनि को प्यार नहीं किया तो मैं भी एक शर्मीली नारी बनी रही, मैंने भी कभी अमित के लिंग को प्यार नहीं किया। मुझे लगता था कि अपनी तरफ से ऐसी पहल करने पर अमित मुझे चरित्रहीन ना समझ लें। सच तो यह है कि पिछले सालों में

मैंने अमित का लिंग अपने अंदर लिया था पर आज तक मैं उसका सही रंग भी नहीं जानती थी… क्योंकि सैक्स करते समय अमित हमेशा लाइट बंद कर देते थे और मेरे ऊपर आ जाते थे। मैंने तो कभी रोशनी में आज तक अमित को नंगा भी नहीं देखा था।

मुझे लगता है कि हम भारतीय नारियों में से अधिकतर ऐसी ही जिन्दगी जीती हैं… और अपने इसी जीवन से सन्तुष्ट भी हैं। परन्तु कभी कभी इक्का-दुक्का बार जब कभी ऐसा कोई दृश्य आ सामने जाता है तो जीवन में कुछ अधूरापन सा लगने

लगता है जिसको सहज करने में 2-3 दिन लग ही जाते हैं। हम औरतें फिर से अपने घरेलू जीवन में खो जाती हैं और धीरे-धीरे सब कुछ सामान्य हो जाता है। फिर भी हम अपने जीवन से सन्तुष्ट ही होती हैं। क्कि हमारा पहला धर्म पति की सेवा

करना और पति की इच्छाओं को पूरा करना है। यदि हम पति को सन्तुष्ट नहीं कर पाती हैं तो शायद यही हमारे जीवन की सबसे बड़ी कमी है। और यह भी जान जाईये कि लड़की को चरमोत्कर्ष पर लाना कोई बच्चों का खेल नहीं है। हम औरतें झूठे

ओर्गास्म का ड्रामा करती हैं ताकि मर्दों के अहम् को ठेस न पहुंचे। न जाने कितनी लड़कियों को चरमोत्कर्ष कभी नसीब नहीं होता और कितनों को एक ही सेक्स में तीन से चार बार हो जाता है। चरमोत्कर्ष केवल पांच-दस मिनट के सेक्स

से नहीं मिलता, लगातार तीस मिनट की चुदाई से मिलता है, और जब मिलता है तब ‘हयो रब्बा’ क्या मज़ा मिलता है ! अंदर से सिकुड़न होती है और कान से धुंए निकल जाते हैं, बस आग ही आग बदन से टपकने लगती है। आम तौर पर लड़कियों की चूत

गीली ही रहती है और गीली और तब हो जाती है जब कोई उससे सेक्स की बातें करता है, या प्यार से छूता है, इसे पानी छोड़ना नहीं कहते हैं, पानी छोड़ने का अर्थ, लड़कियों के चरमोत्कर्ष को कहते हैं जो किस्मत वालियों को नसीब होता है

वर्ना अक्सर लड़के मुठ चूत में निकालने के बाद पीठ फेर कर सो जाते हैं। चलिए ये बाते तो समय समय पर कहानी में आगे आती रहेंगी लेकिन अभी बात हम अभी वर्त्तमान कि ही करते हे। अब आप ही सोचिये जिस लड़की कि शादी के २ साल ही हुए

हो और उसे साल में केवल कुछ समय ही चुदाई का मोका मिले तो उसका क्या हाल होता होगा वो ही मेरे साथ होता था। में अक्सर चुदाई के लिए तड़पती थी,किसी भी युवा लड़के को देख मेरी चूत गीली हो जाती थी,में बाज़ार जाती तो पेशाबघरों कि

और जरुर नजर डालती क्य़ोंकि अक्सर उनमे से कोई न कोई पेशाब कर बहार निकलता होता और अपने लोडे को पेंट के अंदर कर रहा होता,उसके लोडे को देख कर ही में आह भर लेती जो कोई मेरी और देख लेता वो लोडे को इतनी देर में पेंट के अंदर

करता कि मेरा मन ख़राब हो जाता। पर मेरे ससुराल कि इस एरिया में बड़ी इमेज थी तो मुझे बड़े सावधान होकर रहना पड़ता,मेरे सास ससुर मेरा पूरा ख्याल रखते थे,लेकिन मेरी चूत कि खुजली का तो वो भी क्या ही करते। मुझे अपनी चूत कि

खुजली वो ही अंगुली करके या मूली बेंगन से शांत करनी पड़ती। देखा जाये तो मेरी ज़िंदगी यूही गुजर रही थी, अमित महीने में जब भी आते उनके पास वैसे ही घर के काफी काम होते,काम करने के बाद रात को थके हारे जब वो मेरे पास आते तो

चुदाई का उनका मूड होता तो वो कर लेते ,उन्हें इस बात से कोई मतलब नही था की में चरम सुख हासिल कर सकी या नही। इधर अब मेरे सास ससुर भी मेरे अकेलेपन को सोचने लगे थे की में चांस ले लू और अगर बच्चा हो जायेगा तो अमित की काफी

हद तक कमी भी पूरी हो जाएगी। उन्होंने अपनी इस इच्छा को अमित को भी बता दिया था,लेकिन अमित भी जानते थे की उनसे ये काम भी होना कितना मुश्किल हे। में घर पर अकेले पड़ी पड़ी बोर होती रहती,कभी में घर से बहार जाती तो हर मर्द को

में नदीदी निगाहो से देखती रहती,मन ही मन उसके लंड की कल्पना करती ,कभी सोचती की ये अगर मेरी चुदाई करे तो मुझे किसी ख़ुशी मिलेगी,कोई मर्द मेरी निगाहो को ताड जाता तो वो मुझे लाइन देने की कोशिश भी करता लेकिन में ही डर के

मरे पीछे हट जाती। कॉलोनी के कई नौजवान भी जब में अकेली जाती तो कोई जुमला उछाल देते कभी कोई कमेंट कर देते पर में किसी का बुरा नही मानती बल्कि मुझे ख़ुशी ही होती की अभी भी मेरे कई दीवाने हो सकते हे। बहार जब में जाती तो

अक्सर चुस्त जींस पहनती और उसके उप्पर शार्ट टॉप। यदि कोई मेरी जींस को धयान से देखता तो वो मेरी ब्रीफ लाइन का आसानी से अंदाजा लगा सकता था और अगर कोई ज्यादा ही होशियार हो तो वो मेरी चूत का भी अंदाजा लगा सकता था। अब

में आपको वो वाकया बताती हु जिसने मेरी ज़िंदगी बदल कर रख दी,हुआ यू की मुझे अपने एक कजिन की शादी में आगरा जाना पड़ा ,अमित को छुट्टी नही मिली तो मेरे को अकेले ही आगरा जाना पड़ा,मेरा कजिन बॉबी मुझसे २-३ साल बड़ा था ,वो छोटा था

उससे बड़े एक भाई और थे जिनका नाम केशव था और वो शादीशुदा थे। में पहुंची तो बहुत थक गयी थी और रात भी हो चुकी थी।मैंने गुलाबी साटन कि साड़ी और और ब्लाउज पहन रखी थी !अंदर जौकी कि ही मैचिंग ब्रा और पॅंटी पहनी थी !सर में दर्द

था और चक्कर भी आ रहे थे !मैंने सोचा कि दवा खा कर थोड़ी देर लेटती हूँ ,फिर नाईट ड्रेस पहन लुंगी !बिस्तर पर लेटते ही कब नींद आ गई ,पाता नहीं चला !करीब पांच बजे सुबह नींद खुली तो कुछ अजीब सा लगा !साड़ी पूरी उठी हुई थी

,पेटीकोट के साथ !पैंटी में बहुत गीलापन था !ब्रा के हुक अंदर से खुले थे और निप्पल के पास पूरा गीला था !मैंने जल्दी से कपड़े ठीक किये और बाथरूम भागी !पैंटी उतारते ही मैं चौंक गयी,क्योकि पैंटी उलटी थी !मैंने ज़िन्दगी में

कभी उलटी पैंटी नही पहनी थी ,और मुझे पूरा विस्वास था कि कल भी मैंने सीधी पहनी थी! ब्लाउज उतारा तो देखा कि ब्रा का सिर्फ एक हुक लगा है वो भी गलत जगह !इसका मतलब था कि किसी ने मेरी ब्लाउज और ब्रा खोली,पैंटी उतारी और वापस

पहना दिया !मेरे चिकने चूत पर भी एक चमक थी,जैसे किसी ने उसको रगड़ रगड़ के साफ़ किया हो !मेरे तो होश उड़ गए कि कौन हो सकता है ,क्या किसी कजिन ने मजाक में ये किया है या किसी मर्द ने !ताज़्ज़ुब इस बात का था कि मुझे पाता नहीं चला

!किसी तरह इस टेंशन में मैं तैयार होकर नीचे उतरी ,ज़िन्दगी में पहली बार मेरे साथ ऐसा हुआ था ! किसी से कुछ पूछना या बोलना मेरे लिए असंभव था ! एक बार सोचा की अमित से बात करूँ ,पर मुझे लगा कि अभी तो क्या ,मैं पूरी ज़िन्दगी यह

बोलने का साहस नहीं कर पाउंगी ! किचन से चाय लेकर निकली तो देखा कि केशव भैय्या बाहर से वापस आ रहे थे ! उन्होंने पुछा कि तबियत कैसी है , मैंने हाँ में सर झुकाया ,और आगे बढ़ गई !बदन में अजीब सी सनसनाहट हो रही थी ! चूत बहुत

ज्यादा कोमल लग रही थी ! पैंटी के साथ हलकी सी रगड़ भी सनसनाहट दे रही थी !मेरे लिए ये नया अनुभव था ! कौन है वो जिसने मेरे अंगों से खेला है !औरत होने के नाते एक बात का मुझे पक्का यकीन था कि मेरे साथ सेक्स नहीं हुआ है ,पर बाहर

से किसी ने जी भर के चूमा चाटा है ! मेरा किसी भी काम में मन नहीं लग रहा था ! मैं इतनी बेहोश कैसे हो सकती हूँ कि मुझे पता नहीं चला !दिन भर रिश्तेदारों के साथ बातें होती रही ! दिन में आराम का मौका ही नहीं मिला ,जिससे थकावट

बहुत ज्यादा हो गई थी !! शाम होते होते मुझे बहुत ज्यादा थकावट होने लगी थी !मैंने खाना शाम को ही खाया था ,इसलिए रात को खाना नहीं खाना था !मेरी मौसी ने कहा कि मैं जा के आराम कर लूँ !मैंने कह दिया कि अब मैं रूम में जा रही हूँ

सोने के लिए ! ऊपर रूम में आकर मैंने कपड़े बदलने कि सोची , नाईट ड्रेस पहना और दवा खाकर सोने चली गई ! नाईट ड्रेस के साथ मैं ब्रा और पैंटी नहीं पहनती थी ! दिमाग में कल कि बातें चल रही थी !मैंने सोच लिया था कि अगर आज ऐसा कुछ

हुआ तो मैं जरूर पकड़ लुंगी उस अनजान चेहरे को !शाम के ७ बजते बजते मुझे गहरी नींद आ गई !देर रात मुझे अहसास हुआ कि कोई मेरे चूत को जीभ से चाट रहा है !मैं डर के मारे आँख नहीं खोल पाई ! मेरी नाईट ड्रेस ऊपर गर्दन तक उठे हुए थे ,

अजनबी के दोनों हाथ मेरे चूची को सहला रहे थे !कमरे में हलकी रौशनी तो थी, पर आँखें खोल कर देखने का साहस मुझमे नहीं था !चूत चाटने वाला बड़े आराम से चूत का कोना कोना जीभ से साफ़ कर रहा था , कोई जल्दी नहीं लग रही थी ! पूरा बदन

सनसना रहा था ! कि अचानक .,,,अचानक मेरे पूरे बदन में एक तनाव सा आया , और लगा जैसे मेरी चूत से फौवारा छूटा है ! उसके बाद मेरे कमर के नीचे का हिस्सा बिलकुल ही ढीला पर गया !शायद अज़नबी को कुछ शक हुआ की मैं जाग रही हूँ !थोड़ी देर

के लिए सब कुछ शांत हो गया !मैं समझी की चलो बला टली !मैं चुप चाप लेटी रही !मैं यह चाहती थी की अजनबी को लगे कि मुझे कुछ पता नहीं चला कि मेरे साथ क्या हुआ !मैं किसी आहट का इंतज़ार कर रही थी कि उसके जाते जाते मैं उसे देख पाउ

और कम से कम ये जान तो लूँ कि ये कौन है !कुछ समय ऐसे ही बीत गया !मैं चाहती थी कि जल्दी से मैं नाईटी को नीचे करू ,क्यूकि नंगे बदन मुझे बड़ा अजीब लग रहा था !मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि कभी मेरे साथ ऐसा हो सकता है !अमित

ने भी मुझे कभी नंगा नहीं किया ! बस अँधेरे कमरे में नाईटी कमर तक उठा कर जो भी उससे बन पड़ता था ,कर लेता था !मुझे भी सेक्स के बारे ज्यादा पता नहीं था ,जीभ से चूत को चाटा जाता है , ये तो बिलकुल मेरी समझ के बाहर था ! मुझे बस एक

ही बात अच्छी लगी थी कि मेरी चूत ने उसे बहुत पसंद किया था और पहली बार मुझे पूरा संतोष लग रहा था !लेकिन अनजाने मर्द का ख्याल आते ही मन घृणा से भर गया ! मैं किस मुह से अमित के सामने जाउंगी ,मेरे दिमाग में ये बात चल रही थी

!मुझे पहली बार ऐसा लगा कि मैंने अमित के साथ धोखा किया !लेकिन मैं कर भी क्या सकती थी !जब पहली बार मेरी चूत और चूची चाटी गई, तो मुझे पता भी न चला , अब आज अगर रोक भी लेती तो दाग तो लग ही चूका था मेरे दामन पे ! इन उलझलों में अभी

खोई ही थी कि एक ऊँगली का अहसास मेरे चूत को हुआ ! वो ऊँगली से मेरे चूत को सहला रहा था !स्पर्श इतना हल्का था कि मेरे रोएँ खड़े हो गए थे !वो मेरे चूत के आस पास ऊँगली से सहला रहा था और बीच बीच में चूत में भी थोड़ा सा घुसा कर आगे

पीछे कर रहा था ! अज़नबी की ऊँगली अमित के लण्ड से मोटी थी ! फिर मुझे लगा कि कोई मेरे बगल में आकर लेटा है! उसका एक हाथ मेरे चूत पर था और दूसरे से वो मेरे होंठ सहला रहा था !फिर अचानक से मेरे चूची पर जीभ फिराने का अहसास होने

लगा, और उसने एक निप्पल मुंह में ले लिया !जैसे जैसे वो मेरे निप्पल को मुंह में लेकर चूस रहा था ,मेरा शरीर मेरा साथ छोड़ रहा था !शरीर और अंतरात्मा में जंग छिड़ गयी थी !बदन पूरी तरह अज़नबी का साथ दे रहा था और अंतरात्मा मुझे

धिक्कार रही थी ! मुझे लगा अगर जल्दी से मैंने कोई कदम नहीं उठाया तो अनर्थ हो जायेगा !शरीर में कंपकपी होने लगी थी !मैंने पूरी हिम्मत के साथ अपनी आँख थोड़ी सी खोली !हलकी रौशनी कमरे में थी ! डर से आँख ज्यादा नहीं खोल रही थी

क्योंकि मैं यही चाहती थी कि मुझे उसका सामना न करना पड़े और वो बस इतने पर वापस चला जाये ! उसकी हिम्मत बढ़ती जा रही थी,क्योकि वो बीच बीच में मेरे होंठ भी चूस लेता था !अब मुझे लगा कि अब नहीं तो फिर बहुत देर हो जाएगी ! मैंने

अपने बदन को इस तरह घुमाया , जैसे मैं करवट ले रही हूँ !लेकिन मेरी उम्मीद के उलट अज़नबी ने मुझे अपने बाँहों में ले लिया ! शुक्र था कि उसने कपड़े पहन रखे थे !अब मेरे बगल में अजनभी लेटा था !उसने अपना एक पैर मेरे दोनों पैर के

ऊपर डाल कर मुझे हिलने डुलने से रोक दिया !बहुत ही ताक़त थी उसके बंधन में और बहुत गठीला जवान मर्द का अहसास हो रहा था मुझे !अब उसने मेरे मुंह में अपनी जबान डाल दी और रास पीने लगा !मेरे लिए अब बर्दाश्त से बाहर हो रहा था ,और

मुझे लग रहा था कि अब किसी भी वक़्त वो मुझे चोद सकता है ,क्योंकि वो आक्रामक होता जा रहा था ! न जाने क्यों ये सब मुझे बहुत अच्छा लग रहा था ,लेकिन अमित के साथ मैं मरते दम तक बेवफाई नहीं कर सकती थी ! काश ये सब अमित कर रहा होता

, मैं तो गुलाम बन जाती उसकी ! अब बस और नहीं , मैंने अपनी पूरी हिम्मत जुटाई और ऑंखें खोल दी !आँखें खोलते ही जैसे भूचाल आ गया !मैं पूरी जोर से चीखी….केशव …भैया आप !लेकिन मेरी चीख में उतना जोर नहीं था कि वो आँगन के उस पार सो

रहे लोगों तक पहुँच पाती , और फिर भइया ने अपना हाथ मेरे मुंह पर रख दिया था जिससे रूम में ही मेरी आवाज़ दब कर रह गई ! मैं कभी सोच भी नहीं सकती थी कि भैया मेरे साथ ऐसी हरकत कर सकते हैं ! हैरानी कि बात ये थी कि मेरे जागने के

बाद भी भैया को कोई डर या पछतावा नहीं था !मेरा मुंह उन्होंने बंद कर रखा था ! मेरी आँखों में आंसू थे ! भैया ने बोला , देखो , अगर तुम चिल्लाओ नहीं तो मैं तुम्हारे मुंह पर से हाथ हटाउ ! मेरा मुंह गुस्से से लाल हो रहा था !भैया

के भारी हाथ के कारण मेरा मुंह दर्द कर रहा था ! मैंने आँखों से ही उनसे रिक्वेस्ट किया , उन्होंने फिर पूछा ‘चिल्लाओगी तो नहीं’ ! मैंने पलकें झपका कर ना कहा !उन्होंने कहा ‘प्रॉमिस ‘,और हाथ थोड़ा हल्का किया ,मैंने दबी

जबान में बोला ‘प्रॉमिस ! उन्होंने हाथ हटा लिया था !मैंने गिरगिराना शुरू कर दिया . भैया आप ये क्या कर रहें हैं ..मैं आपके छोटे भाई कि बीवी हूँ ,!आप ऐसा मत कीजिये मेरे साथ !मुझे छोड़ दीजिये , मैं किसी से नहीं कहूँगी ,कि

आपने मेरे साथ ऐसा किया !भैया ने कहा ‘ठीक है, मैं तुम्हें छोड़ दूंगा लेकिन एक शर्त पर ‘!मुझे आपकी सब शर्त मंजूर है भैया , बस आप मुझे छोड़ दीजिये ! भैया बहुत शर्मिंदा लग रहे थे ,बोले ‘देखो ,मैंने ऐसा क्यों किया ,ये मैं बाद

में बताऊंगा तो शायद तुम मुझे माफ़ कर सको ! मैंने कल और आज तुम्हारे शरीर के हरेक अंग को छुआ है ,लेकिन तुम नींद में थी !मैं सिर्फ १० मिनट तुम्हारे जागते हुए तुम्हें महसूस करना चाहता हूँ , तुम्हारे साथ वो सब करना चाहता

हूँ ,जो मैंने कल और आज किया है, तुम्हारी नींद में ! लेकिन जो भी मैं करूँगा वो अपने संतुष्टि के लिए करूँगा ,तुम उसमे बिलकुल शामिल न होना !अगर तुम्हारे शरीर ने मेरा साथ दिया , तो तुम शर्त हार जाओगी , और मैं समझूंगा की ये

सब तुम्हें अच्छा लग रहा है ; फिर तुम वही करोगी जो मैं चाहूंगा ! और अगर तुम दस मिनट तक बगैर किसी उत्तेज़ना के चुप चाप लेटी रही तो ,मैं ज़िंदगी में कभी दुबारा तुम्हारी साथ ये सब नहीं करूँगा ! मैं बहुत असंजस में फँस गई थी ,

एक तरफ अपनी आत्मा को मारना था ,दूसरी तरफ भैया से हमेशा के लिए छुटकारा ! एक बात का तो मुझे पक्का यकीन था, मैं और मेरा शरीर, उनके किसी भी हरकत पर उनका साथ नहीं देंगे,क्यूंकि एक तो मुझे उनसे नफरत सी हो गई थी और दूसरा कि

उनके घंटो चूमने चाटने के बाद भी मैंने अपने आप पर कंट्रोल रखा था और उनको ये पता नहीं लगने दिया था कि मैं जागी हुई हूँ !वैसे भी अगर मैं उनकी शर्त न मानती तो शायद वो अभी मेरी चुदाई कर दें ;और मुझे पता था कि मैं उनका कुछ

भी नहीं बिगाड़ पाऊँगी ! जल्दबाज़ी में मुझे कुछ नहीं सूझा.मैंने कह दिया ,”मुझे मंजूर है..” मैं फंस चुकी थी और मैंने भैया को एक मौका दे दिया। इस बलात्कार में आगे क्या होता है, जल्दी ही आखिरी पार्ट आएगा..
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